यूजीसी NTA नेट / जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020 जून 2021 इतिहास (SHIFT-II)

Total Questions: 100

81. वासवदत्ता और रावणवध के रचयिता है-

Correct Answer: (b) क्रमशः भारवि और माघ
Solution:

वासवदत्ता एक संस्कृत नाटक है। इसके रचयिता सुबन्धु हैं। सुबन्धु छठी शताब्दी ईस्वी में हुए थे ऐसा कहा जाता है। विद्वानों का मत है, कि उनके काव्य में वर्णनात्मक भाग अधिक है। सुबन्धु ने अपने सम्बन्ध में 'सुजानैकबन्धुः के अलावा कुछ नहीं कहा है। उनके व्यक्तिगत जीवन और व्यक्तित्व के सम्बन्ध में देश और काल की तरह अनुमान के ही आधार पर यह कह सकते हैं कि वे वैदिक धर्मावलम्बी थे। भट्टिकाव्य महाकवि भट्टि द्वारा रचित महाकाव्य है।

इसका वास्तविक नाम 'रावणवध' है। इसमें भगवान राम चन्द्र की कथा जन्म से लेकर लंकेश्वर रावण के संहार तक का वर्णन है। यह महाकाव्य संस्कृत साहित्य के दो महान परम्पराओं रामायण एवं पाणिनी व्याकरण का मिश्रण होने के नाते कला और विज्ञान का समिश्रण है। भवभूति प्राचीन विद्वान थे जिनके तीन नाटक बहुत ही प्रसिद्ध है। जो निम्न हैं। (1) मालतीमाधव (2) उत्तररामचरित (3) महावीरचरित । माघ, मारवाड़ के प्राचीनतम महाकाव्य, 'शिशुपाल वध' के रचयिता थे। वे सर्वश्रेष्ठ संस्कृत महाकवियों की त्रयी में अन्यतम हैं।

कालिदास और अश्वघोष के बाद तृतीय उल्लेखनीय महाकवि भारवि है। पर इनका काव्य विचित्र मार्ग भी कहा जाता है। इनकी कृति - किरातानुर्जनीयम है। भर्तृहरि एक नीतिकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। जो संस्कृत के एक महान कवि थे। इनके शतकत्रय की उपदेशात्मक कहानियाँ भारतीय जनमानस को विशेष रूप से प्रभावित करती हैं।

82. निम्नलिखित कानूनों को उनके लागू होने की तारीख से कालक्रमानुसार रखें।

(A) भारत में गुलाम प्रथा को अवैध घोषित करने वाला इंडिया एक्ट V
(B) ईसाई धर्मांतरितों के लिए उत्तराधिकार का एक्ट XXXI
(C) शिशु बलि को हत्या घोषित करने वाला रेगुलेशन VI
(D) बंगाल प्रेसिडेंसी में सती प्रथा को अवैध घोषित करने वाला रेगुलेशन XVI

Correct Answer: (a) (C), (D), (A), (B)
Solution:

सही कालानुक्रम इस प्रकार है-

(1) शिशु बलि की हत्या घोषित करने वाला रेगुलेशन VI (1802)

(2) बंगाल प्रेसिडेंसी में सती प्रथा को अवैध घोषित करने वाला रेगुलेशन XVII (1829)

(3) भारत में गुलाम प्रथा को अवैध घोषित करने वाला इंडिया एक्ट V (1843)

(4) ईसाई धर्मतरितों के लिए उत्तराधिकार का एक्ट XXXI (1925)

83. परिहारों यानि राजकीय माँगों और दावों से छूटों का उल्लेख इनमें से किसमें है?

Correct Answer: (a) अशोक का सारनाथ स्तम्भ अभिलेख
Solution:

गौतमीपुत्र शातकर्णि के नासिक अभिलेख से पता चलता है कि बुनकरों की एक-एक श्रेणी के पास 2000 कार्षापणों की एक अक्षयनीवि (स्थायी निपेक्ष या पूंजी) एक प्रतिशत मासिक ब्याज की दर से जमा की गयी थी।

इसी प्रकार एक अन्य निधि 1000 काहापर्णों की थी, जिस पर 3/4 प्रतिशत मासिक ब्याज देता था।श्रेणियाँ अपने नाम से दान भी दे सकती थी। इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि गौतमीपुत्र शातकर्णि, के नासिक अभिलेख में राजकीय माँगों और दावों से छूट का उल्लेख है।

अशोक का सारनाथ लघु-स्तम्भ अभिलेख में अशोक अपने 'महामात्रों' को संघ भेद रोकने का आदेश देता है। समुद्रगुप्त के इतिहास का सर्वप्रमुख स्रोत उसी का अभिलेख है जिसे 'इलाहाबाद स्तम्भ लेख' अथवा प्रयाग प्रशस्ति कहा जाता है। इसकी रचना उसके 'सन्धिविग्रहिक' सचिव हरिषेण ने की थी।

शक महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख शक सम्वत् 72 (78+72 = 150ई0) का है। यह विशुद्ध संस्कृत भाषा में लिखे गये प्राचीनतम अभिलेखों में एक है यह चम्पूशैली (गद्य पद्य) मिश्रित में लिख गया पहला अभिलेख है।

84. मुगलकाल में चिंकारा की पारदर्शी खाल के टुकड़े पर अनुरेखण करके रेखाचित्र बनाया जाता था, इसे क्या कहा जाता था?

Correct Answer: (a) चरबा
Solution:

मुगलकाल में चिंकारा की पारदर्शी खाल के टुकड़े पर अनुरेखण करके जो रेखाचित्र बनाये जाते थे उन्हें 'चरबा' कहा जाता था। चित्रकला की विशेष शैली को 'कलम' तूलिका या स्कूल कहा गया है। मुगल चित्रकला शैली ने दरबार के भौतिक जीवन, शाही उत्सवों, जुलूसों, शिकारों और बर्बरतापूर्ण तथापि एक पूर्वदेशीय वंश की शानशौकत के अनुकूल, घटनाओं के चित्रण तक ही अपने को सीमित रखा था।

दक्षिण की चित्रकला शैली मुगल शैली की ही एक शाखा थी। औरंगजेब की विजय के पश्चात् ही दक्षिण में इसका प्रादुर्भाव हुआ। मुगल चित्रों के हाशिये भी कुशल कलाकारों द्वारा बनाये जाते थे, जो केवल हाशिये बनाने में ही सिद्धहस्त थे। चित्र के साथ-साथ चित्र को चारों ओर से 'खत' में बाँधने की प्रथा थी।

85. जब शाहजादा मुहम्मद काम बख्श ने उसका दायां हाथ काटने का आदेश दिया, तो सैफ खान ने कहा, 'यह नीच आचरण है, जो तुमने अपनी माँ से पाया है। यह हाथ जिसे तुमने बिना किसी कसूर के कटवा दिया, इसी ने तुम्हें तीरंदाजी सिखाई थी।

Correct Answer: (c) उदयपुरी बेगम
Solution:

शाहजादा मुहम्मद काम बख्श मुगल सम्राट औरंगजेब के सबसे छोटे बेटे थे, जो उनकी पत्नी उदयपुरी बेगम से पैदा हुए थे। उपरोक्त कथन शाहजादा द्वारा अपने गुरु के हाथ काटने का आदेश देने के बाद सैफ खान ने कहा था। दिलरास बानो सम्राट औरंगजेब की पहली व मुख्य पत्नी थी।

जबकि नवाब बाई मुगल सम्राट औरंगजेब की माध्यमिक पत्नी थी। नादिरा बेगम एक मुगल शहजादी तथा पाँचवें मुगल शासक शाहजहाँ के सबसे बड़े बेटे राजकुमार दारा शिकोह की पत्नी थी।

86. मालाबार के किस शासक ने 1766 में मैसूर से होने वाले धावे को रोका था और डच तथा अंग्रेजी व्यापारिक कंपनियों को नियंत्रण में रखने के लिए काली मिर्च के व्यापार पर अपनी शर्तें लागू की थीं?

Correct Answer: (a) वाम्मा पलासी राजा
Solution:

18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मालाबार तट पर हिंदू शासक वाम्मा पलासी राजा का शासन था। उसके शासनकाल के दौरान अंग्रेजी व्यापारिक कंपनियाँ (ईस्ट इंडिया कम्पनी) दक्षिण भारत की ओर अपना व्यापारिक एवं राजनीतिक प्रसार कर रही थीं। वे कंपनियाँ भारतीय राजाओं के बीच मतभेद डालकर उन राज्यों पर क्रमशः अपना अधिकार बढ़ाती जा रही थीं।

जिससे अंग्रेज किसानों से मालगुजारी वसूल करने का काम भारतीय राजाओं को सौंप देते थे और खेती करने वाले किसानों का बिल्कुल परवाह नहीं करते थे। धीरे-धीरे किसानों पर अंग्रेज मालगुजारी की रकम बढ़ाते गये, जिससे किसानों का धैर्य टूट गया।

इसी समय 1766ई.में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के विरूद्ध 'वाम्मा पलासी राजा' ने अंग्रेजों की सहायता की इस सहायता के बदले अंग्रेजों से यह मौखिक शर्त हुयी थी कि कोट्टम की मालगुजारी एकत्र करने का अधिकार तथा काली मिर्च पर खेती व व्यापार का नियमन (देखरेख) 'वाम्मा पलासी राजा' करेंगे लेकिन मैसूर युद्ध के बाद अंग्रेज अपने वादों से मुकर गए जिससे 'वाम्मा पलासी राजा' ने अंग्रेजों के विरूद्ध विद्रोह कर दिया और कोट्टम से मालगुजारी अंग्रेजों को देना बंद कर दिया।

87. निम्नलिखित चिश्ती सूफियों को कालक्रमानुसार रखें:

A. शेख निजामुद्दीन औलिया
B. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती
C. शेख नसीरुद्दीन चिराग
D. शेख फरीद्दीन गंज-ए शकर

नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (c) (B), (D), (A), (C)
Solution:चिश्ती सूफियों का कालक्रम इस प्रकार है-
सूफीजन्म स्थान दरगाह 
1. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (1143 - 1236 ई.) भारत में चिश्ती सम्प्रदाय के संस्थापकसीस्तान (ईरान)अजमेर
2. शेख फरीदुद्दीन गंज-एशकर (1175-1265 ई.)मुल्तानअजोधन (पाकिस्तान के पंजाब)
3. शेख निजामुद्दीन औलिया (1236 - 1325 ई.)बदायूँदिल्ली
4. शेख नसीरुद्दीन चिराग (1274 - 1356)अयोध्यदिल्ली

88. निम्नलिखित में से किसने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत की स्त्री महामंडल की स्थापना की?

Correct Answer: (c) सरलादेवी चौधुरानी
Solution:

सरला देवी चौधुरानी ने 1910 ई.में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'भारत स्त्री महामंडल (इलाहाबाद में) की स्थापना की। यह भारत में पहली पहला संगठन था तथा सरला देवी एक प्रख्यात नारीवादी महिला के रूप में जानी जाती है। इनके द्वारा कलकत्ता में लड़कियों के लिए एक स्कूल 'भारत स्त्री शिक्षा सदन' की स्थापना की गयी।

सरला देवी ने लाहौर के आसपास के गाँवों में महिलाओं की शिक्षा के लिए भी काम किया था। मार्गरिट कजिंस ने 1927 में 'अखिल भारतीय महिला सम्मेलन (पुणे में) की स्थापना की। कजिस ने महिलाओं और बच्चों के लिए शैक्षिक कार्यों में सुधार तथा उनके अधिकारों की बात की थी। मार्गरेट कजिंस, ऐनी बेसेन्ट, डोरोथी जिनाराजादास और श्रीमती अम्मू स्वामीनाथन आदि के प्रयास से 1917 ई0 में 'महिला भारतीय संघ (मद्रास में)' की स्थापना हुई तथा इसकी प्रथम अध्यक्ष ऐनी बेसेन्ट बनी।

डोरोथी जिनाराजादास ने भारत में बाल-विवाह और महिला निरक्षरता को समाप्त करने का कार्य किया। श्रीमती अम्मू स्वामीनाथन को भारतीय संविधान सभा के सदस्य के रूप में चुना गया था। 1975 में अन्तर्राष्ट्रीय महिला वर्ष के अवसर पर श्रीमती अम्मू स्वामीनाथन को 'मदर ऑफ द ईयर' के रूप में चयनित किया गया था।

89. प्राचीन भारत में अनुलोम और प्रतिलोम थे?

A. विवाह की दो प्रणालियाँ
B. मोक्ष के लिए योग पद्धति के दो पद
C. वर्णसंकर पद्धति के दो पूरक पहलू
D. केशकर्तन की दो प्रचलित शैलियाँ

नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (c) केवल (A) और (C)
Solution:

प्राचीन भारत में अनुलोम और प्रतिलोम विवाह की दो प्रणालियाँ थी। अनुलोम विवाह में उच्च वर्ण का व्यक्ति अपने ठीक नीचे के वर्ण की कन्या के साथ विवाह करता था। वैदिक समाज में इस तरह के विवाह प्रायः हुआ करते थे। इससे उत्पन्न पुत्र को कम अधिकार मिले हुए थे। प्रतिलोम विवाह के अन्तर्गत उच्च वर्ण की कन्या का विवाह निम्न वर्ण के व्यक्ति के साथ होता था।

इस प्रकार के विवाह को निन्दनीय माना गया है तथा समाज में इसका बहुत कम प्रचलन था। प्रतिलोम विवाह से उत्पन्न सन्तान को निकृष्ट एवं अस्पृश्य बताया गया है। अतः इस प्रकार के विवाहों से समाज में वर्णसंकर पद्धति की उत्पत्ति मानी जाती थी। अछूतों को 'अन्त्यज' कहा गया है।

मोक्ष को भारतीय धर्म में जीवन का चरम लक्ष्य स्वीकार किया गया है। भारतीय जीवन पद्धति के अभिन्न अंग के रूप में 16 संस्कारों में एक केशकर्तन (केशान्त) संस्कार भी आता है। केशकर्तन संस्कार में विद्यार्थी की प्रथम बार दाढ़ी मूँछ बनवाई जाती थी। अन्त में वह मौन व्रत रहता था तथा एक वर्ष कठोर अनुशासन का जीवन व्यतीत करता था।

90. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assention A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में:

अभिकथन (A): 1800 में फोर्ट विलियम कालेज की स्थापना ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए लिपिकों और कैडेटों के प्रशिक्षण के उद्देश्य से हुई थी।
कारण (R): संस्कृत के अध्ययन के पीछे सर विलियम जोन्स का प्राथमिक उद्देश्य न्यायपालिका के लिए एक समान हिंदू कानून संहिता बनाना था।

उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनो
Solution:

लॉर्ड वेलेजली ने 1800 ई.में सिविल सेवकों (लिपिकों और कैडेटों) के प्रशिक्षण के लिए फोर्ट विलियम कालेज की स्थापना कोलकाता में की थी। चार्ल्स आयर, फोर्ट विलियम के प्रथम प्रेसीडेंट थे। इस संस्था द्वारा अरबी, फारसी, बंगला, संस्कृत, हिन्दी उर्दू आदि अनेक पुस्तकों का अनुवाद हुआ।

कम्पनी के कर्मचारियों की शिक्षा-दीक्षा के लिए गिलक्राइस्ट की अध्यक्षता में वेलेजली ने ओरियंटल सैमिनरी' की स्थापना की। जो कि बाद में फोर्ट विलियम कॉलेज में परिवर्तित हुई।

भारत में विलियम जोन्स का संस्कृत के अध्ययन के पीछे का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका के लिए एक समान हिन्दू कानून संहिता बनाना था। इसने अन्य विषयों के अध्ययन में गंभीर रुचि दिखाई ताकि भारत के विषय में जान सकें। इसी उद्देश्य से 1784 में इसने बंगाल में एशियाटिक सोसायटी की स्थापना की।

इस सोसायटी के द्वारा अनूदित पहली पुस्तक भगवत् गीता है। इस प्रकार कथन और कारण दोनों सत्य हैं, लेकिन एकदूसरे की स्पष्ट व्याख्या नहीं करता है। अतः (A) और (R) दोनों सही है, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।