Solution:शिव संहिता के अनुसार चित्रा नाड़ी को शरीर की उपाधि रूप कहा जाता है। शिव संहिता के अनुसार 10 प्राणवाहिनी प्रधान नाड़ियाँ इस प्रकार हैं -
इड़ा च पिंगला चैव सुषुम्ना च तृतीयकाः ।
गांधारी हस्तिचिह्वा च पूषा चैव यशस्विनी ।।
अलम्बुषा कुहूश्चैव शंखिनी दशमी स्मृता ।
एवन्नाडीमयं चक्रं ज्ञातव्यं योगिभिः सदा ।।
अर्थात् - इडा, पिंगला, सुषम्ना, गांधारी, हस्तिजिह्वा, पूषा, यशस्विनी, कुहू अलंबुषा तथा शंखिनी मुख्य नाड़ियों के नाम है। यह नाड़ीमय चक्र योगाभ्यासी को अवश्य जानने योग्य है।
नाभेरधोगतास्तिस्त्रो नाड्यः स्युरधोमुखः ।।
चित्राख्या सीविनी नाड़ी शुक्रमोचनकारिणी ।।
नाड़ी चक्र मिति प्रोक्तं विन्दुरुपमतः शृणु ।।
अर्थात् नाभि चक्र के निम्न भाग में तीन नाड़ियाँ नीचे की ओर जाती हैं। कुहू नाड़ी मल (पुरीष) त्यागती है, वारुणी नामक नाड़ी मूत्र विसर्जन करती है। चित्रा नाम की सीविनी नाड़ी शुक्र को शिश्न से निकालती है। यह नाड़ी चक्र के संदर्भ में कहा गया है।