Solution:हठ प्रदीपिका के अनुसार, नादानुसंधान की, निष्पत्ति अवस्था में वीणा के नाद का स्फुरण होता है। नाद अर्थात् शब्द, अनुसंधान कोई वस्तु जो पहले से विधमान है, उसे दोबारा खोजना । नाद अनुसंधान अर्थात् नाद का अनुसंधान करना या नाद के साथ संबंध जोड़ना, यह अनुसंधान तो स्वयं के आन्तरिक जगत का है।
नाद योग का उद्देश्य है - आहद से | अनाहद की ओर ले जाना। ब्राह्माण्ड और शरीर दोनों में अनाहद ध्वनि गूंज रही है अर्थात् ब्राह्माण्ड में गूंज रहे अनाहद से जोड़ना ताकि अपने बाहरी मन को आन्तरिक मन की ओर ले जा सके, यही नादयोग का उद्देश्य है। ॐ की ध्वनि का अनुसंधान करना ही नाद योग या नादानुसंधान कहलाता है।