यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 योग (YOGA)

Total Questions: 100

41. महर्षि पतञ्जलि के अनुसार कर्माशय का मुख्य कारण है :

Correct Answer: (c) क्लेश
Solution:

महर्षि पतंजलि के अनुसार कर्माशय का मुख्य कारण क्लेश होता है। "क्लेशमूलः कर्माशयो" कर्माशय का तात्पर्य कर्मों के संस्कार से होता है। कर्माशय के आधार पर ही परमेश्वर मनुष्य को सुख-दुःख रूपी फल प्रदान करता है।

42. अग्नाशय के α- कोशिकाओं द्वारा स्त्रावित हार्मोन है :

Correct Answer: (c) ग्लूकागॉन
Solution:

आमाशय के अल्फा (d) कोशिकाओं द्वारा स्त्रावित हार्मोन ग्लूकागॉन है। ग्लूकागॉन इंसुलिन के प्रभावों को संतुलित करके रक्त शर्करा स्तर को सामान्य बनाए रखता है। इसका निर्माण अग्नाशय में अल्फा नामक कोशिकाएं करती हैं।

43. स्वस्थ तान (Tore) किस प्रकार के आसनों के अभ्यास से होता है?

Correct Answer: (a) शरीर संवर्धनात्मक
Solution:

स्वस्थ तान (Tore) शरीर संवर्धनात्मक आसनों के अभ्यास से होता है। चित्त को स्थिर रखने वाले तथा सुख देने वाले बैठने के प्रकार को आसन कहते हैं।

आसनानि समस्तनियावन्तों जीवजन्तवः ।।
चतुरशीत लक्षणिशिवेनाभिहितानी च ।।

आसन एक वैज्ञानिक पद्धति हैं। ये हमारे शरीर को स्वच्छ, शुद्ध व सक्रिय रखकर मनुष्य को शारीरिक व मानसिक रूप से सदा स्वस्थ बनाएं रखते हैं।

44. योगाभ्यासों की अध्यापन विधियाँ पुस्तक के अनुसार अध्यापन विधियाँ कितनी हैं?

Correct Answer: (d) सात
Solution:

योगाभ्यासों की अध्यापन विधियाँ पुस्तक के अनुसार सात अध्यापन विधियाँ होती हैं। प्रमुख अध्यापन विधियाँ इस प्रकार हैं - i. आसन ii. प्राणायाम iii. बंध और मुद्रा iv. क्रिया v. ध्यान vi. मनोवृत्ति प्रशिक्षण

45. हठयोग प्रदीपिका के अनुसार उस क्रिया का नाम बतायें जिसे गोपनीय कहा गया है :-

Correct Answer: (d) त्राटक
Solution:

हठयोग प्रदीपिका के अनुसार उस क्रिया का नाम त्राटक है, जिसे गोपनीय कहा गया है। त्राटक का सामान्य अर्थ है- "किसी विशेष दृश्य को टकटकी लगाकर देखना।" मन की चंचलता को शान्त करने के लिए साधक इसे करता है। ध्यान करने की इस विधि में किसी वाह्य वस्तु को टकटकी लगाकर देखा जाता है।

विधि- त्राटक के लिए किसी भगवान, देवी, देवता, महापुरुष के चित्र, मूर्ति या चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। शरीर को स्वस्थ व शुद्ध बनाएं रखने के लिए षट्‌कर्म क्रियाएँ की जाती हैं। ये क्रियाएं हैं- (i) त्राटक (ii) नेती (iii) कपाल भाती (iv) धौती (v) बस्ती (vi)नौली।

46. हठयोग प्रदीपिका के अनुसार उस प्राणायाम का नाम बतायें जिसका अभ्यास चलते हुए अथवा बैठे-बैठे भी किया जा सकता है -

Correct Answer: (c) उज्जायी
Solution:

हठयोग प्रदीपिका के अनुसार उस प्राणायाम का नाम उज्जायी है, जिसका अभ्यास चलते हुए अथवा बैठे-बैठे किया जा सकता है। हठयोग प्रदीपिका के अनुसार मुंह बन्द करके व्यक्ति को धीरे-धीरे दोनों नासिकाओं से वायु अंदर खींचना चाहिए।

सांस खींचते समय इस प्रकार की ध्वनि उत्पन्न करनी चाहिए कि श्वांस गले से सीने तक महसूस हो। कुंभक करने के बाद वायु बांयी नासिका से धीरे-धीरे छोड़ी जाती है। यह बलगम के कारण होने वाली गले की बीमारियों को दूर करता है और जठराग्नि को बढ़ाता है। Note - उज्जायी का अर्थ होता है- जीतने वाला। अर्थात् इस प्राणायाम से सांसों पर विजय प्राप्त होती है।

47. जाँघों के अदा की ओर पैरों के दोनों तलवों को मोड़कर स्थिर अवस्था में शरीर को सीधा रखना कहलाता है :

Correct Answer: (c) स्वस्तिकासन
Solution:

जांघों के अंदर की ओर पैरों के दोनों तलवों को मोड़कर स्थिर अवस्था में शरीर को सीधा रखना स्वस्तिकासन कहलाता है। स्वस्तिक का अर्थ संस्कृत में 'समृद्ध' होता है। जब इस आसन का अभ्यास किया जाता है, तब एड़ियों का फैलाव स्वस्तिक की तरह दिखाई देता है। आसन पर बैठकर अपने पाँव सामने की ओर फैलाएं।

घुटने पर दाई टांग को मोड़े और एड़ी को बाई जांघ के जोड़ पर इस तरह रखें ताकि पैर का तलवा जाँघ को छूता रहे इसी प्रकार बाई जांघ को मोड़कर, उसे दाएं जोड़ के साथ रखें। बाएं पैर की उंगलियों को दाई पिंडली और जांघ की पेशियों के बीच रखें। हाथों को पद्मासन के अनुसार रखें।

48. हठ प्रदीपिका के अनुसार, नादानुसंधान की, निष्पत्ति अवस्था में किस के नाद का स्फुरण होता है?

Correct Answer: (b) वीणा
Solution:

हठ प्रदीपिका के अनुसार, नादानुसंधान की, निष्पत्ति अवस्था में वीणा के नाद का स्फुरण होता है। नाद अर्थात् शब्द, अनुसंधान कोई वस्तु जो पहले से विधमान है, उसे दोबारा खोजना । नाद अनुसंधान अर्थात् नाद का अनुसंधान करना या नाद के साथ संबंध जोड़ना, यह अनुसंधान तो  स्वयं के आन्तरिक जगत का है।

नाद योग का उद्देश्य है - आहद से | अनाहद की ओर ले जाना। ब्राह्माण्ड और शरीर दोनों में अनाहद ध्वनि गूंज रही है अर्थात् ब्राह्माण्ड में गूंज रहे अनाहद से जोड़ना ताकि अपने बाहरी मन को आन्तरिक मन की ओर ले जा सके, यही नादयोग का उद्देश्य है। ॐ की ध्वनि का अनुसंधान करना ही नाद योग या नादानुसंधान कहलाता है।

49. घेरण्ड संहिता के अनुसार, सप्तसाधन प्रक्रियाओं में कौन सम्मिलित नहीं है?

Correct Answer: (d) नियम
Solution:

घेरण्ड संहिता के अनुसार, सप्तसाधन प्रक्रियायों में नियम सम्मिलित नहीं हैं। महर्षि घेरण्ड कहते हैं, कि शोभनम् दृढ़ता चैव स्थैर्य धैर्य च लाघवम । प्रत्यक्षम च निर्लिप्तम च घटस्थ सप्तसाधनम् ।। अर्थात् शरीर की शुद्धि के सात साधन (1) शोधनम् (2) दृढ़ता (3) स्थैर्यम् (4) धैर्यम् (5) लाघवम् (6) प्रत्यक्षम् तथा (7) निर्लिप्नम् है।

50. स्वामी सत्यानंद सरस्वती के अनुसार, लघु-शंखप्रक्षालन के अभ्यास में तीसरे चरण में किस आसन का अभ्यास किया जाता है?

Correct Answer: (c) कटि चक्रासन
Solution:

स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार, लघु-रोज प्रक्षालन के अभ्यास में तीसरे चरण में कटिचक्रासन का अभ्यास किया जाता है। कटिचक्रासन दो शब्दों कटि + चक्रासन से मिलकर बना है। कटि का अर्थ होता है- कमर और चक्र का अर्थ होता है- पहिया।

अर्थात इस आसन में कमर को दांई और बांई ओर मरोड़ना अर्थात् घुमाना होता है। ऐसा करते समय कमर पहिए की तरह घूमती है, इसलिए इसका नाम कटिचक्रासन रखा गया। कटिचक्रासन मुख्यतः वजन कम करने के लिए, कमर पतली करने के लिए, छाती चौड़ा करने के लिए तथा पसलियों व कंधों को मजबूत करने के लिए किया जाता है।