यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2019 योग (YOGA)

Total Questions: 100

61. भावनात्मक अस्वस्थता का मुख्य कारण है :

(A) संशय
(B) प्रमाद
(C) व्याधि
(D) आलस्य

सही विकल्प चुनें :

Correct Answer: (c) (A) और (B)
Solution:

भावनात्मक अस्वस्थता का मुख्य कारण संशय और प्रमाद होता है। इसके अतिरिक्त स्त्यान, अविरति, भ्रांति दर्शन तथा अलब्ध भूमिकत्व भी इसका कारण है। कुपोषण अस्वस्थता की वह स्थिति है, जो शरीर में एक या अधिक पोषक तत्वों की कमी या अधिकता के कारण होता है। कुपोषित व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा भावनात्मक रूप से अस्वस्थ होता है।

62. घेरण्ड संहिता के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-से भोज्य पदार्थ किसी योगाभ्यासी के लिए अपथ्य हैं?

(A) मुद्ग
(B) चनक
(C) कुलत्थ
(D) मसूर

सही विकल्प चुनें :

Correct Answer: (b) (C) और (D)
Solution:

घेरण्ड संहिता के अनुसार, कुलत्थ तथा मसूर भोज्य पदार्थ किसी योगाभ्यासी के लिए अपथ्य है। गुणवत्ता के आधार पर भोजन को दो वर्गों में रखा गया है पथ्य और सुपथ्य । घेरण्ड संहिता के अनुसार कडुआ, अम्ल, लवण और तीखा में चार रस वाली वस्तुएं भुने हुए पदार्थ, दही, तक्र, शाक, उत्कट, मद्य, ताल और कटहल का त्याग करें।

प्याज, लहसुन आदि जड़दार सब्जियाँ व मसाले, नींबू आदि भी योगियों के वर्जित या अपथ्य हैं। जबकि घेरण्ड संहिता के अनुसार - एक योगाभ्यासी के लिए चावल, जौ की रोटी, गेंहू की रोटी, मूंग, उड़द व चने की दाल का भोजन उचित है। परवल, करेला, ककड़ी, केला, बैंगन, गूलर, चैलाई, बथुआ आदि को योगी शाक के रूप में प्रयुक्त करें। इस संहिता के अनुसार योगी के लिए भोजन में घी व दूध का प्रयोग भी उत्तम है।

63. गर्भावस्था के तृतीय त्रैमास के दौरान निम्नलिखित में से कौन-सा आसन वर्जित है?

(A) मार्जारी आसन
(B) भद्रासन
(C) पश्चिमोत्तासन
(D) पवनमुक्तासन

 

Correct Answer: (d) (C) और (D)
Solution:

गर्भावस्था के तृतीय त्रैमास के दौरान पश्चिमोत्तासन तथा पवनमुक्तासन वर्जित होता है। गर्भावस्था की प्रथम त्रैमास के दौरान ताड़ासन, मार्जरासन, उत्तानासन, शवासन करना चाहिए। द्वितीय त्रैमास के दौरान वीरभद्रासन, मेरु आकर्षण आसन, उत्थानासन, व्रजासन करना चाहिए। जबकि तृतीय त्रैमास के दौरान प्राणायाम, उत्कटासन, त्रिकोणासन, उपनिष्ठ । कोणासन करना चाहिए।

64. निम्नलिखित में से कौन विशुद्धि चक्र संबंधित नहीं है?

(A) 12 दल
(B) हृदय प्रदेश
(C) 16 दल
(D) कंठ प्रदेश

सही विकल्प चुनें :

Correct Answer: (b) (A) और (B)
Solution:

कंठ में जहाँ विशुद्धि चक्र होता है, वहाँ सरस्वती का स्थान होता है, जो सोलह पंखुरियों वाला है। इस चक्र का मत्र 'ह' है। कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जागृत होने लगता है। इसके जागृत होने पर सोलह कलाओं और सोलह विभूतियों का ज्ञान हो जाता है।

इसके जागृत होने पर जहाँ भूख और प्यास को रोका जा सकता है, वहीं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है। नोट - सात चक्र इस प्रकार हैं - मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धि चक्र, आज्ञाचक्र, सहस्त्रार चक्र ।

65. कफ प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए कौन-से रस प्रचुरता वाले भोज्य पदार्थ लाभकारी हैं?

(A) लवण
(B) अम्ल
(C) कटु
(D) तिक्त

सही विकल्प चुनें :

Correct Answer: (d) (C) और (D)
Solution:

कफ प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए कटु और तिक्त रस प्रचुरता वाले भोज्य पदार्थ लाभकारी होते हैं। कटु रस युक्त खाद्य पदार्थों में हींग, मीर्चा, पंचकोल (पिप्पली, पिप्पलीमूल, चण्य, चित्रक और शुण्ठी) तथा सभी प्रकार के पित्त, मूत्र और भिलावा आदि शामिल है। जबकि पटोल, जयन्ती, सुगन्धबाला, खस, चन्दन, चिरायता, नीम, करेला, गिलोय, धमासा, महापंचमूलक, छोटी और बड़ी कुटेरी, इंद्रायण, अतीस और वच ये सब तिक्त रस प्रचुरता वाले भोज्य पदार्थ हैं।

66. हठ प्रदीपिका के अनुसार, हठयोगसिद्धि के छः कारणों में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?

(A) तत्व ज्ञान
(B) श्रद्धा
(C) निश्चय
(D) स्मृति

सही विकल्प का चयन करें :

Correct Answer: (b) (B) और (D)
Solution:

हठ प्रदीपिका के अनुसार, हठयोग सिद्धि के छः कारणों में श्रद्धा और स्मृति शामिल नहीं है, जबकि तत्व ज्ञान और निश्चय हठयोगसिद्धि के छः कारणों में शामिल है।

67. निम्नलिखित में से कौन से घुमावदार आसन है?

(A) ताड़ासन
(B) अर्धमत्स्येन्द्रासन
(C) कटिचक्रासन
(D) पवनमुक्तासन

सही विकल्प चुनिए:

Correct Answer: (b) (B) और (C)
Solution:

सामान्यतः घुमावदार आसन का तात्पर्यं ऐसे आसन से है, जिससे शरीर का अंग घूमता है। इसके अन्तर्गत अर्धमत्स्येन्द्रासन तथा कटिचक्रासन को शामिल किया जाता है। कटिचक्रासन का अर्थ है कि इस आसन में कमर को दाई और बाईं ओर मरोड़ना अर्थात घुमाना होता है। ऐसा करते समय कमर पहिए की तरह घूमती है, इसलिए इसका नाम कटिचत्रासन रखा गया।

68. घरेण्ड संहिता के अनुसार, किन ऋतुओं में हठयोगाभ्यास आरंभ नहीं करना चाहिए?

(A) बसंत
(B) ग्रीष्म
(C) वर्षा
(D) शरद

सही विकल्प का चयन करें :

Correct Answer: (d) (B) और (C)
Solution:

घेरंड संहिता के अनुसार, ग्रीष्म व वर्षा ऋतु में हठयोगाभ्यास आरम्भ नहीं करना चाहिए। घेरण्ड संहिता 5/8 -15 में योगाभ्यास और योगारम्भ के लिए उत्तम ऋतु चर्या का वर्णन मिलता है- हेमन्ते शिशिरे ग्रीष्मे वर्षायाँ च ऋतौ तथा। योगारम्भं न कुर्वीत कृते योगों हि रोगदः ।। 5/8 ।। वसन्ते शरदि प्रोक्तं योगारम्भं समाचरेत । तदा योगी भवेत्सिद्धो रोगान्मुक्तो भवेध्रुवम ।। 5/911

अर्थात् - हेमन्त, शिशिर, ग्रीष्म और वर्षा ऋतु में योगाभ्यास शुरू नहीं करना चाहिए, इनमें शुरू करने से यह अभ्यास रोग प्रयाक हो जाता है। वासंत और शरद ऋतु में अभ्यास करना उचित है इसमें शुरू करने से सिद्धि तो मिलती ही है और रोगों से निवृत्ति होती है। यह सत्य है।

69. एक योग शिक्षक की क्या विशेषताएँ हैं?

(A) सात्त्विक व्यक्तित्व
(B) योगाभ्यासों के लिए एक स्वस्थ शरीर
(C) शिक्षण में संवाद-कुशलता
(D) योगाभ्यास का स्वानुभव, अच्छी तैयारी और अनुदेशात्मक क्षमता

सही विकल्प चुनें :

Correct Answer: (c) (A) और (D)
Solution:

योग के बढ़ते महत्व को देखते हुए योग शिक्षकों की आवश्यकता बढ़ने लगी है। सामान्यतः वर्तमान समय में अधिकांश लोगों द्वारा योग एक कुशल एवं योग्य शिक्षक की देखरेख में किया जा रहा है। एक कुशल एवं योग्य योग शिक्षक में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं -

I. सात्विक व्यक्तित्व ।
II. योगाभ्यास का स्वानुभव, अच्छी तैयारी और अनुदेशनात्मक क्षमता।
III. स्वयं पर आत्मविश्वास एवं दृढ़ एकाग्रचित होना
IV. व्यवसनों से निवृत्त

70. सूची-I का सूची-II से मिलान करें :

सूची-I सूची-II
(A) स्वामी विवेकानंद(I) ऋषिकेश
(B) स्वामी शिवानंद सरस्वती(II) कोलकत्ता
(C) श्री टी. कृष्णमाचार्य(III) हरिद्वार
(D) पं. श्रीराम शर्मा आचार्य(IV) मैसूर
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIVIII
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (a)
Solution: सूची-I में दिए गए महापुरुषों तथा सूची-II में उनके सम्बन्धित स्थानों का सही सुमेल इस प्रकार है -
सूची-I सूची-II
(A) स्वामी विवेकानंद(II) कोलकत्ता
(B) स्वामी शिवानंद सरस्वती(I) ऋषिकेश
(C) श्री टी. कृष्णमाचार्य(IV) मैसूर
(D) पं. श्रीराम शर्मा आचार्य(III) हरिद्वार