Solution:• महर्षि पतञ्जलि ने द्रष्टा का स्वरुप 'साधनापाद' में वर्णित किया है।
• साधनापाद का अर्थ है- शारीरिक कौशल (शक्ति, बौद्धिक कौशल (युक्ति), और दैवी शक्ति के सामने पूरी तरह से समर्पण (भक्ति) है।
• योगदर्शन के चार पाद (अध्याय) हैं -
(1) समाधिपाद
(2) साधनापाद
(3) विभूतिपाद
(4) कैवल्य पाद