यूजीसी NTA नेट/ जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 योग (YOGA)

Total Questions: 100

11. श्वेताश्वतर उपनिषद् के अनुसार इनमें से किसके द्वारा परमकारण स्वरूप परमात्मा ज्ञेय है?

Correct Answer: (b) सांख्ययोग
Solution:

श्वेताश्वतर उपनिषद के अनुसार 'सांख्ययोग' द्वारा परम कारण स्वरूप परमात्मा ज्ञेय है। श्वेताश्वतर उपनिषद में ईश्वर की उपासना को माया की निवृत्ति के लिए अपेक्षित माना गया है। "हम ईश्वर की उपासना के द्वारा माया से निवृत्ति पा सकते हैं।

12. नादबिन्दु उपनिषद के अनुसार ऊँकार की किस मात्रा में प्राण त्याग का फल ब्रह्मलोक की प्राप्ति है?

Correct Answer: (d) बारहवीं
Solution:

नादबिन्दु उपनिषद के अनुसार ॐकार की 'बारहवीं' मात्रा में प्राण त्याग का फल ब्रह्मलोक की प्राप्ति है।बारहवीं मात्रा 'ब्राह्मी' के नाम से जानी जाती है।

13. नादबिन्दु उपनिषद के अनुसार ऊँकार की बारहवीं मात्रा ....... के नाम से जानी जाती है।

Correct Answer: (c) ब्राह्मी
Solution:

• नादबिन्दु उपनिषद के अनुसार ऊँकार की बारहवीं मात्रा 'ब्राह्मी' के नाम से जानी जाती है।
• नादबिन्दु उपनिषद ऋग्वेदी शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है।
• इस उपनिषद के प्रारम्भ में 'ॐकार' को हंस के रूप में अभिव्यक्त किया है और उसके विभिन्न अंगो का विश्लेषण किया गया है उसके बाद 'ॐ' की बारह मात्राओं का उल्लेख करते हुये उनके साथ प्राण के सम्बन्ध का फल स्थापित किया है।

14. कठोपनिषद् के अनुसार अन्तरात्मा अंगुष्ठ परिणाम से कहाँ स्थित रहता है?

Correct Answer: (c) हृदय में
Solution:

कठोपनिषद के अनुसार अन्तरात्मा अर्गुष्ठ परिमाण से 'हृदय' में स्थित रहता है। कठोपनिषद में आत्मा की व्याख्या के लिए सुन्दर रुपक का प्रयोग हुआ है।

15. प्रश्नोपनिषद् के ऋषि कौन हैं?

Correct Answer: (d) पिप्लाद
Solution:प्रश्नोपनिषद के ऋषि 'पिपलाद' हैं जो कदाचित् पीपल के गोदे खाकर जीते थे।

16. योग वाशिष्ठ में शरीर की तुलना किससे की गई है?

Correct Answer: (c) वृक्ष
Solution:

योगवशिष्ठ में शरीर की तुलना 'वृक्ष' से की गई है। योगवशिष्ठ महारामायण संस्कृत साहित्य में अद्वैत वेदान्त का अतिमहत्वपूर्ण ग्रंथ है।

17. महर्षि पतञ्जलि के अनुसार किसके ज्ञान से प्रकृति के गुणों मे तृष्णा का सर्वथा अभाव होता है?

Correct Answer: (a) पुरुष
Solution:

• महर्षि पतञ्जलि के अनुसार 'पुरुष' ज्ञान से प्रकृति के गुणो में तृष्णा का सर्वथा अभाव होता है।
• पंतञ्जली के अनुसार योग की परिभाषा है- 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'

18. महर्षि पतञ्जलि ने द्रष्टा का स्वरूप किस पाद में वर्णित किया है?

Correct Answer: (b) साधनपाद
Solution:

• महर्षि पतञ्जलि ने द्रष्टा का स्वरुप 'साधनापाद' में वर्णित किया है।
• साधनापाद का अर्थ है- शारीरिक कौशल (शक्ति, बौद्धिक कौशल (युक्ति), और दैवी शक्ति के सामने पूरी तरह से समर्पण (भक्ति) है।
• योगदर्शन के चार पाद (अध्याय) हैं -

(1) समाधिपाद
(2) साधनापाद
(3) विभूतिपाद
(4) कैवल्य पाद

19. महर्षि पतञ्जलि के अनुसार शरीर के किस स्थान पर संयम करने पर भूख एवं प्यास से निवृत्ति हो जाती है?

Correct Answer: (b) कण्ठकूप
Solution:

• महर्षि पतञ्जलि के अनुसार शरीर के 'कण्ठकूप पर सयंम करने पर भूख एवं प्यास से निवृत्ति हो जाती है। “कण्ठकूपे क्षुत्पिपासा निवृत्तिः”
• नाभिचक्र: नाभि, जो मणिपुर चक्र का स्थान है, उस पर ध्यान स्थिर कर योगी शरीर के गठन का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लेता है।
• कर्मनाडी - इस पर ध्यान स्थिर कर योगी शरीर की गतिविधियों और बुद्धि पर अपनी इच्छानुसार पूर्णरूप से विजय प्राप्त कर लेता है।

20. योगसूत्र के अनुसार एक समान प्रतीत होने वाली वस्तुओं में जो उनके सभी भेदों को जो प्रत्यक्ष करा दे, उसे क्या कहते हैं?

Correct Answer: (b) विवेकजज्ञान
Solution:

योगसूत्र के अनुसार एक समान प्रतीत होने वाली वस्तुओं में जो उनके सभी भेद को प्रत्यक्ष करा दें, उसे विवेकज्ञान कहते हैं। योगसूत्रों की रचना महर्षि पतञ्जलि द्वारा की गई है।