Solution:घेरण्ड संहिता के अनुसार 'शाम्भवीजायते ध्रुवम', त्राटक का लाभ है।
• त्राटक - शब्द का अर्थ होता है किसी एक विशेष वस्तु पर अपनी नजरो से लगातार देखते रहना। यह हठयोग के सात अंगो में से एक अंग षटकर्म की एक क्रिया है। यह ध्यान की एक विधि है।
• त्राटक क्रिया के अभ्यास से योगी को निश्चित रुप से 'शाम्भवी मुद्रा' की प्राप्ति होती है। त्राटक से सभी नेत्र रोग समाप्त होते हैं। और एकाग्रता बढ़ती है।