Solution:जीवाजीवाख्ये द्वे तत्त्वे 'जैनदर्शने' मन्यते । अर्थात् जैन दर्शन एक नास्तिक दर्शन है। जैन दर्शन के प्राचीन आचार्य उमास्वाति हैं, इन्होंने जैन दर्शन में सात तत्त्वों को स्वीकार किया है-
(1) जीव, (2) अजीव, (3) आस्त्रव, (4) बन्ध, (5) संवर (6) निर्जरा और (7) मोक्ष।
सांख्यदर्शन - 25 तत्त्व मानता है।
बौद्धदर्शन - 1 तत्त्व
वेदान्तदर्शन - जीव और ब्रह्म कि एकता को मानता है।
अतः वेदान्त 1 पदार्थ (तत्त्व) मानता है।