यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2019 (संस्कृत)

Total Questions: 100

91. विश्वनाथकविराजेन प्रतिपादितं काव्यस्वरूपं किम्?

Correct Answer: (b) वाक्यं रसात्मकं काव्यम्
Solution:

विश्वनाथकविराजेन प्रतिपादितं काव्यस्वरूपं वाक्यं रसात्मकं काव्यम्। आचार्य विश्वनाथ ने काव्यस्वरूप का लक्षण इस प्रकार दिया है-
'वाक्यं रसात्मकं काव्यम् अर्थात् रसात्मक वाक्य ही काव्य कहलाता है।

92. यशोधर्मणः मन्दसौर स्तम्भलेखस्य लिपिरस्ति

Correct Answer: (b) ब्राह्मी
Solution:

यशोधर्मणः मन्दसौर स्तम्भलेखस्य ब्राह्मी लिपिरस्ति। अर्थात् यशोधर्मन् के मन्दसौर स्तम्भलेख की लिपि ब्राह्मी है।

93. अधस्तनेषु 'ध्वन्यते इति ध्वनिः' इत्यनेनं कोऽभिप्रायः ?

Correct Answer: (c) व्यङ्गयार्थः
Solution:

'ध्वन्यते इति ध्वनिः' इत्यनेनं व्यङ्गयार्थः अभिप्रायः। अर्थात् जिसके द्वारा ध्वनित किया जाये वह ध्वनि है। इसमें वस्तु, अलङ्कार, रस ये तीनों व्यङ्गय अर्थ में आ जाते हैं।

94. अधोलिखितेषु वैदिकभाषादृशा साधुप्रयोगो मन्यते

Correct Answer: (d) उक्ताः सर्वेऽपि साधवः
Solution:

वैदिकभाषादृशा साधुप्रयोगो 'देवेभिः', विश्वा, एनसि, एताः सर्वेऽपि साधवः मन्यते। अर्थात् वैदिक भाषा की दृष्टि से देवेभिः, विश्वा, एनसि ये सभी साधु प्रयोग मिलते हैं।

95. चार्वाकदर्शनस्य कृते किम् अपरनाम प्रचलितमस्ति?

Correct Answer: (d) लोकायतदर्शनम्
Solution:

चार्वाकदर्शनस्य कृते अपरनाम लोकायतदर्शनं प्रचलितमस्ति। अर्थात् चार्वाक दर्शन के लिए अपरनाम लोकायतदर्शन प्रचलित है।

96. अधोऽङ्कितेषु योगदर्शनानुसारेण समुचितः क्रमोऽस्ति-

Correct Answer: (c) अहिंसा सत्य अस्तेय ब्रह्मचर्य अपरिग्रहाः
Solution:

योगदर्शनानुसारेण समुचितः क्रमः अहिंसा सत्य अस्तेयब्रह्मचर्य अपरिग्रहाः अस्ति। जैनदर्शन/बौद्धदर्शनानुसारेण क्रमः सत्य- अहिंसा अस्तेय ब्रह्मचर्य अपरिग्रहाः ।

97. बौद्धदर्शने पञ्चविधस्कन्धेषु परिगणितो नास्ति-

Correct Answer: (d) विशेषणम्
Solution:

बौद्धदर्शने पञ्चविधस्कन्धेषु विशेषणं परिगणितो नास्ति। अपितु विज्ञानम्, वेदना, संज्ञा इति बौद्धदर्शने पञ्चविध स्कन्धेषु परिगणितोऽस्ति। बौद्धदर्शन में पञ्चविध स्कन्धों में विशेषण क गणना नहीं है। अपितु विज्ञान, वेदना, संज्ञा ये बौद्धदर्शन के पञ्चविध स्कन्धों में परिगणित है।

98. अधस्तनानां महाभारतीयपर्वणां समुचितः क्रमोऽस्ति

Correct Answer: (b) स्त्रीपर्व, शान्तिपर्व, अनुशासनपर्व, आश्वमेधिकपर्व
Solution:

महाभारतीयपर्वणां समुचितः स्त्रीपर्व, शान्तिपर्व, अनुशासनपर्व, आश्वमेधिकपर्व क्रमोऽस्ति। महाभारत में पर्वों का क्रम इस प्रकार है- आदि, सभा, वन, विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक, स्त्री, शान्ति, अनुशासन, आश्वमेधिक आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण हैं।

99. यजुर्वेदस्य निम्नलिखितभाष्यकारेषु कोऽर्वाचीनतमः ?

Correct Answer: (a) स्वामिदयानन्दः
Solution:

यजुर्वेदस्य भाष्यकारेषु स्वामिदयानन्दः अर्वाचीनतमःअस्ति। अर्थात् यजुर्वेद के अर्वाचीन भाष्यकार 'स्वामी दयानन्द' हैं। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती आधुनिक युग में वेदों के पुनरुद्धारक माने जाते हैं।

इन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की संस्कृत और हिन्दी में व्याख्या की। ऋग्वेद की व्याख्या मण्डल 7 के सूक्त 80 तक ही कर सके। असामयिक निधन से ऋग्वेदभाष्य पूरा नहीं हो सका।

100. 'प्रदीपः सर्वविद्यानामुपायः सर्वकर्मणाम्' पंक्तिरिय कस्याः विद्यायाः सन्दर्भेऽस्ति

Correct Answer: (b) आन्वीक्षिक्याः
Solution:

'प्रदीपः सर्वविद्यानामुपायः सर्वकर्मणाम्' पंक्तिरियं आन्वीक्षिक्याः विद्यायाः सन्दर्भेऽस्ति।