यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2019 (संस्कृत)

Total Questions: 100

21. कौषीतकिब्राह्मणं केन वेदेन सम्बद्धमस्ति?

Correct Answer: (c) ऋग्वेदेन
Solution:

कौषीतकिब्राह्मणं ऋग्वेदेन सम्बद्धमस्ति। - अर्थात् कौषातकि ब्राह्मण का सम्बन्ध ऋग्वेद से है। शुक्लयजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रन्थ 'शतपथब्राह्मण है। जबकि तैत्तिरीय कृष्ण यजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रन्थ है। तथा सामवेद के ब्राह्मण ग्रन्थ पञ्चविंश, षड्विंश आर्षेय, दैवत, छान्दोग्य, संहिता,वंशः, जैमिनीय, सामविधान हैं।

22. 'मालामतिक्रान्तः - अतिमालः' इत्यत्र समासविधायकं वर्तते

Correct Answer: (a) अत्यादयः क्रान्त्याद्यर्थे द्वितीयया
Solution:

'मालामतिक्रान्तः अतिमालः' इत्यत्र समासविधायकं अत्यादयः क्रान्त्याद्यर्थे द्वितीयया वर्तते । अर्थात् अत्यादयः क्रान्ताद्यर्थे प्रकरण में द्वितीया तत्पुरुष समास होता है। अतः 'मालामतिक्रान्तः अतिमालः' में द्वितीया विभक्ति युक्त तत्पुरुष समास है।

23. 'नमो अरिहंताना। नमो सवसिधानं। ऐरेण महाराजेन.......| इति वाक्यं कस्मिन्त्रभिलेखे प्राप्यते?

Correct Answer: (d) हाथीगुम्फा-लेखे
Solution:

नमो अरिहंतानां नमो सवसिधानं। ऐरेण महाराजेन इति वाक्यं 'हाथीगुम्फा लेखे' प्राप्यते। अर्थात् उपर्युक्त वाक्य हाथीगुम्फा अभिलेख में प्राप्त होता है। हाथी गुम्फा अभिलेख खरोष्ठी लिपि में प्राप्त होता है।

24. पाणिनीयशिक्षायाम् अधमपाठकेषु को न परिगणितः ?

Correct Answer: (c) पदानि विच्छिद्य पाठकः
Solution:

पाणिनीयशिक्षायाम् अधमपाठकेषु पदानि विच्छिद्य पाठकः न परिगणितः।
गीती, शीघ्री, शिरः, कम्पी, यथा, लिखित पाठकः।
अनर्थज्ञो अल्प कण्ठश्च षडेते पाठकाधमः॥

25. 'यं ब्राह्मणमियं देवी वाग्वश्येवानुवर्ततेः' इति केन उद्घोषितम् ।

Correct Answer: (a) भवभूतिना
Solution:

'यं ब्राह्मणमियं देवी वाग्वश्येवानुवर्ततेः' इति भवभूतिना उद्घोषितम्।
"यं ब्राह्मणमियं देवी वाग्वश्येवानुवर्ततेः” यह करुण रस प्रधान 'उत्तररामचरितम्' के रचनाकार महाकवि भवभूति की उक्ति है।

26. 'श्लोकवार्तिकम्' कस्य दर्शनस्य ग्रन्थोऽस्ति?

Correct Answer: (a) मीमांसादर्शनस्य
Solution:

श्लोकवार्तिकम् मीमांसादर्शनस्य ग्रन्थोऽस्ति। अर्थात् श्लोकवार्तिक मीमांसादर्शन का ग्रन्थ है। जबकि सांख्यदर्शन एवं वेदान्तदर्शन आस्तिक दर्शन हैं।

27. याज्ञवल्क्यस्मृतौ व्यवहाराध्यायः कतमोऽस्ति

Correct Answer: (b) द्वितीयः
Solution:

याज्ञवल्क्यस्मृतौ व्यवहाराध्यायः 'द्वितीयः' अध्यायोऽस्ति। याज्ञवल्क्यस्मृति के द्वितीय अध्याय का नाम व्यवहाराध्याय है।

28. मनुस्मृत्यनुसारं कति पाकयज्ञाः

Correct Answer: (a) चत्वारः
Solution:

मनुस्मृत्यनुसारं 'चत्वारः' पाकयज्ञाः अस्ति। अर्थात् मनुस्मृति के अनुसार चार पाकयज्ञ हैं।
(1) पितृ कर्म, (2) हवन, (3) बलि, (4) वैश्वदेव

29. अधोलिखितेषु भर्तृहरिमतेन ध्वनेः भेदद्वयं चिनुत्

Correct Answer: (c) प्राकृतः, वैकृतः
Solution:

भर्तृहरिमतेन ध्वनेः भेदद्वयं प्राकृतः, वैकृतः इति । अर्थात् भर्तृहरि के मत में दो ध्वनियाँ हैं-
प्राकृत ध्वनि एवं वैकृत ध्वनि।

30. वानीरकुञ्जोड्डीनशकुनि कोलाहलं शृण्वन्त्याः।

गृहकर्मव्याताया वध्वाः सीदन्त्यङ्गानि।
काव्यप्रकाशानुसारम् उपयुक्तमुदाहरणं कस्य ?

Correct Answer: (b) असुन्दरगुणीभूतव्यंग्यस्य
Solution:

यह श्लोक आचार्य मम्मट के काव्यप्रकाशानुसारं पञ्चम अङ्क में वर्णित असुन्दर गुणी भूतव्यंग्य का उदाहरण है।
अगूढमपरस्याङ्ग वाच्यसिद्धयङ्गमस्फुटम्।
सन्दिग्धतुल्यप्राधान्ये काक्वाक्षिप्तमसुन्दरम्।।
व्यङ्गयमेवै गुणीभूतव्यङ्ग्यस्याष्टौ भिदाः स्मृताः
गुणीभूत व्यङ्गय के आठ भेद निम्न हैं- 1. अगूढ़ (व्यङ्गय) 2.अपर अङ्ग (भूत व्यङ्ग्य ) 3. वाच्यसिद्धि का अङ्ग (भूत व्यङ्ग्य) 4. अस्फुट (गूढ़ व्यङ्गय) 5. सन्दिग्धप्राधान्य 6. तुल्यप्राधान्य (व्यङ्ग्य) 7. काकुसे आक्षिप्त (व्यङ्गय) 8. असुन्दर (व्यङ्गय) इस प्रकार गुणीभूत व्यङ्ग्य के आठ भेद बतलाए गए हैं।