यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2019 (संस्कृत)

Total Questions: 100

31. अधोलिखितेषु अर्थविस्तारस्योदाहरणं नास्ति

Correct Answer: (d) श्राद्धः
Solution:

अधोलिखितेषु अर्थविस्तारस्योदाहरणं 'श्राद्धः' नास्ति। अर्थात् अर्थ विस्तार का उदाहरण श्राद्ध नहीं है। जबकि गवेषणा, तेलम्, प्रवीणः ये सभी अर्थ विस्तार के उदाहरण हैं।

32. सारनाथ बौद्धप्रतिमालेखस्य भाषाऽस्ति

Correct Answer: (b) प्राकृतम्
Solution:

सारनाथ बौद्धप्रतिमालेखस्य भाषा 'प्राकृतम् अस्ति । अर्थात् सारनाथ में स्थित बौद्ध प्रतिमालेख की भाषा प्राकृत है तथा लिपि ब्रह्मी है।

33. निम्नलिखितेषु केन ज्योतिषशास्त्रमाधृत्य ऋग्वेदस्य कालो निर्धारितः ?

Correct Answer: (c) बालगंगाधरतिलकमहोदयेन
Solution:

बालगंगाधरतिलकमहोदयेन ज्योतिषशास्त्रमानृत्य ऋग्वेदस्य कालो निर्धारितः । अर्थात् ज्योतिषशास्त्र को आधार मानकर बालगङ्गाधर तिलक ने ऋग्वेद का काल (समय) निर्धारित किया है।

34. 'भवाति' रूपमिदं कस्य लकारस्य विद्यते ?

Correct Answer: (c) लेट्लकारस्य
Solution:

'भवाति' रूपमिदं लेट्लकारस्य विद्यते।
भू (धातु) परस्मैपद

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पु.भवाति / भवात्भवातःभवान्
मध्यम पु.भवासि / भवाःभवाथःभवाथ
उत्तम पु.भवानिभवावभवाम

35. पाणिनीयशिक्षानुसारं कस्य प्राणिनः ध्वनिः एकमात्रिकवर्णतुल्यः भवति।

Correct Answer: (d) चाषस्य
Solution:

पाणिनीयशिक्षानुसारं चाषस्य प्राणिनः ध्वनिः एकमात्रिकवर्णतुल्यः भवति।
चाषस्तु वदते मात्रा द्विमात्रं चैव वायसः।
शिखी रौति त्रिमात्रं तु नकुलस्त्वर्धमात्रकम्॥

36. त्रिविक्रमभट्टप्रणीतं चम्पूकाव्यमस्ति

Correct Answer: (a) नलचम्पू
Solution:

त्रिविक्रमभट्टप्रणीतं चम्पूकाव्यं 'नलचम्पू' अस्ति । त्रिविक्रमभट्टप्रणीत चम्पूकाव्य नल चम्पू है। संस्कृत साहित्य में चम्पू काव्य का प्रथम निदर्शन इसी ग्रन्थ में हुआ। नलचम्पू दमयन्ती कथा के नाम से भी प्रसिद्ध है। नलचम्पू कथा का मूल स्रोत महाभारत का वनपर्व है।

37. निम्नलिखितेषु ऋग्वेदस्य प्राचीनतमो भाष्यकारः कोऽस्ति?

Correct Answer: (d) स्कन्दस्वामी
Solution:

ऋग्वेदस्य प्राचीनतमो भाष्यकारः 'स्कन्दस्वामी' अस्ति। अर्थात् - ऋग्वेद के प्राचीनतम् भाष्यकार स्कन्दस्वामी हैं, जबकि वेङ्कटमाधव, सायण, उव्वट,ये सभी स्कन्दस्वामी के बाद के भाष्यकार हैं।

38. 'प्र + एजते = प्रेजते' इत्यत्र एकारो भवति

Correct Answer: (c) 'एडि पररूपम् सूत्रेण पररूपत्वात्
Solution:

'प्र + एजते = प्रेजते' इत्यत्र एकारो 'एङि पररूपम्' सूत्रेण पररूपत्वात् भवति । अवर्णान्त उपसर्ग से एङ (जिसके अंत मे ए और ओ हो) धातु पर (बाद में) होने पर, पर और पूर्व के स्थान पर पररूप एकादेश होता है। जैसे- प्र + एजते = प्रेजते,
उप + ऐहि = उपेहि।

39. शारिपुत्रप्रकरणमस्ति

Correct Answer: (c) अश्वघोषप्रणीतम्
Solution:

अश्वघोषप्रणीतम् शारिपुत्रप्रकरणमस्ति।
अर्थात्- शारिपुत्रप्रकरण अश्वघोष की कृति है। यह अधूरा होने पर भी महनीय रूपक का रम्य प्रतिनिधि है। अश्वघोष की केवल चार प्रामाणिक कृतियाँ हैं-
(1) बुद्धचरितम् (2) सौन्दरानन्दकाव्यम् (3) गान्डीवस्तोत्रगाथा (4) शारिपुत्रप्रकरणम्।

40. महाभारतोपजीविकाव्यं नास्ति

Correct Answer: (a) बृहत्कथामंजरी
Solution:

महाभारतोपजीविकाव्यं 'बृहत्कथामंजरी' नास्ति। शिशुपालवधम्, मध्यमव्यायोगः, भारतमंजरी, महाभारतोपजीविकाव्यं अस्ति।