यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2019 (संस्कृत)

Total Questions: 100

51. मनुस्मृतिः कति अध्यायेषु विभक्ताऽस्ति?

Correct Answer: (d) द्वादशाध्यायेषु
Solution:

मनुस्मृति द्वादशाध्यायेषु विभक्ताऽस्ति। मनुस्मृति बारह अध्यायों में विभक्त है। इनके अन्तर्गत 2694 श्लोक हैं तथा इसमें समाजशास्त्र, नीतिशास्त्र, धर्मशास्त्र और अर्थशास्त्र सभी का समावेश है, अतः सामाजिक व्यवस्था का यह आधारभूत ग्रन्थ है।

52. 'काण्वशतपथब्राह्मणम्' केन वेदेन सम्बद्धम् अस्ति?

Correct Answer: (c) यजुर्वेदेन
Solution:

'काण्वशतपथब्राह्मणम् यजुर्वेदेन सम्बद्धमस्ति। अर्थात् काण्व शतपथब्राह्मण का सम्बन्ध यजुर्वेद से है। शुक्लयजुर्वेद ब्राह्मण के अन्तर्गत काण्व शतपथब्राह्मण में 17 काण्ड, 104 अध्याय और 6806 कण्डिकाएँ उपलब्ध हैं तथा माध्यन्दिन शाखा के शतपथब्राह्मण में 14 काण्ड, 100 अध्याय और लगभग 7624 कण्डिकाएँ उपलब्ध हैं।

53. तर्कसंग्रहानुसारं पदार्थाः कति सन्ति ?

Correct Answer: (a) सप्त
Solution:

तर्कसंग्रहानुसारं पदार्थाः 'सप्त' सन्ति। तर्क संग्रह के अनुसार पदार्थ 'सात' माने गये हैं जबकि तर्कभाषा में पदार्थों की संख्या सोलह बतायी गयी है। तर्कसंग्रहकार ने सप्तपदार्थों का उल्लेख किया है-"द्रव्य गुण कर्म-सामान्य विशेष-समवायाभावः सप्नपदार्थाः ।"

54. 'उभिदा यजेत पशुकामः' इत्यत्र 'उद्भिद' शब्दों यागस्य नामधेयो भवति-

Correct Answer: (a) मत्त्वर्थलक्षणाभयात्
Solution:

उद्भिदा यजेत पशुकामः 'मत्त्वर्थलक्षणाभयात्' उद्भिदा यजेत पशुकामः इत्यत्र 'उद्भिद' शब्दो यागस्य मत्त्वर्थलक्षणाभयात् नामधेयो भवति । अर्थात् उद्भिदा यजेत पशुकामः' इस वाक्य में 'उद्भिद' शब्द का नाम धेयत्व मत्वर्थलक्षणा के भय से है।

क्योंकि इस वाक्य से न तो पशुरूप फल के लिये याग का विधान मानना संगत है न ही याग के प्रति गुण विधान क्योंकि एक ही वाक्य में फल और साधन मानने पर वाक्य भेद नामक दोषापत्ति होगी।

55. तर्कभाषानुसारम् इन्द्रियार्थसन्निकर्षः कस्य कारणम् ?

Correct Answer: (b) प्रत्यक्षस्य
Solution:

तर्कभाषानुसारम् इन्द्रियार्थसन्निकर्षः प्रत्यक्षस्य कारणम्। तर्कभाषा के अनुसार इन्द्रिय का वस्तु विशेष से सन्निकर्ष (सम्बन्ध) प्रत्यक्ष का कारण कहलाता है।

56. निम्नलिखितेषु कतमं ब्राह्मणं सामवेदीयं नास्ति?

Correct Answer: (b) शतपथब्राह्मणम्
Solution:

शतपथब्राह्मणं सामवेदीयं नास्ति। अर्थात् शतपथब्राह्मण सामवेद का नहीं है इसका यजुर्वेद से सम्बद्ध है। ताण्ड्यब्राह्मण, षड्-विंशब्राह्मण तथा छान्दोग्यब्राह्मण का सम्बन्ध सामवेद से हैं।

57. काव्यप्रकाशस्य कस्मिन्नुल्लासे व्यञ्जनायाः स्थापना अभवत्

Correct Answer: (c) पञ्चमोल्लासे
Solution:

काव्यप्रकाशस्य 'पञ्चमोल्लासे' व्यञ्जनायाः स्थापना अभवत्। काव्य प्रकाश के पञ्चम् उल्लास में व्यञ्जना की स्थापना हुई है। पञ्चम् उल्लास में काव्य के दूसरे भेद 'गुणीभूत व्यङ्गय' काव्य के आठ भेद दिये गये हैं।

पूर्ववर्ती आचार्यों के साथ उनकी परिभाषा की विवेचना करते हुए "व्यञ्जना शक्ति" विषयक अनेक आचार्यों की परिभाषा तथा उदाहरण का खण्डन मण्डन करते हुये अपने मत का प्रतिपादन किया है।
इस उल्लास का शीर्षक "ध्वनिगुणीभूत व्यंग्यसंकीर्णभेद निर्णय है।

58. अधस्तनयुग्मानां वाल्मीकिरामायणस्योपजीविग्रन्थेषु केन सह कस्य सम्बन्धः ? समुचितां तालिका चिनुत

तालिका - I (कृति)तालिका - II (काव्य विधा)
(a) रामायणमञ्जरी(i) विलोमकाव्यम्
(b) यादवराघवीयम्(ii) चित्रकाव्यम्
(c) अनर्घराघवम्(iii) महाकाव्यम्
(d) रामलीलामृतम्(iv) नाटकम्
Correct Answer: 1. (a)-(iii); (b)-(i); (c)-(iv); (d)-(ii)
Solution:
तालिका - I (कृति)तालिका - II (काव्य विधा)
रामायणमञ्जरीमहाकाव्यम्
यादवराघवीयम्विलोमकाव्यम्
अनर्घराघवम्नाटकम्
रामलीलामृतम्चित्रकाव्यम्

59. अधस्तनेषु वाल्मीकि रामायणस्य काण्डानां समुचितक्रमोऽस्ति

Correct Answer: (d) बाल-अयोध्या-अरण्य-किष्किन्धा-सुन्दर-युद्ध उत्तराणि
Solution:

वाल्मीकि रामायणस्य काण्डानां समुचितक्रमोऽस्ति- बाल-अयोध्या-अरण्य-किष्किन्धा-सुन्दर युद्ध उत्तराणि। अर्थात् महर्षि वाल्मीकि द्वारा विरचित आदिकाव्य लोकप्रसिद्ध महाकाव्य 'रामायण' है। इसमें लगभग 24000 श्लोक हैं। इसी कारण से यह “चतुर्विंशतिसाहस्त्रीसंहिता" कहलाती है।

60. 'अल्पक्लेश मरणं दारिद्रामनन्तक दुःखमिति केनोक्तम्?

Correct Answer: (c) शूद्रकेण
Solution:

"अल्पक्लेशं मरणं दारिद्रामनन्तकं दुःखमिति' शूद्रकेण उक्तम्। यह सूक्ति शूद्रक विरचित 'मृच्छकटिकम्' से उद्धृत है। मृच्छकटिक 10 अड्डों का एक 'प्रकरण' ग्रन्थ है जिसमें चारुदत्त धीरप्रशान्त कोटि का नायक है।