यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2019 (संस्कृत)

Total Questions: 100

61. अशोकस्य शाहबाजगढीलेखः कस्यां लिप्यां प्रप्यते

Correct Answer: (b) खरोष्ठी
Solution:

अशोकस्य शाहबाजगढीलेखः 'खरोष्ठी' लिप्यां प्राप्यते । अर्थात् अशोक का शाहबाजगढ़ी अभिलेख खरोष्ठी लिपि में प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त मानसेहरा का अभिलेख भी खरोष्ठी लिपि में प्राप्त होता है।

अशोक के अभिलेख ब्राह्मी, खरोष्ठी, आरमेइक तथा यूनानी लिपि में लिखे गये हैं।

62. ऋग्वेदे वरुणसूक्तस्य (1.25) ऋषिः कः ?

Correct Answer: (a) शुनः शेपः
Solution:

ऋग्वेदे वरुणसूक्तस्य (1-25) ऋषिः शुनः शेषः अस्ति। अर्थात् ऋग्वेद में वरुणसूक्त (1.25) के ऋषि 'शूनः शेपः' हैं। वरुण सूक्त ऋग्वेद के प्रथम मण्डल का 25वाँ सूक्त है। वरुण सूक्त में कुल 11 मन्त्र हैं। इस सूक्त के देवता वरुण हैं यह सूक्त गायत्री (24 अक्षर) छन्द में है। वरुण को भौतिक नियमों का नियन्ता भी कहा जाता है।

63. शब्द व्याकरणे स्वीकारे महाभाष्ये का शङ्का नोत्थापिता

Correct Answer: (d) षष्ठ्यर्थस्य अनुपपत्रतायाः
Solution:

शब्दे व्याकरणे स्वीकारे महाभाष्ये 'षष्ठ्यर्थस्य अनुपपत्रतायाः' शङ्का नोत्थापिता ।

64. अधोलिखितेषु का वैदिकभाषायाः विशेषता नास्ति

Correct Answer: (d) क्त्वार्थे तवेङ्प्रत्ययस्य प्रयोग:
Solution:

'क्त्वार्थे तवेप्रत्ययस्य प्रयोगः' वैदिकभाषायाः विशेषता नास्ति। अर्थात् क्त्वा प्रत्यय के अर्थ में तवेत्यय का प्रयोग वैदिक भाषा में नहीं होता है।
Note- निम्नलिखित तीनों विशेषताएँ वैदिक भाषा में परिलक्षित होती है-
(a) सानुनासिकस्वराणां प्रयोगः अर्थात् सानुनासिक स्वरों का प्रयोग
(b) 'लेट' लकारस्य प्रयोगः अर्थात् लेट् लकार का प्रयोग
(c) तुमुन्नर्थे तवैप्रत्ययस्य प्रयोगः अर्थात् तुमुन् प्रत्यय के अर्थ में 'तवै' प्रत्यय का प्रयोग।

65. आकृतिमूलकवर्गीकरणे हिन्दीभाषा मन्यते

Correct Answer: (b) श्लिष्टबहिर्मुखी वियोगात्मिका
Solution:

आकृतिमूलकवर्गीकरणे हिन्दी भाषा 'श्लिष्टबहिर्मुखी वियोगात्मिका' मन्यते।

66. अधस्तनेषु पुराणस्य पञ्चलक्षणेषु नास्ति

Correct Answer: (c) संसर्गः
Solution:

संसर्गः पुराणस्य पञ्चलक्षणेषु नास्ति। अर्थात् संसर्ग पुराण पञ्चलक्षण में नहीं है।
Note: पुराण का लक्षण-
"सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च।
वंशानुचरितं चैव पुराणं पञ्चलक्षणम्।। 

67. वेदान्तदर्शनानुसारं जगतः प्रपञ्चः किं कथ्यते?

Correct Answer: (d) विवर्तः
Solution:

वेदान्तदर्शनानुसारं जगतः प्रपञ्चः 'विर्वतः' कथ्यते। अर्थात् वेदान्तदर्शन के अनुसार जगत का प्रपञ्च विवर्त कहलाता है। विवर्तवाद वह प्रक्रिया है जब कोई वस्तु अपने वास्तविक स्वरूप का परित्याग न करते हुए अपने सदृश किसी अन्य वस्तु के रूप में प्रतिभाषित होने लगती है

जैसे-रस्सी अपने यथार्थ रूप का परित्याग न करते हुए भी सर्प की मिथ्या प्रतीति करवाने लगती है यही विवर्तवाद है -"अतत्त्वतोऽन्यथाप्रथा विवर्तः इत्युदीरितः ।

68. 'कुर्वन्त्रेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः' अत्र जिजीविषेत् पदस्य कोऽर्थः ?

Correct Answer: (a) जीवितुमिच्छेत्
Solution:

कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः' अत्र जिजीविषेत् पदस्य 'जीवितुमिच्छेत्' अर्थः । यह मन्त्र ईशावास्योपनिषद् से लिया गया है।

उपनिषदों में सबसे प्राचीन व सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ईशावास्योपनिषद्, माध्यन्दिनि शाखा यजुर्वेद का चालीसवाँ अध्याय है। इसमें कुल 18 मन्त्र है। इन मन्त्रों में कर्मसन्यास से हटकर कर्मोपासना का बहुत ही मार्मिक विवेचन किया गया है।

69. 'सर्पिषो नाथनम्' इह षष्ठी विभक्तिर्भवति

Correct Answer: (a) कर्मणः शेषत्वेन विवक्षायाम्
Solution:

"सर्पिषो नाथनम् ” में कर्म के शेषत्व की विवक्षा में 'सर्पिषः' में षष्ठी हुआ अर्थात् - 'आशिषि नाथः' नाथ धातु के आशीष या आशा रखने के अर्थ में होने पर उसके कर्म में शेषत्व की विवक्षा में षष्ठी विभक्ति होती है।

70. पञ्चमहायज्ञेषु किं न गण्यते?

Correct Answer: (d) विष्णुयज्ञः
Solution:

पञ्चमहायज्ञेषु विष्णुयज्ञः न गण्यते। पञ्चमहायज्ञों में देवयज्ञ, पितृयज्ञ, ब्रह्मयज्ञ, भूतयज्ञ तथा नृयज्ञ इन पञ्च महायज्ञों की गणना की जाती है जबकि विष्णुयज्ञ की गणना पञ्चमहायज्ञों में नहीं की जाती है।