यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2019 (संस्कृत)

Total Questions: 100

71. 'यो जात एव प्रथमो मनस्वान् देवो देवान् क्रतुना पर्यभूषत्' मन्त्रांशोऽयं विद्यते?

Correct Answer: (d) इन्द्रसूक्तस्य
Solution:

यो जात एव प्रथमो मनस्वान् देवो देवान् क्रतुना पर्यभूषत् मन्त्रांशोऽयं 'इन्द्रसूक्तस्य' विद्यते। प्रस्तुत सूक्त कारिका ऋग्वेद के द्वितीय मण्डल के इन्द्रसूक्त से लिया गया है।

ऋग्वेद में इसकी स्तुति में 250 सूक्त सम्बोधित किये गये हैं। इन्द्र सूक्त के ऋषि मृत्समद तथा देवता इन्द्र हैं।

72. निम्नलिखितेषु को हेत्वाभासो नास्ति?

Correct Answer: (d) असत्प्रतिपक्षः
Solution:

असत्प्रतिपक्ष हेत्वाभासो नास्ति। अर्थात् असत्प्रतिपक्ष हेत्वाभास नहीं है। तर्कभाषा के अनुसार, हेत्वाभास पाँच बताये गये हैं।
जो इस प्रकार है- असिद्ध विरुद्ध, अनैकान्तिक, प्रकरणसम तथा कालात्ययापदिष्ट इत्यादि ।

73. 'एध् वृद्धौ' इत्यस्माद् धातोः 'ऐधिष्ट' इति रूप निष्पद्यते

Correct Answer: (b) लुङ्लकारे
Solution:

'एध् -वृद्ध' इत्यस्माद् धातोः 'ऐधिष्ट' इति रूपं लङ्लकारे निष्पद्यते।

'एध्' धातु लुङ् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषऐधिष्टऐधिषाताम्ऐधिषत
मध्यम पुरुषऐधिष्ठाःऐधिषाथाम्ऐधिध्वम्
उत्तम पुरुषऐधिषिऐधिष्वहिऐधिष्महि

74. मनुमते अनारोग्यमनायुष्यमस्वर्ग्यं चाऽस्ति?

Correct Answer: (b) अतिभोजनम्
Solution:

मनुमते अनारोग्यमनायुष्यमस्वर्ग्य अतिभोजनम् चाऽस्ति।

75. 'न हि रसाट्टते कश्चिदर्थः प्रवर्तते' इति केनोक्तम्?

Correct Answer: (b) भरतेन
Solution:

'न हि रसाट्टते कश्चिदर्थः प्रवर्तते' इति भरतेनोक्तम्।

76. कस्य वचः नारिकेलफलसम्मितं कल्पितम् ?

Correct Answer: (b) भारवेः
Solution:

भारवेः वचः नारिकेलफलसम्मितं कल्पितम् । मल्लिनाथ ने भारवि के काव्य सौन्दर्य व अर्थगौरव को 'नारिकेलफलसम्मत' कहा है-
"नारिकेलफलसम्मितं वचो, भारवेः सपदि तद् विभज्यते।
स्वादयन्तु रसगर्भनिर्भरं, सारमस्य रसिका यथेप्सितम्।।"

77. अधोलिखितेषु वेदान्तमते असमीचीनं कथनं चिनुत-

Correct Answer: (c) नित्यानि कर्माणि अनिष्टसाधनानि
Solution:

वेदान्तमते नित्यानि कर्माणि अनिष्टसाधनानि असमीचीनं कथनम्। अर्थात् इसका सही कथन है- “नित्यानि कर्माणि सन्ध्यावन्दनादि।”अर्थात् जिन कर्मों के करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति नहीं होती, किन्तु न करने पर पाप की प्राप्ति होती है। 'नित्यकर्म कहलाते हैं। यथा सन्ध्यावंदन आदि

78. ऋक्प्रातिशाख्यानुसारं समानाक्षराणों का संख्या?

Correct Answer: (b) अष्टौ
Solution:

ऋक्प्रातिशाख्यानुसारं समानाक्षराणां अष्टी संख्या । "अष्टीसमानाक्षराण्यादितः” अर्थात् वर्णमाला के आदि से लेकर आठ-अक्षर पर्यन्त 'समानाक्षर' कहलाते हैं। अर्थात् अ, आ, ऋ, ऋ, इ,ई, उ तथा ऊ-ये आठ वर्ण समानाक्षर संज्ञक है।

79. निम्नलिखितेषु दर्शनेषु किं दर्शनं परमात्मनः सृष्टिकर्तृत्वं न मन्यते?

Correct Answer: (a) आहेतदर्शनम्
Solution:

आर्हतदर्शनं परमात्मनः सृष्टिकर्तृत्वं न मन्यते। तथा न्यायदर्शनम् वेदान्तदर्शनम् तथा योगदर्शनं परमात्मनः सृष्टिकर्तृत्वं मन्यते।

80. चक्षुषा घटरूपत्वग्रहणे कः सन्निकर्षः

Correct Answer: (c) संयुक्तसमवेतसमवायः
Solution:

चक्षुषा घटरूपत्वग्रहणे संयुक्तसमवेतसमवायः सन्निकर्षः। लौकिक तथा अलौकिक सन्निकर्ष में से लौकिक पक्ष में सन्निकर्ष को संयोगादि छः वर्गों में रखा गया है जो इस प्रकार है-
(1) संयोग, (2) संयुक्तसमवाय, (3) संयुक्तसमवेतसमवाय, (4) समवाय, (5) समवेतसमवाय, (6) विशेषण विशेष्यभाव।
चक्षु के द्वारा घट रूपत्व को ग्रहण करना-
संयुक्तसमवेतसमवाय सत्रिकर्ष कहलाता है।
उपर्युक्त विकल्प में (c) सही है।