Solution:'यत्समवायिकारणप्रत्यासन्नमवधृतसामर्थ्य तदसमवायिकारणम् यथा- तन्तुसंयोगः पटस्यासमवायिकारणम्। तन्तुसंयोगस्य गुणस्य पटसमवायिकारणेषु तन्तुषु गुणिषु समवेतत्वेन समवायिकारणे प्रत्यासन्नत्वात्। अनन्यथासिद्ध नियतपूर्वभावित्वेन पट प्रति कारणत्वाच्च।' इति सिद्धान्तानुसारेण 'तन्तुसंयोगः' पटस्य असमवायिकारणम् भवति।
अर्थात् जो समवायिकारण में प्रत्यासन्न (= निकटतः सम्बद्ध) होता है और जिसकी (कार्य के प्रति) सामर्थ्य निश्चित होती है (अर्थात् जिसमें कारण का लक्षण घटित होता है) वह असमवायिकारण है। जैसे - तन्तुसंयोग पट का असमवायिकारण है।
क्योंकि तन्तुसंयोग गुण है, वह पट के समवायिकारण तन्तु नामक गुणी में समवाय सम्बन्ध से रहता है। अतः (पट के) समवायिकारण में प्रत्यासन्न है। और वह अनन्यथासिद्ध पूर्वभावी होने से पट के प्रति कारण भी है।