Solution:"काव्यप्रकाशे विशेषवपुरपदार्थोऽपि वाक्यार्थः” अत्र तात्पर्यार्थः उच्यते अर्थात् काव्यप्रकाश में आये हुए विशेषवपुः (विलक्षण शरीर वाला) वाक्य में आये हुए पदों का अर्थ नहीं हैं, अपितु तात्पर्य वृत्ति से प्रकटित वाक्य का अर्थ है।
तात्पर्यार्थो विशेषवपुपदार्थोऽपि वाक्यार्थः समुल्लसतीत्यभिहितान्व यवादिनां मतम्। वाक्य में आया हुआ 'अभिहितान्वयवाद कुमारिल भट्ट के मतानुयायी मीमांसको का मत है। कुमारिल भट्ट के अनुसार, 'तात्पर्यार्थ' नामक चतुर्थ शक्ति भी होती है, जबकि 'अन्विताभिधानवादी' (गुरु प्रभाकर) इनके वाच्यार्थ में ही 'तात्पर्यार्थ' शक्ति को मानते हैं।