यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 (संस्कृत)

Total Questions: 100

1. पाश्चात्त्यविचारकस्य अरस्तूमहोदयस्य काव्यशास्त्रीयौ ग्रन्थौ स्तः ?

(A) पेरिइप्सुस (B) भाषणशास्त्रम् (C) सौन्दर्यशास्त्रम् (D) काव्यशास्त्रम्
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (c) (B) एवम् (D)
Solution:

पाश्चात्यविचारकस्य अरस्तू महोदयस्य काव्यशास्त्रीयौ ग्रन्थौ भाषणशास्त्रम्, काव्यशास्त्रम् स्तः।
अर्थात् - पाश्चात्यविचारक अरस्तू महोदय का काव्यशास्त्रीय ग्रन्थ भाषणशास्त्र और काव्यशास्त्र है।
अरस्तू को पाश्चात्य ज्ञान विज्ञान की विधाओं का आदि आचार्य माना गया है। उनकी कृतियों की संख्या लगभग 400 है। किन्तु उनकी प्रतिष्ठा के लिए दो ही ग्रन्थ उपलब्ध है

तेखनेस रितेरिकेस जो भाषणकला से सम्बन्धित है। इसका अनुवाद भाषणशास्त्र किया गया है। दूसरा पेरिपोइतिकेस जो काव्यशास्त्र से सम्बन्धित है। जिसका अनुवाद काव्यशास्त्र में किया गया है।

2. 'द्वित्राः' इत्यत्र कः समासः ?

Correct Answer: (c) बहुव्रीहिः
Solution:

'द्वित्राः' इत्यत्र 'बहुव्रीहिः' समासः । द्वित्रा इस पद में 'बहुव्रीहि' समास है। द्वित्रा पद का समास विग्रह है-
द्वौ वा त्रयो वा = द्वित्राः
सूत्र-प्रायेण अन्य पदार्थप्रधानः बहुव्रीहि समासः । प्रायः जिस समास में अन्य पद की प्रधानता होती है उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

3. कालक्रमानुसारमधोलिखित ग्रन्थानां समुचितं क्रमं चिनुत-

(A) शब्दकौस्तुभम्  (B) काशिकावृत्तिः (C) महाभाष्यम् (D) वैय्याकरणभूषणसारः (E) शब्देन्दुशेखरः
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (d) (C), (B), (A), (D), (E)
Solution:

कालक्रमानुसारमधोलिखित ग्रन्थानां समुचित क्रमं महाभाष्यम् → काशिकावृत्तिः→ शब्दकौस्तुभम्→ वैय्याकरणभूषणसारः → शब्देन्दुशेखरः सन्ति।

ग्रन्थग्रन्थकार
महाभाष्यपतञ्जलि
काशिकावृत्तिवामन और जयादित्य
शब्दकौस्तुभभट्टोजिदीक्षित
वैयाकरणभूषणसारकौण्डभट्ट
शब्देन्दुशेखरनागेश भट्ट

4. अधोनिर्दिष्टयुग्मानां समीचीनां तालिकां चिनुत-

सूची-Iसूची-II
(A) अग्नि- सूक्त:(i) आङ्गिरस - बृहस्पति:
(B) रूद्रसूक्त:(ii) मधुच्छन्दा - ऋषि:
(C) पर्जन्यसूक्त:(iii) गृत्समद - ऋषि:
(D) ज्ञानसूक्त:(iv) भौमोऽत्रि - ऋषि:

अत्र समुचितं विकल्पं चिनुतः

Correct Answer: (a) (A) - (ii), (B) - (iii), (C) - (iv), (D) - (i)
Solution:

समुचितं विकल्पं अस्ति

सूक्त (Sukta)ऋषि (Rishi)
अग्नि सूक्तमधुच्छन्दा
रुद्र सूक्त गृत्समद
पर्जन्य सूक्तभौमोऽत्रि
ज्ञान सूक्त आङ्गिरस बृहस्पति: 

5. अत्र कथनद्वयम् -

तत्र एकम् अभिकथनम (A), अपरञ्च तस्य कारणम् (R) इति।
अभिकथनम् (A): न्यायदर्शनरीत्या आत्मत्वसामान्यवान् आत्मा इति।
कारणम् (R) : बुद्धि सुख-दुःखः इच्छा द्वेष प्रयत्नगुणलिङ्गकत्वात्।
उपर्युक्त अभिकथन कारणञ्चाश्रित्य समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (a) (A) तथा (R) उभयं सत्यमस्ति (A) इत्यस्य (R) इति उचितं कारणम्
Solution:

अभिकथनं कारणञ्चाश्रित्य समुचितं विकल्पं स्तः-
(A) न्यायदर्शनरीत्या आत्मत्वसामान्यवान् आत्मा इति ।
(R) बुद्धि सुख-दुःख-इच्छा द्वेष प्रयत्नगुणलिङ्गकत्वात् उभयं सत्यमस्ति (A) इत्यस्य (R) इति उचितं कारणम्।

6. अधोऽङ्कितेषु कयोर्द्वयोः समुचितः सम्बन्धोऽस्ति?

(A) सम्यग्दर्शनज्ञानचरित्राणि मोक्षमार्गः
(B) धम्मपदम्
(C) त्रिरत्नानि
(D) योगदर्शनम्
अधोऽङ्कितेषु समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (b) (A) एवम् (C)
Solution:

सम्यग्दर्शनज्ञानचरित्राणि मोक्षमार्गः, त्रिरत्नानि एतद् द्वयो समुचितः सम्बन्धोऽस्ति। बौद्ध दर्शन के मार्ग हैं-
(1) सम्यक् दर्शन
(2) सम्यक् ज्ञान
(3) सम्यक् चरित्र
बौद्ध दर्शन के अनुसार, ये तीन रत्न कहे जाते हैं इसलिए इन दोनों का समुचित सम्बन्ध है।

7. मनुमते वेदप्रदानादाचार्यं परिचक्षते-

Correct Answer: (c) पितरम्
Solution:

मनुमते वेदप्रदानादाचार्यं 'पितरम्' परिचक्षते। अर्थात् मनु के मत में वेद का दान करने से आचार्य को पिता कहा है-
वेदप्रदानादाचार्यं पितरं परिचक्षते।
न ह्यस्मिन्युज्यते कर्म किञ्चदामौजिबन्धनात्।।
(मनुस्मृति द्वितीयाध्याय)

8. सम्पूर्णम् - इन्द्र सूक्तम् अधोलिखितेषु कतमेन छन्दसा ग्रथितमस्ति?

Correct Answer: (c) त्रिष्टुप् - छन्दसा
Solution:

सम्पूर्णम् इन्द्र सूक्तम् 'त्रिष्टुप् छन्दसा' ग्रथितमस्ति। अर्थात् सम्पूर्ण इन्द्र सूक्त में त्रिष्टुप् छन्द का प्रयोग किया गया है। इन्द्र सूक्त दूसरे (2) मण्डल का बरहवाँ (12) सूक्त है। जिसमें कुल 15 मंत्र है।
इन्द्र सूक्त के ऋषि मृत्समद, देवता इन्द्र तथा स्वर धैवत है।
महत्वपूर्ण मंत्र
1 - यो जात एव प्रथमो मनस्वान्, देवो देवान्क्रतुना पर्यभूषत्।
2 - यो अन्तरिक्षं विममे वरीयो यो द्यामस्तभ्नात्स जनास इन्द्रः।
3 - यो रभ्रस्य चोदिता यः कृशस्य यो ब्राह्मणो नाधमानस्य कीरेः।

9. अधोङ्कितेषु वाल्मीकिरामायणं कयोः काव्ययोः उपजीव्यम् ?

(A) नैषधीयचरितम् (B) सेतुबन्धः (C) भट्टिकाव्यम् (D) किरातार्जुनीयम्
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत-  

Correct Answer: (b) (B) एवम् (C)
Solution:

उपरिऽङ्कितेषु वाल्मीकिरामायणं सेतुबन्धः, भट्टिकाव्यम् काव्ययोः उपजीव्यम्। 'सेतुबन्ध और भट्टिकाव्य' वाल्मीकिरामायण का उपजीव्य काव्य है।
सेतुबन्ध नामक पुस्तक के रचयिता प्रवरसेन द्वितीय है।
भट्टिकाव्य को 'रावणवध' काव्य कहा जाता है इसके रचयिता भट्टि हैं।

10. भाषावैज्ञानिकैः भाषाः कतिधा वर्गीकृताः ?

Correct Answer: (c) द्विधा
Solution:

भाषावैज्ञानिकैः भाषाः 'द्विधा' वर्गीकृताः।