Solution:पाश्चात्यविचारकस्य अरस्तू महोदयस्य काव्यशास्त्रीयौ ग्रन्थौ भाषणशास्त्रम्, काव्यशास्त्रम् स्तः।
अर्थात् - पाश्चात्यविचारक अरस्तू महोदय का काव्यशास्त्रीय ग्रन्थ भाषणशास्त्र और काव्यशास्त्र है।
अरस्तू को पाश्चात्य ज्ञान विज्ञान की विधाओं का आदि आचार्य माना गया है। उनकी कृतियों की संख्या लगभग 400 है। किन्तु उनकी प्रतिष्ठा के लिए दो ही ग्रन्थ उपलब्ध है
तेखनेस रितेरिकेस जो भाषणकला से सम्बन्धित है। इसका अनुवाद भाषणशास्त्र किया गया है। दूसरा पेरिपोइतिकेस जो काव्यशास्त्र से सम्बन्धित है। जिसका अनुवाद काव्यशास्त्र में किया गया है।