यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 (संस्कृत)

Total Questions: 100

21. सर्वप्राचीनरचनायाः प्राथम्येन कालक्रमानुसारमुचितमुत्तरं चिनुत-

(A) हर्षचरितम् (B) नैषधीयचरितम् (C) रघुवंशम् (D) नलचम्पूः
अत्र समुचितं क्रमं चिनुत- 

Correct Answer: (b) (C), (A), (D), (B)
Solution:

सर्वप्राचीनरचनायाः प्राथम्येन कालक्रमानुसारमुचितमुत्तरं। रघुवंशम्→ हर्षचरितम्→ नलचम्पूः→ नैषधीयचरितम् 'रघुवंशम्' महाकाव्य कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य है इसमें उनीस सर्ग है,तथा रघु के कुल में उत्पन्न 31 राजाओं का वर्णन है। 'हर्षचरितम्' बाणभट्ट की रचना है,

यह 8 उच्छ्वास में विभक्त तथा हर्ष के राज्य के इतिहास के बारे में बताया गया है। 'नलचम्पू' त्रिविक्रमभट्ट की रचना है, यह 7 उच्छ्वास में विभक्त 'नल एवं दमयन्ती' की प्रणयकथा है। नैषधीयचरितम् 'श्रीहर्ष' द्वारा रचित ग्रन्थ है। यह वृहत्त्रयी के अन्तर्गत परिगणित है। यह 22 सर्गों में विभक्त है।

22. किं पुराणं महाभारतस्य परिशिष्टम् ?

Correct Answer: (d) हरिवंशपुराणम्
Solution:

'हरिवंशपुराणम्' महाभारतस्य परिशिष्टमस्ति "वायुपुराण" में शिव उपासना चर्चा होने के कारण इसको शिवपुराण का दूसरा अंग माना गया है।
"मत्स्यपुराण" में भगवान श्री हरि के मत्स्य अवतार की कथा मिलती है। 'हरिवंशपुराण' में वैवस्वत मनु एवं यम की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है तथा विष्णु के अवतारों के बारे में बताया गया है। पुराणों की संख्या 18 है- (1) ब्रह्मपुराण (2) पद्मपुराण (3) ब्राह्माण्डपुराण (4) विष्णुपुराण (5) वायुपुराण (6) भागवतपुराण (7) नारदपुराण (8) मार्कण्डेयपुराण (9) अग्निपुराण (10) भविष्यपुराण (11) ब्रह्मवैवर्तपुराण (12) लिङ्गपुराण (13) वराहपुराण (14) स्कन्दपुराण (15) वामनपुराण (16) कूर्मपुराण (17) मत्स्यपुराण (18) गरुडपुराण

23. महाभारतस्य टीकाकाराणां कया टिकया सह सम्बन्धः ?

लेखक रचना 
(A) विमलबोध:(i) ज्ञानदीपिका
(B) देवबोध:(ii) लक्षाभरणटीका
(C) नारायण:(iii) विषमश्लोकी
(D) वादिराज: (iv) निगूढार्थ-पदबोधिनी 

अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (a) (A)- (iii), (B) - (i), (C) - (iv), (D) - (ii)
Solution:

समुचितं विकल्पं अस्ति-

लेखक रचना
A. विमलबोध:विषमश्लोकी 
B. देवबोध:ज्ञानदीपिका 
C. नारायण: निगूढार्थ - पदबोधिनी 
D. वादिराज:लक्षाभरणटीका 

24. के वर्णाः स्वयंप्रकाशन्ते?

(A) मूलस्वराः (B) अन्तस्थाः (C) संयुक्तस्वराः (D) ऊष्मवर्णाः
अत्र समीचिनं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (c) (A) एवम् (C)
Solution:

मूलस्वराः एवं संयुक्तस्वराः स्वयंप्रकाशन्ते अर्थात् मूल स्वर अथवा संयुक्त स्वर स्वयं (अपने आप) प्रकाशित होते हैं। संस्कृत में मूल स्वरों की संख्या पाँच है- अ, इ, उ, ऋ, लृ तथा संयुक्त स्वरों की संख्या चार है ए, ओ, ऐ, औ। मूल स्वर तथा संयुक्त स्वर अच् प्रत्याहार के अन्तर्गत आते हैं।

25. न्यायसिद्धान्तमुक्तावलीदिशा व्याप्तेर्लक्षणमस्ति-

(A) साध्यवदन्यस्मिन्नसम्बन्ध उदाहृतः
(B) व्याप्यस्य पक्षवृत्तित्वधीः
(C) हेतुमन्निष्ठविरहाप्रतियोगिना साध्येन हेतोरैकाधिकरण्यम्
(D) सिषाधयिषाविरहविशिष्टसिद्धयभावः
अत्र समीचिनं विकल्पं चिनुत-  

Correct Answer: (a) (A) एवम् (C)
Solution:

न्यायसिद्धान्तमुक्तावलीदिशा व्याप्तेर्लक्षणमस्ति । साध्यवदन्यस्मिन्नसम्बन्ध उदाहृतः, हेतुमन्निष्ठाविरहाप्रतियोगिना साध्येन हेतोरैकाधिकरण्यम् ।

26. सांख्यकारिकानुसारं 'प्रत्ययसर्गः' इत्यस्य कोऽर्थः?

Correct Answer: (a) प्रत्ययो बुद्धिः तस्य सर्गः कार्यम्
Solution:

सांख्यकारिकानुसारं प्रत्ययसर्गः इत्यस्य “प्रत्ययो बुद्धिः तस्य सर्गः कार्यम् अर्थमस्ति। बुद्धि के चार प्रमुख परिणाम विपर्यय, अशक्ति, तुष्टि सिद्धि है इसे हि 'प्रत्ययसर्ग' या 'बुद्धिसर्ग कहते हैं। प्रत्यय सर्ग के कुल पचास भेद हैं।

5 विपयर्य + 28 अशक्ति + 9 तुष्टि + 8 सिद्धि = 50 प्रत्यय सर्ग ।

27. वेदभाष्यकारेषु को याज्ञिकी भाष्यकरौ स्तः ?

(A) स्वामी दयानन्दः सरस्वती (B) सायणः (C) उवटः (D) आत्मानन्दः
अधस्तनेषु समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (d) (B) एवम् (C)
Solution:

वेदभाष्यकारेषु 'सायणः एवम् उव्वटः' याज्ञिको भाष्यकारौ स्तः । अर्थात् वेद भाष्य कारों में सायण अथवा उवट याज्ञिक भाष्यकार हैं।
सायण ने ऋक, यजु, साम और अथर्ववेद पर भाष्य लिखा है। इन्होंने सबसे अन्त में अथर्ववेद पर 'अथर्वभाष्य' लिखा है। सायणाचार्य ने अपने ऋग्वेदभाष्य का नाम 'वेदार्थ प्रकाश रखा है। उव्वट यजुर्वेद भाष्यकार हैं-
आनन्दपुरवास्तव्यवज्रटाख्यस्य सूनुना।
उवटेन कृतं भाष्यं पदवाक्यैः सुनिश्चितैः ॥
ऋष्यादींश्च पुरस्कृत्य अवन्त्यामुव्वटो वसन् ।
मन्त्राणां कृतवान् भाष्यं महीं भोजे प्रशासति । 

28. काव्यप्रकाशानुसारं काव्यप्रयोजनं किमभीप्सितं भवति ?

(A) शक्तिः (B) यशः (C) व्यवहारः (D) निपुणता
अत्रः समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (b) (B) एवम् (C)
Solution:

काव्यप्रकाशानुसारं काव्यप्रयोजनं यशः एवम् व्यवहारः ईप्सितं भवति । काव्य प्रकाश के अनुसार काव्य के छः प्रयोजन हैं-
काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतरक्षतये ।
सद्यः परिनिर्वृत्तये कान्तः सम्मिततयोपदेशयुजे ॥
अर्थात् काव्य यश की प्राप्ति, सम्पत्ति लाभ, सामाजिक व्यवहार, रोग आदि का नाश, तुरन्त ही उच्चकोटि के आनन्द का अनुभव और स्त्री के समान मनभावन उपदेश देने के लिए उपादेय है।

29. सदूषणापि निर्दोषा सखरापि सुकोमला।

नमस्तस्मै कृता येन रम्या रामायणी कथा ।।
कस्माद् ग्रन्थादुद्धृतोऽयं श्लोकः?

Correct Answer: (d) नलचम्पोः
Solution:

सदूषणापि निर्दोषा सखरापि सुकोमला।
नमस्तस्मै कृता येन रम्या रामायणी कथा ।।
"नलचम्पोः” ग्रन्थादुद्धृतोऽयं श्लोकः अस्ति। 'रामायण' महर्षि वाल्मीकि की रचना है, जिसे चतुर्विंशतिः साहस्री संहिता कहा जाता है। इसमें सात काण्ड है। उत्तररामचरितम् भवभूति की रचना है इसमें 7 अंक है।

रघुवंशम् कालिदास कृत है, जिसमें उन्नीस सर्ग तथा रघु कुल के 31 राजाओं का वर्णन मिलता है। 'नलचम्पू' त्रिविक्रम भट्ट की रचना है जिसमें 7 उच्छवास हैं। तथा नल एवं दमयन्ती की प्रणय कथा का वर्णन है।

30. अधोलिखितानां कालक्रमानुसारं समुचितं क्रमं चिनुत-

(A) गोपथब्राह्मणम् (B) अथर्ववेदः (C) ऐतरेय - ब्राह्मणम् (D) ऋग्वेदः
अत्र समुचितं क्रमं चिनुत - 

Correct Answer: (d) (D), (B), (C), (А)
Solution:

कालक्रमानुसारमधोलिखितमं ग्रन्थानां समुचित क्रमम् → ऋग्वेदः → अथर्ववेदः → ऐतरेय ब्राह्मणम् → गोपथब्राह्मणम्।
गोपथब्राह्मण, अथर्ववेद का एक मात्र ब्राह्मण है। जबकि अथर्ववेद में आयुर्वेद एवं चिकित्सा पद्धति का वर्णन मिलता है।

ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद की एक शाखा है जिसका केवल 'ब्राह्मण' ही उपलब्ध है,
संहिता नहीं,ऋग्वेद चार वेदों में सबसे प्राचीन वेद है। इसमें 10 मण्डल एवं 1028 सूक्त और 10552 या 10580 1/4 मन्त्र है।