Solution:'उपाध्यायाद् अधीते' इत्यत्र अपादानसज्ञाविधायकः पाणिनेर्नियमः सूत्रम् आख्यातोपयोगे-
1. जनिकर्तुः प्रकृतिः - जन् धातु के कर्ता का आदि कारण अपादान होता है। जैसे-कामात्क्रोधोऽभिजायते काम से क्रोध पैदा होता है।
2. भुवः प्रभवः- उत्पन्न होने वाले का जो उत्पत्तिस्थान होता है, वह अपादान कहलाता है-जैसे हिमवतो गङ्गा प्रभवति- गंगा हिमालय से निकली है।
3.पराजेरसोढः- परा अर्थात् जि धातु के प्रयोग में जो असहाय होता है। उसकी अपादान संज्ञा होती है। जैसे अध्ययनात् पराजयते वह अध्ययन से भागता है।
4. आख्यातोपयोगे - जिस गुरु या अध्यापक या मनुष्य से कोई विषय नियमपूर्वक पढ़ी जाती है वह गुरु, अध्यापक या मनुष्य अपादान होता है।