यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 (संस्कृत)

Total Questions: 100

41. 'ऐधेताम्' इति प्रयोगे कानि धातु लकार-पुरुष वचनानि ?

Correct Answer: (a) 'एध्' धातुः लङ्कारः, प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
Solution:

'ऐधेताम्' इति प्रयोगे 'एध्' धातुः "लङ् लकारः", प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्।
एध् धातु "लङ् लकारः" का रूप निम्न प्रकार से बनेगा-

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पु०ऐधतऐधेताम् ऐधन्त 
मध्यम पु० ऐधथाः ऐधेथाम् ऐधध्वम्
उत्तम पु० ऐधे ऐधावहि ऐधामहि 

42. आलोकविशाला मे सहसा तिमिरप्रवेशविच्छिन्ना ।

उन्मीलितापि दृष्टिर्निमीलितेवान्धकारेण ॥
श्लोकेऽस्मिन् कः छन्दः कश्चलङ्कारः?
(A) रूपकम् (B) आर्या (C) वसन्ततिलका (D) उत्प्रेक्षा
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत

Correct Answer: (c) (B) एवम् (D)
Solution:

आलोकविशाला मे सहसा तिमिरप्रवेशविच्छिन्ना।
उन्मीलितापि दृष्टिर्निमीलितेवान्धकारेण ।।
श्लोकेऽस्मिन् आर्या छन्दः एवं उत्प्रेक्षा अलङ्कारः। आर्या मात्रिक छन्द है, इसका लक्षण निम्न है-
यास्याः पादे प्रथमे द्वादशमात्रास्तथा तृतीयेऽपि ।
अष्टादश द्वितीये चतुर्थके पञ्चदश साऽर्या।।

43. अधुना तैत्तिरीय नाम्ना प्रसिद्धौ कौ ग्रन्थौ स्तः ?

(A) ब्राह्मणम्  (B) व्याकरणम् (C) उपनिषत् (D) छन्दः
अधस्तनेषु समुचितं विकल्प चिनुत -

Correct Answer: (a) (A) एवम् (C)
Solution:

अधुना तैत्तिरीय नाम्ना ब्राह्मणम् एवम् उपनिषत् प्रसिद्धौ ग्रन्यौ स्तः । अर्थात् आधुनिक 'तैत्तिरीय' नाम से ब्राह्मण और उपनिषद प्रसिद्ध ग्रन्थ है। 'तैत्तिरीय' नाम यजुर्वेद के ब्राह्मसम्प्रदाय (कृष्ण यजुर्वेद) की चार शाखाओं में से एक है। 'तैत्तिरीय' नाम से कृष्ण यजुर्वेद शाखा में उपनिषद भी मिलता है।

44. वैशेषिकदर्शनानुसारमधोऽङ्कितेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) प्रत्यक्षानुमाने द्वे प्रमाणे
Solution:

वैशेषिकदर्शनानुसारं प्रत्यक्ष एवम् अनुमान द्वे प्रमाणे अस्ति। अर्थात् वैशेषिकदर्शन के अनुसार प्रत्यक्ष एवं अनुमान दो प्रमाण है। प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द चार प्रमाण को न्याय एवं मीमांसा दर्शन मानता है। प्रत्यक्ष, 'अनुमान', शब्द, ये तीन प्रमाण सांख्य एवं योग दर्शन मानते हैं।

45. अधोऽङ्कितेषु कोऽर्थापत्तिप्रमाणं स्वीकरोति ?

Correct Answer: (d) मीमांसादर्शनम्
Solution:

उपरिलिखितेषु दर्शनेषु 'मीमांसादर्शनम्' अर्थापत्तिप्रमाणं स्वीकरोति । उपरोक्त दर्शन में 'मीमांसादर्शनम्' अर्थापत्तिप्रमाण को स्वीकार करता है- चार्वाक दर्शन केवल प्रत्यक्ष को ही प्रमाण मानता है। जैनदर्शन प्रत्यक्ष और अनुमान को प्रमाण मानता हैं। योग दर्शन प्रत्यक्ष अनुमान एवं शब्द को प्रमाण मानता है।

46. अधोऽङ्कितेषु कयोर्द्वयोः समुचितः सम्बोन्धेऽस्ति

(A) षोडशपदार्थाः सन्ति (B) सप्तपदार्थाः सन्ति (C) न्यायदर्शनम् (D) जैमिनिः
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत

Correct Answer: (c) (A) एवम् (C)
Solution:

उपरिलिखितेषु कार्याईयोः समुचितः सम्बन्धोऽस्ति- षोडशपदार्थाः एवम् न्यायदर्शनम्
अर्थात् उपरोक्त
न्याय दर्शन (तर्कभाषा) सोलह पदार्थ मानता है-
(1) प्रमाण (2) प्रमेय (3) संशय (4) प्रयोजन (5) दृष्टान्त (6) सिद्धान्त (7) अवयव (8) तर्क (9) निर्णय (10) वाद (11) जल्प (12) वितण्डा (13) हेत्वाभास (14) छल (15) जाति (16) निग्रहस्थान, जबकि वैशेषिक दर्शन के अनुसार पदार्थों की संख्या सात है।

47. तर्कसङ्ग्रहानुसारं वाक्यार्थज्ञाने 'अग्निना सिञ्चेद्' इति वाक्यं कथं न प्रमाणम् ?

Correct Answer: (a) योग्यताविरहात्
Solution:

तर्कसङ्ग्रहानुसारं वाक्यार्थज्ञाने 'अग्निना सिञ्चेद' इति वाक्यं 'योग्यताविरहात्' न प्रमाणम्। तर्क संगह के अनुसार वाक्यार्थ के ज्ञान मे 'अग्निना सिञ्चेद्' यह वाक्य योग्यता से रहित होने के कारण प्रमाण नहीं है। वाक्यार्थज्ञान के हेतु तीन है-

48. अर्थस‌ङ्ग्रहदिशा विधिः कतिविधिः ?

Correct Answer: (c) चतुर्विधः
Solution:

अर्थसङ्ग्रहदिशा विधिः चतुर्विधः । अर्थसंग्रह के अनुसार विधि चार प्रकार की होती है- (1) उत्पत्ति विधि (2) विनियोग विधि (3) प्रयोग विधि (4) अधिकार विधि।

49. हर्षस्य कृती इमे स्तः-

(A) रत्नावली  (B) नैषधीयचरितम् (C) कर्पूरमञ्जरी (D) प्रियदर्शिका
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत

Correct Answer: (a) (A) एवम् (D)
Solution:

हर्षस्य कृती 'रत्नावली' एवम् 'प्रियदर्शिका' अस्ति। हर्ष की रचना रत्नावली एवं प्रियदर्शिका है। रत्नावली में 4 तथा प्रियदर्शिका में भी 4 अंक है। हर्ष की एक अन्य रचना 'नागानन्द' है, जिसमें 5 अंक है। 'नैषधीयचरितम्' श्री हर्ष की रचना है, जिसमें 22 सर्ग तथा नल एवं दमन्ती की प्रणयकथा है। 'कर्पूरमञ्जरी' राजशेखर कृत 4 अंक का सट्टक ग्रन्थ है।

50. कथनद्वयम् अधोलिखितम्- तत्र एकम् अभिकथनम् (A) अपरञ्च तस्य कारणम् (R) इति ।

अभिकथन (A) उत्पत्तिपरिपूताया किमस्याः पावनान्तरैः।
कारणम् (R) तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिमर्हतः ॥
उपर्युक्त अभिकथन कारणमाश्रित्य समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (b) (A) तथा (R) उभयं सत्यमस्ति यतः (A) इत्यस्य (R) समुचितं कारणमस्ति
Solution:

अभिकथन (A) उत्पत्तिपरिपूताया किमस्याः पावनान्तरैः ।
कारणम् (R) तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिमर्हतः ।।
(A) तथा (R) उभयं सत्यमस्ति यतः (A) इत्यस्य (R)समुचितं कारणमस्ति।