Solution:"कविक्रतुः” अधोलिखितेषु कस्य विशेषणं विद्यते। अग्नि सूक्त ऋषि-मधुच्छन्दा, निवास स्थान पृथ्वीस्थानीय, सूक्ति संख्या- ऋग्वेद
ऋग्वेदीय देवों में अग्नि का सबसे प्रमुख स्थान है। वैदिक मंत्रों के अनुसार अग्निदेव नेतृत्व शक्ति से सम्पन्न, यज्ञ की आहुतियों को ग्रहण करने वाले, तेज तथा प्रकाश के अधिष्ठाता हैं।
ऋग्वेद में अग्नि को घृतपृष्ठ, रक्तदत्त, गृहपति, द्रव्यवाहन, समिधान, दमूनस्, यविष्ट, मेद्य, 'कविक्रतुः' आदि नामों सम्बोधित किया गया है।
"अग्निहता कविक्रतु, सत्याश्चित्र श्रवस्तमः । देवो देवेभिरागमत् ।।"