यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 (संस्कृत)

Total Questions: 100

61. 'दोषावस्तः' इति पदस्य सायणानुसारम् अधोलिखितेषु कतम अर्थः विद्यते?

Correct Answer: (c) रात्रावहनी
Solution:

'दोषावस्तः' इति पदस्य सायणानुसारम् 'रात्रावहनी' अर्थः विद्यते । अर्थात् दोषवस्तः । इस पद का अर्थ सायण के अनुसार 'रात और दिन' होता है।

उपत्वाग्ने दिवेदिवे दोषावस्तर्धिया वयम् नमो भरन्त एमसि । इस मंत्र में आया हुआ
'दोषावस्तः' इस पद का अर्थ विच्छेद इस प्रकार है-दोषा शब्द रात्रि वाची, वस्तः शब्द दिन वाची का प्रतीक है। दोषावस्तः - भारतीय व्याख्याता इसे सम्बोधन पद मानते हैं।
स्कन्द स्वामी- रात्रौ स्वेन ज्योतिषा तप्तसामाच्छादयतिः ।
माधव - दोषाया आच्छादयितः । दोषा निषा भवति ।
सायण - ऋ.सं. 4.4.9 में इसे वैकल्पित रूप में सम्बोधन मानकर अर्थ करते हैं और ऋ.सं. 7.15.15. में केवल सम्बोधन मानते हैं।

62. अधोलिखितानां कालक्रमानुसारं समुचितं क्रमं चिनुत-

(A) उव्वट भाष्यम् (B) दयानन्द-भाष्यम् (C) स्कन्दस्वामी-भाष्यम् (D) सायण-भाष्यम्
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत

Correct Answer: (c) (C), (A), (D), (B)
Solution:

कालक्रम के अनुसार उचित क्रम है- स्कन्दस्वामी भाष्यम, उव्वट भाष्यम्, सायण-भाष्यम्, दयानन्द भाष्यम्

63. वेदानामपौरुषेयत्वमधोऽङ्कितेषु कुत्र वर्णितम् ?

Correct Answer: (b) मीमांसादर्शने
Solution:

मीमांसादर्शने हिन्दुओं के छः दर्शनों से एक है। इस शास्त्र को 'पूर्वमीमांसा' और वेदान्त को 'उत्तरमीमांसा' भी कहा जाता है। पूर्वमीमांसा में 'धर्म' का तथा उत्तर मीमांसा में 'ब्रह्म' का विचार है। मीमांसा दर्शन के अनुसार वेद अपौरुषेय, नित्य एवं सर्वोपरि है।

64. शांखायनारण्यकः अधोनिर्दिष्टेषु केन सह सम्बद्धोऽस्ति?

Correct Answer: (d) ऋग्वेदेन सह
Solution:

शांखायनरण्यकः ऋग्वेदेन सह सम्बद्धोऽस्ति। शांखायन आरण्यक का सम्बन्ध ऋग्वेद से है। यह ऐतरेय आरण्यक के समान है तथा पंद्रह अध्यायों में विभक्त है। यह 'कौषीतकि उपनिषद् के नाम से भी प्रसिद्ध है।

वेद आरण्यक 
ऋग्वेद ऐतरेय आरण्यक, शांखायन/कौषीतकि आरण्यक
सामवेद जैमिनीयोपनिषद् आरण्यक, छान्दोग्य आरण्यक
यजुर्वेद बृहदारण्यक आरण्यक, तैत्तिरीय आरण्यक, मैत्रायणी आरण्यक
अथर्ववेद कोई आरण्यक उपलब्ध नहीं है 

65. अश्वघोषकृतं रचनाद्वयं किमस्ति?

Correct Answer: (b) बुद्धचरितम्, सौन्दरानन्दम्
Solution:

अवघोषकृतं रचनाद्वयं अस्ति-बुद्धचरितम्, सौन्दरानन्दम्
बुद्धचरितम् - संस्कृत का महाकाव्यग्रन्थ है इसकी रचना द्वितीय शताब्दी में अश्वघोष द्वारा की गयी। इसमें गौतम बुद्ध का जीवन चरित वर्णित है। इसका आरम्भ बुद्ध के 'गर्भावान' से तथा परिणति "बुद्धत्व प्राप्ति” से होती है। यह 28 सर्गों में विभक्त है।

सौन्दरानन्द काव्यम् - यह भी अश्वघोषकृत संस्कृत ग्रन्थ है। ग्रन्थ बुद्ध के सौतेले भाई के बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के प्रसंग पर आधारित है।

बुद्धचरितम्- सौन्दरानन्दकाव्यम्, गंडीस्तोत्रगाथा तथा शारिपुत्रप्रकरण अश्वघोष की प्रमुख रचनाएं हैं।

66. 'सुडनपुंसकस्य' इति पाणिनिसूत्रेण का सञ्ज्ञा विधीयते?

Correct Answer: (d) सर्वनामस्थान सज्ञा
Solution:

'सुडनपुंसकस्य' इति पाणिनिसूत्रेण 'सर्वनामस्थान सज्ज्ञा' विधीयते। स्वादिपञ्चवचनानि सर्वनामस्थानसंज्ञानि स्युरक्लीबस्य ।
अर्थात् सु, औ, जस्, अम्, औट् इन पाँच की सुट् संज्ञा होती है।

67. वैशेषिकदर्शनानुसारं निम्नाङ्कितानां समुचितः क्रमोऽस्ति?

(A) अभावः (B) विशेषः (C) कर्म (D) सामान्यम् (E) समवायः
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत

Correct Answer: (b) (C), (D), (B), (E), (A)
Solution:

वैशेषिकदर्शनानुसारं समुचितः क्रमोऽस्ति-
कर्म सामान्यम् विशेषः समवायः अभावः।
अर्थात् वैशेषिक दर्शन के अनुसार समुचित क्रम है-
कर्म सामान्य विशेष समवाय अभाव
कर्म - उत्क्षेपणापक्षेपणाकुञ्चनप्रसारणगमनानि पञ्चकर्माणि ।
सामान्य - परमपरं च द्विविधं सामान्यम् ।
विशेष - नित्यद्रव्यवृत्तयो विशेषास्त्वनन्ता एव ।
समवाय - समवायस्त्वेक एव
अभाव - अभावश्चतुर्विधः प्राग्भावः, प्रध्वंसाभावः, अत्यन्ताभावः, अन्योन्याभावश्चेति ।

68. 'नैषधीयचरिते' कति सर्गाः सन्ति ?

Correct Answer: (d) द्वाविंशतिः
Solution:

'नैषधीयचरिते द्वाविंशतिः सर्गाः सन्ति। अर्थात् नैषधीयचरित में 22 सर्ग है।

ग्रन्थाःसर्गाः
रघुवंशम्एकोनविंशतिः
शिशुपालवधम्विंशतिः
धर्मशर्माभ्युदयएकविंशतिः
भट्टिकाव्य (रावणवधम्)द्वाविंशतिः

69. अधस्तनेषु मात्रिकापश्रुतेरुदाहरणे स्तः-

(A) पित्सति-पतति-पातयति (B) गेएन-गिंग-गेगांगेन (C) गतः-गमनम्- जगाम (D) कल्ल् कतिल - मकतूल
अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (b) (A) एवम् (C)
Solution:

पित्सति -पतित-पातयति, गतः-गमनम् -जगाम मात्रिकापश्रुतेरुदाहरणे स्तः ।

70. अधोऽङ्कितानां केन सह कस्य सम्बन्धः ?

(A) पुरुषः(i) विकृतिः
(B) वाक्(ii) प्रकृतिर्विकृतिः
(C) शब्दः(iii) प्रकृतिः
(D) मूलप्रकृतिः(iv) न प्रकृतिर्न विकृतिः

अत्र समुचितं विकल्पं चिनुत

Correct Answer: (c) (A)- (IV), (B)-(I), (C)-(II), (D)-(III)
Solution:

समुचितं सम्बन्धः अस्ति-
पुरुष न प्रकृतिः न विकृतिः
वाक् - विकृतिः
शब्दः - प्रकृतिर्विकृतिः
मूलप्रकृतिः - प्रकृतिः