यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून 2022 योग (YOGA)

Total Questions: 23

1. 'दुःख संयोगवियोगं योग संज्ञितम्' योग की यह परिभाषा भगवद्‌गीता के किस अध्याय के कौन से श्लोक में दी गयी है?

Correct Answer: (d) भगवद्गीता 6/23
Solution:

यह श्लोक अध्याय-6 'ध्यानयोग' पाठ के 23 नम्बर का श्लोक है। जिसका पूरा श्लोक इस प्रकार है-

तं विद्याद दुःखसंयोगवियोग योगसंज्ञितम्।
सनिश्चेन योक्वव्यो योगऽनिर्विण्णचेतसा ।।

अर्थ- दुख के साथ वियोग की स्थिति को योग के रूप में जाना जाता है। निराशावाद से मुक्त संकल्प के साथ इस योग का अभ्यास करना चाहिए।

2. वेद शब्द से अभिप्राय है

Correct Answer: (c) मंत्र संहिता
Solution:

'वेद' शब्द संस्कृत भाषा के विद् धातु से बना है जिसका अर्थ होता है जानना। अतः वेद का शाब्दिक अर्थ है- 'ज्ञान' । वेद का दूसरा नाम है 'श्रुति । श्रुति का अर्थ 'सुनना है वेदों का संकलनकर्ता द्वैपायन वेद व्यास को माना गया है।

वेद चार प्रकार के होते हैं-  (i) ऋग्वेद (ii) यजुर्वेद (iii) सामवेद (iv) अथर्ववेद

3. न्याय दर्शन का सुप्रसिद्ध एवं प्रमुख सिद्धान्त है :

Correct Answer: (a) असत् कार्यवाद
Solution:

असत् कार्यवाद, कारणवाद का न्यायदर्शनसम्मत सिद्धान्त जिसके अनुसार कार्य उत्पत्ति के पहले नहीं रहता। न्याय के अनुसार उपादान और निमित्त कारण अलग-अलग कार्य उत्पन्न करने की पूर्ण शक्ति नहीं है। किन्तु जब ये कारण मिलकर व्यापारशील होते हैं।

तब इसकी सम्मिलित शक्ति ऐसा कार्य उत्पन्न होता है जो इन कारणों से विलक्षण होता है। अतः कार्य सर्वथा नवीन होता है। उत्पत्ति के पहले इसका अस्तित्व नहीं होता। कारण केवल उत्पत्ति में सहायक होता है।

4. बौद्धों के त्रिरत्न हैं-

Correct Answer: (b) प्रज्ञा, शील, समाधि
Solution:

त्रिरत्न (तीन रत्न) बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं तीन रत्नों पर ही बौद्ध धर्म आधारित है त्रिरत्न बुद्ध, धम्म और संघ है। प्रज्ञा, शील, समाधि ये अष्टांगिक मार्ग के आधार हैं।

नोट: आयोग ने प्रज्ञा, शील और समाधि को सही उत्तर माना है।

5. योग वशिष्ठ के अनुसार मुक्ति के चार द्वारपालों में द्वितीय का नाम बताइएः

Correct Answer: (d) विचार
Solution:

योग वशिष्ठ के अनुसार मोक्ष के चार द्वारपाल (स्वतंत्रता के चार (4) स्तम्भ)-

1. शम (शान्ति)
2.विचार (विवेक)
3. सन्तोष (सन्तोष)
4. साधु संग (सत्संग)

6. योग वशिष्ठ के किस प्रकरण में शिव और शक्ति के यथार्थ स्वरूप का विवेचन किया गया है?

Correct Answer: (b) निर्वाण-प्रकरण-उत्तरार्ध
Solution:

योग वशिष्ठ के निर्वाण प्रकरण उत्तरार्ध में 216 सर्ग है और दूसरा सर्ग में शिव और शक्ति के यथार्थ स्वरूप का विवेचन किया गया है। योगवशिष्ठ ग्रंथ 6 प्रकरणों में पूर्ण है।

7. किसके द्वारा प्रेरित मन विषयों तक पहुँचता है? किससे नियोजित होकर यह प्राण चलता है?

Correct Answer: (d) केन उपनिषद्
Solution:

केनोपनिषद सामवेदीय 'तलवकार' ब्राह्मण के नवें अध्याय के अन्तर्गत आता है। केनोपनिषद की अन्य तलवकार उपनिषद तथा ब्राह्मणोपनिषद के नाम से भी जाना जाता है। केनोपनिषद मुख्य दस उपनिषदों में से द्वितीय श्रेणी का उपनिषद है।

इस उपनिषद का प्रारंभ प्रश्न केनेषित ....... 'यह जीवन किसके द्वारा प्रेरित है' से हुआ है इसलिए इस उपनिषद को केनोपनिषद के नाम से जाना जाता है। इसमें उस केन अर्थात् किसके द्वारा का विवेचन होने से 'केनोपनिषद्' कहा गया है।

8. छान्दोग्य उपनिषद् के सम्बन्ध में असत्य कथन है

Correct Answer: (d) उद्गीथ चार अक्षरों वाला है।
Solution:

छांदोग्य उपनिषद सामवेदीय छान्दोग्य ब्राह्मण का औपनिषदिक भाग है जो प्राचीनतम् दस उपनिषदों में नवम् एवं सबसे बृहदाकार है। इसके आठ प्रपाठकों में प्रत्येक में अनेक खण्ड है यह उपनिषद् ब्रह्मज्ञान के लिए प्रसिद्ध है।

9. धारणाभिर्मनोधैर्य याति चैतन्यमद्भुतम्' किस योगोपनिषद में आया है?

Correct Answer: (a) योगचूड़ामण्युपनिषद्
Solution:

यह श्लोक योगयूड़ामण्युपनिषद से लिया गया है। यह उपनिषद सामवेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह नाथ परम्परा से सम्बन्धित है इसमें अनेक श्लोक ऐसे हैं जो 'गोरक्ष शतक' से बहुत कुछ मेल खाते हैं।

10. श्वेताश्वतर उपनिषद् में ध्यान के अनुकूल स्थल की विशेषता में सम्मिलित नहीं है-

Correct Answer: (d) मरूभूमि
Solution:

श्वेताश्वतर उपनिषद में ध्यान के अनुकूल स्थल की विशेषण में समतल भूमि, पवित्र स्थल और मनोनुकूल को सम्मिलित किया गया है परन्तु मरुभूमि को इससे बाहर रखा गया है।