यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून 2022 योग (YOGA)

Total Questions: 23

11. कुक्कुटासन का वर्णन किस योगोपनिषद् में आया है?

Correct Answer: (a) त्रिशिखिब्राह्मणोपनिषद्
Solution:

कुक्कुटासन (शाब्दिक अर्थ मुर्गा आसन) हठ योग का एक आसन है यह आसन, पद्मासन से व्युत्पन्न है। यह बिना बैठे किये जाने वाले सबसे पुराने आसनों में से एक है इसका वर्णन त्रिशिखिब्राह्मणोपनिषद में मिलता है।

12. श्वेताश्वतर उपनिषद् के अनुसार, 'जिस प्रकार सारथि दुष्ट अश्वों से युक्त रथ को अत्यन्त सावधानी से लक्ष्य की ओर ले जाता है, उसी प्रकार विद्वान् (योगाभ्यासी) ______को अत्यन्त जागरूक होकर वश में किए रहे'-

Correct Answer: (d) मन
Solution:

श्वेताश्वतर उपनिषद के अनुसार 'जिस प्रकार सारथि दुष्ट अश्वों से युक्त रथ को अत्यन्त सावधानी से लक्ष्य की ओर ले जाता है, उसी प्रकार विद्वान (योगाभ्यासी) मन को अत्यन्त जागरूक होकर वश में किए रहो।'

13. पातञ्जल योग सूत्र के अनुसार शरीर के किस स्थान पर संयम करने पर 'चित्त संवित' होता है?

Correct Answer: (c) हृदय
Solution:

पतञ्जल योग सूत्र के अनुसार शरीर में हृदय पर संयम करने पर 'चित्त संवित' होता है। पतंजलि के अनुसार "चित्त की वृत्तियों को चचल होने से रोकना ही योग हैं (चित्तवृत्तिनिरोध)". • योगसूत्र, योग दर्शन का मूलग्रंथ हैं।

14. योगसूत्र के अनुसार 'आत्मभाव-भावना' की निवृत्ति किस में होती है?

Correct Answer: (c) विशेषदर्शी
Solution:

योगसूत्र के अनुसार - 'आत्मभाव-भावना' की निवृत्ति विशेषदर्शी में होती है। योगशास्त्र में विशेषदर्शी आत्मभाव की भावना अर्थात् अहंकार की निवृत्ति को कैवल्य बताया गया है और चित्त की वृत्तियों के निरोध को ही उसका साधन बताया गया है।

15. योगसूत्र के अनुसार सर्वज्ञता का बीज सीमारहित हिकस में स्थित है?

Correct Answer: (c) ईश्वर
Solution:

योगसूत्र के अनुसार सर्वज्ञाता का बीज सीमारहित ईश्वर में है। योगसूत्र में चित्त को एकाग्र करके ईश्वर में लीन करने का विद्यान है। पंतजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना (चित्तवृत्तिनिरोधः) ही योग है। अर्थात मन को भटकने देना, केवल एक ही वस्तु में स्थिर रखना ही योग है।

16. योगसूत्र के अनुसार चित्त के किस परिणाम के अन्तर्गत सर्वार्थता और एकाग्रता का यथाक्रम क्षय और उदय होता है?

Correct Answer: (a) समाधि परिणाम
Solution:

समाधि परिणाम में चित्त का विक्षेप धर्म शांत हो जाता है। अर्थात् अपना व्यापार समाप्त करके भूत काल में प्रविष्ठ हो जाता है और केवल एकाग्रता धर्म उदित रहता है अर्थात् व्यापार करने वाले धर्म की अवस्था में रहता है।

योगसूत्र ग्रंथ में चार पाद भाग है- (i) समाधि पाद (ii) साधना पाद (iii) विभूति पाद (iv) कैवल्य पाद

17. पिण्ड अथवा मानव शरीर में नवचक्रों का वर्णन किस ग्रन्थ में किया गया है?

Correct Answer: (b) सिद्धसिद्धान्त पद्धति
Solution:

सिद्धान्त पद्धति के लेखक गुरू गोरखनाथ हैं। नौ चक्रों के नाम -

1. ब्रह्मचर्य - मूलाधार में स्थित है, कामनाओं की पूर्ति होती है।
2. स्वाधिष्ठान चक्र इसमें हम चीजों को आकर्षित कर सकते हैं।
3. नाभी चक्र - सिद्धि की प्राप्ति होती है।
4. अनाहत चक्र हृदय में स्थित होता है।
5. कण्ठचक्र - विशुद्धि संकल्प पूर्ति, आवाज मधुर होती है।
6. तालुचक्र घटिका में, जिह्वा के मूल भाग में, लय सिद्धि प्राप्त होती है।
7. भुचक्र - आज्ञा चक्र वाणी की सिद्धि प्राप्त होती है।
8. निर्वाण चक्र ब्रह्मरन्ध्र, सहस्तार चक्र, मोक्ष प्राप्ति ।
9. आकाश चक्र सहस्त्राएँ चक्र के ऊपर, भय द्वेष की समाप्ति होती है।

18. सिद्ध सिद्धान्त पद्धति के अनुसार अवधूत योग के लक्षण किस उपदेश में वर्णित हैं?

Correct Answer: (c) षष्ठम्
Solution:

सिद्ध सिद्धांत पद्धति के उपदेश या अध्ययन निम्न है-

अध्याय - 1 पिण्ड उत्पत्ति विचार
अध्याय - 2 पिण्ड विचार
अध्याय - 3 पिण्ड ज्ञान
अध्याय - 4 पिण्ड धार
अध्याय - 5 पिण्डो में एकता
अध्याय - 6 अवधूत योगी

19. मयूरासन के छः प्रकार किस ग्रंथ में हैं?

Correct Answer: (a) हठ रत्नावली
Solution:

हठ रत्नावली 17वीं शताब्दी में श्रीनिवास द्वारा लिखा गया एक हठ योग ग्रन्थ है यह 84 आसनों को नाम देने वाले पहले ग्रन्थों में से एक है इसी ग्रन्थ में मयूरासन के छः प्रकारों का वर्णन मिलता है। मयूरासन हठयोग और आधुनिक योग में एक हाथसंतुलन आसन है। * मयूरासन सबसे पुराना बिना बैठे आसनों में से एक है।

20. सिद्धसिद्धान्त पद्धति के अनुसार 'ॐ' उच्चारण किस 'आधार' के अन्तर्गत करना चाहिए?

Correct Answer: (b) नाभि
Solution:

सिद्ध सिद्धान्त पद्धति के अनुसार 'ॐ' उच्चारण नाभि आधार के अन्तर्गत करना चाहिए। शरीर में सोलह आधार है जिसमें से कुछ निम्न है-

1. पादांगुष्ठ
2. मूलाधार
3. गुदाद्वार
4. भेद आधार
5. उड्डियान आधार
6. नाभी आधार
7. हृदयाधार
8. कष्ठाधार
9. घटिकाधार
10. तलु आधार
11. जिह्वा आधार

सिद्ध-सिद्धान्त पद्धति के अनुसार नौ चक्र है तथा तीन लक्ष्य -

(i) अन्तर लक्ष्य
(ii) वहिः लक्ष्य
(iii) मध्य लक्ष्य