योग एक जीवन शैली है, जिससे मानव अनेक समस्याओं से अपना बचाव कर सकता है। आज मानव समुदाय अनेक जटिल शारीरिक रोगों से प्रभावित हो रहा है। इसकी बड़ी वजह है दोषपूर्ण जीवनशैली। शारीरिक रोगों को व्याधि भी कहा जाता है जिसमें मानव शरीर में दोष धातु, रस व कण विषमता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
इन्हें संतुलित करने का कार्य यौगिक जीवनशैली मात्र से संभव है। उदाहरण के तौर पर रस विषमता हमारे खान-पान से जुड़ी समस्या है। इसी से हमारे शरीर की अन्य छः धातुओं का निर्माण आधारित है। कब खायें, क्या खायें, कितना खायें, क्यों खायें आदि पर हम आज गंभीरतापूर्वक विचार नहीं करते हैं।
जीवनशैली में आहार के प्रति आदत और अभिरुचि को सुधारक हम यौगिक जीवन शैली के एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया की शुरुआत कर सकते हैं। भारतीय शास्त्रों में वर्णित हितभुक्, मितभुक्, विरुद्ध आहार, पोष्य आहार, मेध्य आहार आदि अत्यंत ही विचारणीय तथ्य हैं।
आज का मानव समूह किस प्रकार के रोगों से प्रभाविकत हो रहा है?