Solution:हृदय चक्र को 12 पंखुडियों वाले एक दिव्य कमल के रूप में वर्णित किया गया है जिसमें संस्कृत अक्षर है। प्राण अतीत की इच्छाओं और अहंकार के साथ हृदय में रहता है। इस प्राण के विभिन्न संसाधनो का परिणाम दस प्रकार के प्राणो में होता है। ये है।
प्राण, अपान, उदान, व्यान, नाग, कूर्म, कृकर, देवदन्त और धनंजय । इसमे से पहले 5 पहत्वपूर्ण है। हृदय प्राण का स्थान है, गुदा अपान का स्थान है, नाभि क्षेत्र सामान का स्थान है, कंठ उदान का स्थान है और व्यान पूरे शरीर में घूमता है।