यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 योग (YOGA)

Total Questions: 100

11. योगचूडामण्युपनिषद् के अनुसार प्रमुख दस नाडियों में से नहीं हैं-

Correct Answer: (b) पद्मिनी, चक्रणी, हस्तिनी
Solution:

योगचूडामण्युपनिषद् के अनुसार प्रमुख दस नाडिया (नस) निम्न है- (1) ईडा, (2) पिंगला (3) सुषम्रा (4) यशस्विनी (5) अलम्बुसा (6) कुहू (7) गंधारी (8) हस्तिजिह्मा (9) पूषा (10) सरस्वती, शरीर में 72000 नाडिया पायी जाती है

12. योगतत्त्वोपनिषद् के अनुसार योगाभ्यास में 'घटावस्था' की स्थिति पर अवस्थिति के पश्चात्, जितना अभ्यास योगी कर रहा होता है, अब उसका .......।

Correct Answer: (c) चतुर्थांश करे
Solution:

योगतत्त्वोपनिषद् के अनुसार योगाम्यास में घटावस्था' की स्थिति पर अवास्थिति के पश्चात्, जितना अभ्यास योगी कर रहा होता है, अब उसका चतुर्थांश करे।

13. पातंजल योग सूत्र के अनुसार 'साधक पंचक' में नहीं है-

Correct Answer: (b) वैराग्य
Solution:

"श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वक इतरेषाम् ।।। 20।। श्रद्धा, वीर्य, स्मृति, समाधि, प्रज्ञापूर्वक, इतरेषाम् अर्थात साधन के पांच कर्म है- 1. श्रद्धा 2. वीर्य 3. स्मृति 4. समधि 5. प्रज्ञापूर्वक (सत्य वस्तु के लिए विवेक से)

14. पातंजल योग सूत्र के अनुसार 'कृतकारितानुमोदिता' संबंधित है-

Correct Answer: (b) वितर्क से
Solution:

वितरका हिंसादयः कृतकारितानुमोदिता लोभक्रोधमोहपूर्वका मृदुमध्याधिमात्रा

अर्थ- हिंसा, असत्य जैसी विपरीत मुत्यों की तीन अवस्थाए हो सकती है - जब वह हमने स्वयं किया हो या हमारे द्वारा किसी से करावाया जाय अथवा ऐसी किसी कृत को हम समर्थन करें।

15. पातंजल योग सूत्र के अनुसार 'निरूपक्रम'किसके प्रकार है?

Correct Answer: (c) कर्म के
Solution:

निरूपक्रम: वे कर्म जो मन्द वेग वाले है जिन्होने आयु भोगने का कार्य अभी तक प्रारम्भ नहीं किया है। इन दोनों कर्मों से उनका साक्षात हो जाने पर योगी को संशय रहित यह ज्ञान हो जाता है कि आयु कितनी शेष रही है।

16. पातंजल योग सूत्र के अनुसार निम्नलिखित में से जाति देश और काल के संदर्भ में क्या एक रूप रहते हैं?

Correct Answer: (d) स्मृति और संस्कार
Solution:

पातंजल योग सूत्र के अनुसार जाति देश और काल इन तीनों के सम्पर्क टूटने पर भी स्वभाविक कर्म संस्कारो में बांधा नही आती, क्यो कि स्मृति और संस्कारों का एक ही रूप होता है।

17. वसिष्ठसंहिता में शरीर में कितने मर्म स्थान बताये हैं?

Correct Answer: (c) अठारह
Solution:

आचार्य सुश्रुत के अनुसार, 'शरीर के वे बिन्दु जहाँ पर मांस, सिरा, स्नायु, अस्थि व संधि का संगम होता है, वे मर्म स्थान कहलाता है। मनुष्य के शरीर में कुल 107 मर्म बिन्दु हैं। परन्तु वसिष्ठसांहिता में शरीर में 18 मर्म बिन्दु बताए गये है।

18. हठप्रदीपिका में कौन-से षट्कर्म की विधि में 'भस्त्रावल्लोहकारस्य' शब्द का प्रयोग किया गया है-

Correct Answer: (d) कपालभाति
Solution:भस्त्रावल्लोहकारस्य रेचपूरौ संसभ्रमौ ।
कपालभातिविख्या कफदोषविशोषणी ॥

अर्थ लोहकार की भस्त्रा (धौकनी) के समान अत्यन्त शीघ्रता से क्रमशः रेचक पूरक श्वास प्रश्वास को शातिपूर्वक करना, योगशास्त्र में क

19. भैखासन का वर्णन किस ग्रंथ में किया गया है?

Correct Answer: (b) हठरत्नावली
Solution:

हठ रत्ना वली हठ योग पाठ श्रीनिवास द्वारा 17वीं सदी में लिखा है यह 84 आसनो को नाम देने वाले पहले ग्रन्थो में से एक है।

20. शिवसंहिता में प्राण का वास बताया गया है-

Correct Answer: (a) हृदय में
Solution:

हृदय चक्र को 12 पंखुडियों वाले एक दिव्य कमल के रूप में वर्णित किया गया है जिसमें संस्कृत अक्षर है। प्राण अतीत की इच्छाओं और अहंकार के साथ हृदय में रहता है। इस प्राण के विभिन्न संसाधनो का परिणाम दस प्रकार के प्राणो में होता है। ये है।

प्राण, अपान, उदान, व्यान, नाग, कूर्म, कृकर, देवदन्त और धनंजय । इसमे से पहले 5 पहत्वपूर्ण है। हृदय प्राण का स्थान है, गुदा अपान का स्थान है, नाभि क्षेत्र सामान का स्थान है, कंठ उदान का स्थान है और व्यान पूरे शरीर में घूमता है।