यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 योग (YOGA)

Total Questions: 100

31. प्रातः काल-सायंकाल में संधियों में हल्की जकड़न निम्नलिखित में से किसका मूल लक्षण है?

Correct Answer: (c) रुमेटॉइड संधिशोथ
Solution:

लम्बे समय तक रहने वाला सूजन का विकार जो हाथ व पैरो के साथ जोड़ो को प्रभावित करता है। अस्थिशोध में, शरीर में रोगो से लड़ने वाला तंत्र जोड़ सहित अपने स्वयं के उत्तको पर हमला करता है गंभीर मामलो मे, यह आतरिक अंगो पर हमला करता है।

रूमेटाइड गठिया एक पुरानी भडकाऊ विकार है जो सिर्फ आप के जोड़ो को ज्यादा प्रभावित कर सकता है कुछ लोगो मे, त्वचा आखे, फेफडे, हृदय और रक्त वाहिकाओं सहित शरीर की विभिन्न प्रनालीयो को नुकसान पहुँचा सकती है।

32. कुंडलिनी योग में पाचक अंग, ग्रंथियाँ एवं सौर चक्र की तंत्रिकाएँ निम्नलिखित में से किससे परिलक्षित होती हैं?

Correct Answer: (d) मणिपुर चक्र
Solution:

मणिपुर चक्र तंत और योग साधन की चक्र संकल्पना का तीसरा चक्र है। मणि का अर्थ है 'गहना' और पर का अर्थ है। 'स्थान'। यह नाभि के पिछे स्थित होता है। इसका आधार तत्व अग्नि होने के कारण इसे 'अग्नि' या 'सूर्य केन्द्र' भी कहा जाता है।

33. शिव संहिता के अनुसार, 12 वर्षों की गहन साधना के पश्चात, मध्यम साधक किस योग हेतु उपयुक्त होते हैं?

Correct Answer: (e) *
Solution:

राजयोग - राजयोग सभी योगो का राजा कहा जाता है। क्योकि इसमे प्रत्येक प्रकार के योग की कुछ न कुछ सामग्री अवश्य मिल जाती है राज योग महर्षि पतंजलि द्वारा रचित अष्टांग योग का का वर्णन आता है। राजयोग का विषय चितवृन्तियों का निरोध करना है।

लययोग - चिन्त का अपने स्वरूप विलीन होना या चिन्त की निरुद्ध अवस्था लययोग के अन्तर्गत आता है। साधक के चिन्त में जब चलते, बैठते, सोते और भोजन करते समय हर समय ब्रह्मा का ध्यान रहे इसी को इसी को लय योग कहते है।

मंत्रयोग - मंत्र का समान्य अर्थ है- 'मननात् त्रायते इति मंत्रः । मन को त्राय (पार करने वाला) मंत्र ही है। मंत्र योग का सम्बन्ध मन से है। मन को इस प्रकार परिभाषित किया गया है- 'मनन इति मनः'। जो मनन, चिन्तन करता है वही मन है। मन की चंचलता का निरोध मंत्र के द्वारा करना मंत्र योग है।

हठयोग - हठ का शाब्दिक अर्थ हठपूर्वक किसी कार्य को करने से लिया जाता है। 'ह' का अर्थ 'सूर्य' तथा 'ठ' का अर्थ 'चन्द्र' वताया गया है सूर्य और चन्द्र की समान अवस्था हठयोग है।

34. 'टीचिंग मेथड्स फॉर यौगिक प्रैक्टिसेज' नामक पुस्तक के अनुसार "ज्ञात से अज्ञात की ओर" वाली किसी गतिविधि की प्रस्तुति (निष्पादन) निम्नांकित किससे संबंधित है?

Correct Answer: (c) शैक्षणिक सिद्धांत
Solution:

शैक्षणिक सिद्धान्त का अर्थः शिक्षक और शिक्षर्थी के बीच अन्तः- क्रिया होती हैं और शिक्षक शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थी के व्यवहार मे परिवर्तन लाने का प्रयास करता है। शिक्षण एक कला है और शिक्षक एक कलाकार। प्रत्येक कला के कुछ सिद्धान्त होते है। वही शिक्षक या कलाकार के सिद्धान्त बन जाते है।

35. अध्यापक सटीक व संक्षिप्त अनुदेश देते हैं, इसके साथ ही प्रदर्शन होता है और विद्यार्थी तदनुसार प्रस्तुति (निष्पादन) करते हैं। यह शिक्षण विधि कहलाती है।

Correct Answer: (c) अनुदेश-अनुक्रिया विधि
Solution:

छात्र उपलब्धि बढाने और व्यवहार संबंधि समस्याओ को कम करने के लिए एक बहु-स्तरीय प्रणाली के भीतर मुख्य निर्देश, मूल्यांकन और हस्तक्षेप को जोडती है। RtI (Response-toInstruction) प्रकृया में सभी स्कूल कमियों, माता-पिता और कभी- कभी सामुदायिक सेवा प्रदाताओं की भागीदारी की आवश्यकता होती है।

36. निम्नलिखित में से किस नैदानिक अवस्था में उष्ट्रासन लाभकारी है?

Correct Answer: (c) पृष्ठवेदना (पीठ दर्द) एवं कुब्जता
Solution:

उष्ट्रासन के लाभ:-

(1) उष्ट्रासन का अभ्यास आप के पूरे शरीर को खोलने में मदद करता है।
(2) पाचन शक्ति बढ़ाता है।
(3) सीनें को मजबूत बनाता है।
(4) पीठ और कंधे को मजबूत बनाता है।
(5) पीठ के निचले हिस्से में दर्द से छुटकारा दिलाता है।
(6) रीढ़ की हड्डी में लचीलापन एवं मुद्रा में सुधार भी लाता है।
(7) मासिक धर्म की परेशानी से राहत देता है।

37. भुजंगकरणी कुंभक का उल्लेख निम्नलिखित में से किस ग्रंथ में है?

Correct Answer: (d) हठररत्नावली
Solution:

हठरत्नावली हठयोग विषयक संस्कृत ग्रंथ है जिसकी रचना 17वीं शताब्दी में श्रीनिवास भट्ट ने की थी। इसे 'हठयोगरत्नसारणी' भी कहते है। हठरत्नावली चार अध्यायो में विभाजित है द्वितीय अध्याय में नौ कुंभको का विस्तृत वर्णन दिया गया है। आठ अतिरिक्त नौवा कुम्भक 'भुजंगीकरण कुम्भक' है।

38. सीधे खड़े हो जाएँ, अपनी ग्रीवा को ऊपर उठाएँ, नेत्रों को खुला रखें, आसमान की ओर एकटक देखें और बलात् अंतः श्वसन बहिःश्वसन करें, यह अभ्यास कहलाता है-

Correct Answer: (a) बुद्धि तथा धृति शक्ति विकासक
Solution:

बुद्धि तथा धृति शक्ति विकासक स्थितिः-

• दोनो पैर मिलाकर, शरीर को कंधो तक विल्कुल सीधा रखे
• मुँह बंद रखे।
• सिर को बिल्कुल पीछे मोडते हुए ले जाय
• आँख खुली रखे और ऊपर आकाश की तरफ देखे।
• सिर को पीछे रखते हुए, अपना ध्यान सिर के ऊपर, मध्य में लगाने की चेष्टा करें।
• नांक से सांस अंदन बाहर करे।
• प्रारंभ में श्वास प्रश्वास की प्रकृया 15-20 बार करे।
• इस प्रक्रिया से मानसिक विकार, जैसे-मंदबुद्धि, मूढता, भूलना, उदासीनता, सन्देह आदि दूर होते है
• इच्छा शक्ति बढ़ती है।

39. पं. श्रीराम शर्मा आचार्य अपने सविता ध्यान धारणा के निर्देशन में स्थूल, सूक्ष्म व कारण शरीर से संबंधित किन शब्दों का प्रयोग करते हैं?

Correct Answer: (b) तृप्ति, तुष्टि, शांति
Solution:

पं. श्री राम शर्मा अचार्य अपने सविता ध्यान धारणा के निर्देश में स्थूल सूक्ष्म व कारण शरीर से संबंधित तृप्ति, तुष्टि शन्ति शब्दों का प्रयोग करते है।

40. न्याय दर्शन के अनुसार प्रमाण है।

(A) उपमान
(B) अर्थापति
(C) अनुलब्धि
(D) शब्द
(E) एतिह्या

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल A, D
Solution:न्यायदर्शन में प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द ये चार प्रमाण माने जाते है।