यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 योग (YOGA)

Total Questions: 100

41. नारदभक्ति सूत्र में किन कर्मों के त्याग को निरोध कहा गया है-

(A) शुभ कर्म
(B) लौकिक कर्म
(C) अशुभ कर्म
(D) वैदिक कर्म
(E) नित्य कर्म

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B, D
Solution:नारदभक्ति सूत्र में लौकिक और वैदिक (समस्त) कम के त्याग को निरोध कहा गया है।

42. छांदोग्य उपनिषद्के अनुसार -

(A) अंगिरा ऋषि ने मुख्य प्राण के रूप में उद्रीथोपासना की थी।
(B) कपिल ऋषि ने प्राण के रूप में उद्रीथोपासना की थी।
(C) प्राण को अंगिरस नहीं कहते हैं।
(D) प्राण को अंगिरस भी कहते हैं।
(E) प्राण अंगों का रस है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल A, D, E
Solution:

छान्दोग्य उपनिषद के अनुसार अंगिरा ऋषि ने मुख्यप्राण के रूप में उग्दीयोपासना की थी। प्राण को अंगिरस भी कहते है क्योकि प्राण अंगो कारस है

43. भगवद्गीता में कर्मयोग के अंतर्गत, अर्जुन को जिस भाव से युद्ध करने के लिए कहा है, वे हैं-

(A) ज्वरकृत्वा
(B) निराशी :
(C) ज्वरभूत्वा
(D) निर्ममः
(E) विगतज्वरः

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल B, D, E
Solution:

भगवत गीता में कर्म योग के अन्तर्गत, अर्जुन को निराशीः, निर्ममः और विगतज्वर भाव से युद्ध करने के लिए कहा है।

44. श्वेताश्वर उपनिषद् के अनुसार 'योग प्रवृत्ति' के प्राथमिक लक्षण कहे गए हैं-

(A) वर्ण प्रसादम्
(B) आमरोगं
(C) शुभ गंध
(D) लोलुपत्वं
(E) स्वरसौष्ठव

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल A, C, E
Solution:श्वेताश्वर उपनिषद के अनुसार 'योग प्रवृन्ति' के प्राथमिक लक्षण है- वर्ण प्रसादम, शुभ गन्ध तथा स्वरसौष्ठव

45. सरस्वती चालन के लिए योगकुण्डल्युपनिषद् में जो स्थल कहे गए हैं, वे हैं-

(A) अत्युच्चनीच
(B) शर्करादिविवर्जित
(C) पवित्र
(D) निर्जन
(E) शीताग्निजलवर्जित

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल B, C, D, E
Solution:

सरस्वती चालन के लिए योगकुण्डल्युपनिषद् में जो स्थल कहे गये है वे है- (1) शर्करादिविवर्जित (2) पवित्र (3) निर्जन (4) शीताग्निजलवर्जित

46. योगतत्वोपनिषद् के अनुसार नाड़ीशुद्धि के लक्षण हैं -

(A) लोम
(B) जठराग्निविवर्धन
(C) शरीर लघुता
(D) केशमोचन
(E) कृशत्व

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल B, C, E
Solution:

योगतत्वो उपनिषद के अनुसार नाडीशुद्धि के लक्षण निम्न है। (1) जठराग्निविवर्धन (2) शरीर लघुता (3) कृशत्व

47. इनमें से कायसम्पत् हैं-

A. लावण्य
B. वज्रसंहनन
C. प्राप्ति
D. बल
E. आस्वाद

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल A, B, D
Solution:

काया (शरीर) की सम्पति निम्न है--

(1)लवण्य (सलोनापन या सुन्दरता)
(2) वज्रसंहनन (कठिनाई सहन करने वाला)
(3) बल

48. पातंजल योगसूत्र के अनुसार पुरुषज्ञान से प्राप्त सिद्धियाँ हैं-

(A) सिद्धों के दर्शन
(B) श्रावण
(C) परशरीरावेश
(D) वेदन
(E) वार्ता

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B, D, E
Solution:

पतंजली योगसूत्र के अनुसार पुरूषज्ञान से प्राप्त सिद्धियाँ श्रावण, वेदन तथा वार्ता है।

49. पातंजल योग सूत्र के अनुसार समाधि परिणाम है-

(A) व्युत्थान संस्कार अभिभव
(B)  सर्वार्थ क्षय
(C) तुल्य प्रत्यय शांत
(D) एकाग्रता उदय
(E) तुल्य प्रत्यय उदित

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B, D
Solution:

योग समाधि द्वारा ही तत्व दर्शन अतिन्दिय दर्शन आत्म दर्शन तथा आत्मसाक्षात्कार किया जा सकता है मनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य है मोक्ष कैवल्य की प्राति, जीवन की सार्थकता इसी मे है। समाधि परिणाम सार्वार्थक्षय तथा एकाग्रता उदय है।

50. वसिष्ठ संहिता के अनुसार नियम हैं-

(A) शौच
(B) आस्तिक्य
(C) दान
(D) अहिंसा
(E) ईश्वर पूजा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B, C, E
Solution:

वसिष्ठ संहिता में बताए गये यम, नियम, हमे नैतिकता मूल्य प्रदान करते है कि हमारे लिए क्या आवश्यक है क्या आवश्यक नही है वह जीवन को सरल और आनन्दमय बनाते है।

वसिष्ठसंहिता के अनुसार यम के 10 भाग है - 1. अहिंसा, 2. सत्य 3. अस्तेह, 4. वह्मचर्य 5. दया, 6. आर्जव 7. क्षमा 8. धृति 9. मिताहार 10. शौच

वसिष्ठ संहिता के अनुसार नियम भी 10 है-  1. तप, 2.संतोष 3. आस्तिकता 4. दान  5. ईश्वरपूजा 6. सिद्धान्त श्रवण 7. लज्जा 8. मति 9. जप, 10. व्रत