Solution:एते महाकविकालिदासप्रणीते 'रघुवंशम्, कुमार सम्भवम् महाकाव्ये स्तः । इसमें महाकवि कालिदास प्रणीत महाकाव्य रघुवंशम्, कुमारसम्भवम् है। रघुवंशम् महाकवि कालिदास की रचना है। यह उन्नीस सग में विभक्त है। यह वीर रस प्रधानकाव्य है। इसमें वैदर्भी रीति का प्रयोग हुआ है।
रघुवंश में आकर्षक चरित्र-चित्रण विशद एवं रुचिर वर्णन, प्रौढ़ प्रतिभा, सुन्दर रस व्यञ्जना, सरल अलंकृत शैली का मणिकाञ्चन संयोग। इसका मूलस्रोत- वाल्मीकि रामायण है। रघुवंश के उन्नीस सर्गों में दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक रघुवंश के 29 राजाओं का वर्णन । मनु तथा इक्ष्वाकु सहित कुल 31 राजाओं का वर्णन है।
कुमारसम्भव सत्रह सर्गों में विभक्त महाकवि कालिदास की प्रारम्भिक रचना है। इसमें शिव-पार्वती विवाह, कुमार कार्तिकेय के जन्म तथा उसके द्वारा तारकासुर के वध की कथा वर्णित है। कुमारसम्भवं में 'सम्भव' शब्द सम्भावना की ही ध्वनि देता है। शिव पार्वती के असाधारण प्रेम और प्रणय लीलाओं का चित्रण इस काव्य में होने से सम्पूर्ण काव्य शृङ्गारमय है। मल्लिनाथ की संजीवनी टीका वस्तुतः आठ सर्गों तक ही है।
→ 'मेघदूतम्' महाकवि कालिदास का दो भागों में विभक्त खण्डकाव्य है।
→ 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' सात अंकों में विभक्त कालिदास का अद्वितीय नाटक है।