Solution:अस्मिन् श्लोके वृत्त्यानुप्रासः अलंकारः - वंशस्थम् छन्दसोः स्थितिरियम् वर्तते। 'श्रियः कुरुणामधिपस्य पालनीं, प्रजासु वृत्तिं यमयुङ्क्त वेदितुम्' स वर्णिलिङ्गी विदितः समाययौ युधिष्ठिरं द्वैतवने वर्नचरः ।' इस श्लोक में वृत्त्यानुप्रास अलङ्कार और वंशस्थ छन्द है।
वृत्त्यानुप्रास अलङ्कार-आवृत्तवर्ण सम्पूर्णवृत्तयानुप्रासवद्वचः।
अमन्दानन्द सन्दोहस्वच्छन्दास्पदमन्दिरम् ।।
आवृत्त (दुहरायेगये) वर्णों (व्यञ्जनों से भरी हुई तथा अमन्दअत्यधिक आनन्द के समूह की स्वतंत्र स्थिति की निधान-भूत रचना वृत्त्यनुप्रास अलङ्कार से युक्त होती है।
वंशस्थ छन्द- 'जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ।' वंशस्थ के प्रत्येक पाद में 12 वर्ण होते हैं। क्रमशः । जगण, 1 तगण, 1 जगण, 1 रगण।