यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021 (संस्कृत)

Total Questions: 100

41. केन सह कस्य सम्बन्धः ?

तालिका – Iतालिका – II
A. आगमग्रन्थाःI. आचार्यशङ्करः
B. त्रिपिटकसाहित्यम्II. जैनदर्शनम्
C. न्यायसिद्धान्तमुक्तावलीIII. बौद्धसाहित्यम्
D. निर्विशेषाद्वैतवादःIV. विश्वनाथपञ्चानन
Correct Answer: (b) A-II, B-III, C-IV, D-I
Solution:

प्रश्नानुसारं समुचितं विकल्पं (b) अस्ति

तालिका – Iतालिका – II
A. आगमग्रन्थाःजैनदर्शनम्
B. त्रिपिटकसाहित्यम्बौद्धसाहित्यम्
C. न्यायसिद्धान्तमुक्तावलीविश्वनाथपञ्चाननः
D. निर्विशेषाद्वैतवादःआचार्यशङ्करः

42. किष्किन्धाकाण्डे कौ विषयौ वर्णितौ स्तः

A. अशोकवनिका ध्वंसनम् B. सीतान्वेषणम्  C. विभीषणेन दूतवधनिषेधः D. सम्पाति कथा
समुचितं विकल्पं चिनुत - 

Correct Answer: (c) B एवं D
Solution:

किष्किन्धाकाण्डे सीतान्वेषणम्, सम्पाति कथा एतौ विषयौ वर्णितौ स्तः । सीतान्वेषण और सम्पाति कथा किष्किन्धाकाण्ड में यह विषय वर्णित है। वाल्मीकि कृत रामायण में कुल 7 काण्ड हैं। इसमें 24 हजार श्लोक हैं। रामायण में राम के चरित्र का वर्णन महर्षि वाल्मीकि ने किया है। इसमें प्रधान रस करुण है। इसके नायक राम और नायिका सीता हैं।
सातकाण्ड निम्नवत् हैं- 

क्रम संख्याकाण्ड का नामसर्गों की संख्या
(1)बालकाण्ड77 सर्ग
(2)अयोध्याकाण्ड119 सर्ग
(3)अरण्यकाण्ड75 सर्ग
(4)किष्किन्धाकाण्ड67 सर्ग
(5)सुन्दरकाण्ड68 सर्ग
(6)युद्धकाण्ड128 सर्ग
(7)उत्तरकाण्ड111 सर्ग

 

43. सांख्यकारिकायां द्विविधः सर्गः (भौतिको बौद्धिकश्च) एतन्नामाख्यो वर्तते-

A. तन्मात्राख्यः B. लिङ्गाख्यः C. सत्त्वरजस् तमसाख्यः D. भावाख्यः
समुचितं विकल्पं चिनुत - 

Correct Answer: (c) B एवं D
Solution:

सांख्यकारिकायां 'लिङ्गाख्यः च भावाख्यः' सर्गः (भौतिको बौद्धिकश्च) एतन्नामाख्यो वर्तते-
लिङ्ग पद से यहाँ तन्मात्र परिणाम और 'भावैः' से बुद्धि परिणाम अभिलक्षित है। कहने का तात्पर्य यह है कि बुद्धि परिणाम के बिना तन्मात्र-परिणाम न तो स्वरूपतः ही सिद्ध होगा और न पुरुषार्थ में साधन ही बनेगा।

इसी प्रकार तन्मात्र-परिणाम के बिना बुद्धि परिणाम भी न स्वरूपतः ही सिद्ध होगा और न पुरुषार्थ में साधन ही बनेगा। इसलिए दोनों प्रकार की सृष्टि या परिणाम होते हैं। 'भोग' नामक पुरुषार्थ शब्द इत्यादि भोग्य विषयों तथा द्विविध (स्थूल और सूक्ष्म) शरीर रूप भोगायतनों के बिना असम्भव है।

44. 'यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः'- इति मन्त्रांशे 'यज्ञम्' इति पदस्य भाष्यकार सायणानुसारमर्थोऽस्ति?

Correct Answer: (a) प्रजापतिम्
Solution:

'यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः -' इति मन्त्रांशे 'यज्ञम्' इति पदस्य भाष्यकार सायणानुसारं 'प्रजापतिम्' अर्थो अस्ति। येन यज्ञं अजन्तः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः तानि धर्माणि प्रथमानि आसन् । तेह नाकं महिमानः सचन्तयत्र पूर्वोसाध्याः सति देवाः ।।

45. 'अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्' अत्र मन्त्रांशे आगतानां पदानामर्थ सायणमनुसृत्य मेलयत -

तालिका – Iतालिका – II
A. अहम्I. ईश्वरी
B. राष्ट्रीII. मुख्या
C. संगमनीIII. आम्भृणी वाक्
D. प्रथमाIV. प्रापयित्री

समुचितं विकल्पं चिनुत - 

Correct Answer: (c) A-III, B-I, C-IV, D-II
Solution:

'अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्' अत्र मन्त्रांशे आगतानां पदानामर्थ सायणमनुसृत्य मेलयत

तालिका – Iतालिका – II
A. अहम्आम्भृणी वाक्
B. राष्ट्रीईश्वरी
C. संगमनीप्रापयित्री
D. प्रथमामुख्या

उपर्युक्त तालिका 1 का तालिका 2 से क्रमानुसार व्यवस्थित रूप रखा गया है।

46. एतौ काव्यशास्त्रप्रणेतारी आचार्यों स्तः

A. वाल्मीकिः B. भामहः  C. क्षेमेन्द्रः D. कालिदासः
समुचितं विकल्पं चिनुत -

Correct Answer: (c) B एवं C
Solution:

'भामहः च क्षेमेन्द्रः' काव्यशास्त्रप्रणेतारौ आचार्यौ स्तः। भामह, क्षेमेन्द्र काव्य शास्त्री आचार्यों में से हैं।
भामह- आचार्य भामह संस्कृत भाषा के सुप्रसिद्ध आचार्य थे। उनका काल निर्णय भी अन्य पूर्ववर्ती आचार्यों की तरह विवादपूर्ण है। परन्तु अनेक प्रमाणों से यह सिद्ध होता है

कि भामह 300 ई से 600 ई. के मध्य हुये हैं। आचार्य भरतमुनि के बाद प्रथम आचार्य भामह ही हैं। काव्यशास्त्र पर काव्यालङ्कार नामक ग्रन्थ उपलब्ध होता है इन्हें अलङ्कार सम्प्रदाय का जनक कहते हैं। "शब्दार्थी सहितौ काव्यम्” यह इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य की परिभाषा है।

क्षेमेन्द्र- (जन्म लगभग 1025-1066) संस्कृत के प्रतिभासम्पन्न काश्मीरी महाकवि थे। ये विद्वान ब्राह्मणकुल में उत्पन्न हुए थे। ये सिन्धु के प्रपौत्र, निम्नाशय के पौत्र और प्रकाशेन्द्र के पुत्र थे। इन्होंने प्रसिद्ध आलोचक तथा तन्त्रशास्त्र के मर्मज्ञ विद्वान् अभिनवगुप्त से साहित्यशास्त्र का अध्ययन किया था। इनके पुत्र सोमेन्द्र ने पिता की रचना बोधिसत्त्वावदानकल्पलता को एक नया पल्लव (कथा) जोड़कर पूरा किया था।

रचनाएँ- रामायणमञ्जरी, भारतमञ्जरी, बृहत्कथामञ्जरी ।

47. अधोऽङ्कितासु भारोपीय परिवारानुसारं कतमा भाषा शतम् वर्गेऽस्ति?

Correct Answer: (a) आर्मीनी
Solution:

भारोपीय परिवारानुसारं 'आर्मीनी' भाषा शतं वर्गऽस्ति ।
आर्मीनी- यह श्लिष्ट योगात्मक भाषा है तथा इसकी ध्वनियाँ ईरानी से भिन्न हैं। यह आर्य परिवार और बाल्टो स्लाविक भाषाओं के मध्य संयोजक कड़ी मानी जाती हैं। इसका स्वरूप ग्रीक और भारत ईरानी के बीच का है। आधुनिक आर्मीनी की स्तम्बूल बोली कुस्तुन्तुनिया और काला सागर के किनारे के भाग में बोली जाती हैं। आर्मीनी में ईसाई साहित्य अधिकांश में है। यह 11 वीं सदी से प्रारम्भ होता है। कीलाक्षर अभिलेख ऐतिहासिक महत्व के हैं। जिस प्रकार भारत में पुरोहित संस्कृत भाषा का प्रयोग करते हैं, इसी प्रकार आर्मीनिया के पुरोहित प्राचीन आर्मीनी का ही प्रयोग करते हैं। आर्मीनी के वर्तमान समय में दो रूप है।
(1) स्तम्बूल- यह यूरोप वाले भाग में बोली जाती है।
(2) अरारट- यह एशिया वाले क्षेत्र में बोली जाती है।

48. 'अक्षेर्मा दीव्यः कृषिमित् कृषस्व वित्ते रमस्व बहु मन्यमानः' अस्य मन्त्रस्य देवता का?

Correct Answer: (c) कृषिः
Solution:

'अक्षेर्मा दीव्यः कृषिमित् कृषस्व वित्ते रमस्व बहु मन्यमानः' अस्य मन्त्रस्य देवता 'कृषिः' अस्ति। उपर्युक्त मन्त्र अक्ष सूक्त से अवतरित है। मण्डल 10, सूक्त-34, कुल मन्त्र-14, ऋषि कवष ऐलूष । देवता अक्षकृषि प्रशंसा, छन्दसातवें मन्त्र में जगती छन्द तथा शेष में त्रिष्टुप् है।

अक्षेर्मा दीव्यः कृषिमित् कृषस्व वित्ते रमस्व बहु मन्यमानः । तत्र गावः कितव तत्र जाया तन्मे विचष्टे सवितायमर्यः ।।3।। अर्थात् जुआड़ी, कभी जुआ नहीं खेलना, खेती करना। कृषि से जो कुछ लाभ हो उसी से सन्तुष्ट रहना अपने को कृतार्थ समझना । इसी से स्त्री प्राप्त करोगे और अनेक गायें भी पाओगे। प्रभु सूर्य देव ने मुझसे ऐसा कहा है।

49. केन सह कस्य सम्बन्धः ?

तालिका – Iतालिका – II
A. कापटिक:I. कर्षको वृत्तिक्षीण: प्रज्ञाशौचयुक्त:
B. उदास्थित:II. वाणिजको वृत्तिक्षीण: प्रज्ञाशौचयुक्त:
C. गृहपतिक:III. प्रवज्याप्रत्यवसित: प्रज्ञाशौचमुक्त:
D. वैदेहक:IV. परमर्मज्ञ: प्रगल्भश्छात्र:

समुचितं विकल्पं चिनुत - 

Correct Answer: (d) A-IV, B-III, C-I, D-II
Solution:

प्रश्नानुसारं समुचित विकल्पं (b) अस्ति।

तालिका – Iतालिका – II
A. कापटिक:परमर्मज्ञ: प्रगल्भश्छात्र:
B. उदास्थित:प्रवज्याप्रत्यवसित: प्रज्ञाशौचमुक्त:
C. गृहपतिक:कर्षको वृत्तिक्षीण: प्रज्ञाशौचयुक्त:
D. वैदेहक:वाणिजको वृत्तिक्षीण: प्रज्ञाशौचयुक्त:

उपर्युक्त तालिका 1 का तालिका 2 से क्रमानुसार व्यवस्थित रूप में रखा गया है।

50. कौटिलीयार्थशास्त्रानुसारंके राजानमुत्तिष्ठमानमनूत्तिष्ठन्ते ?

Correct Answer: (b) भृत्याः
Solution:

कोटिलीयार्थशास्त्रानुसारं 'भृत्याः' राजानमुत्तिष्ठमानमनूत्तिष्ठन्ते। भृत्य दुर्ग तथा जनपद की शक्ति के अनुसार भृत्य रखे जाये उनकी भूति में राजकीय आय का चौथाई खर्च किया जाय।

भूति इतनी होनी चाहिये कि भृत्य कार्य करने में समर्थ हो सके तथा उनके शरीर को हानि न पहुँचे धर्म तथा अर्थ की अवहेलना किसी भी काम में न करें। राजा द्वारा कर्मचारियों पर वार्षिक धन व्यय विवरण इस तालिका से सपष्ट हो जाता है-

राजा मन्त्रिमण्डलवार्षिक पण
ऋत्विग्, आचार्य, मन्त्रि, पुरोहित, सेनापति, युवराज, राजमाता, तथा राजमहिषी48000 पण वार्षिक
दौवारिक, आन्तर्वैशिक, प्रशास्ता, समाहर्ता तथा सन्निधाता24000 पण वार्षिक
कुमार, कुमार-माता, नायक, पौर, व्यावहारिक कार्मन्तिक, मंत्रिपरिषद, राष्ट्रान्तपाल12000 पण वार्षिक
श्रेणी, मुख्य, हस्ति-मुख्य, अश्व मुख्य, रथ-मुख्य तथा प्रदेष्टा8000 पण वार्षिक