Solution:'भामहः च क्षेमेन्द्रः' काव्यशास्त्रप्रणेतारौ आचार्यौ स्तः। भामह, क्षेमेन्द्र काव्य शास्त्री आचार्यों में से हैं।
भामह- आचार्य भामह संस्कृत भाषा के सुप्रसिद्ध आचार्य थे। उनका काल निर्णय भी अन्य पूर्ववर्ती आचार्यों की तरह विवादपूर्ण है। परन्तु अनेक प्रमाणों से यह सिद्ध होता है
कि भामह 300 ई से 600 ई. के मध्य हुये हैं। आचार्य भरतमुनि के बाद प्रथम आचार्य भामह ही हैं। काव्यशास्त्र पर काव्यालङ्कार नामक ग्रन्थ उपलब्ध होता है इन्हें अलङ्कार सम्प्रदाय का जनक कहते हैं। "शब्दार्थी सहितौ काव्यम्” यह इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य की परिभाषा है।
क्षेमेन्द्र- (जन्म लगभग 1025-1066) संस्कृत के प्रतिभासम्पन्न काश्मीरी महाकवि थे। ये विद्वान ब्राह्मणकुल में उत्पन्न हुए थे। ये सिन्धु के प्रपौत्र, निम्नाशय के पौत्र और प्रकाशेन्द्र के पुत्र थे। इन्होंने प्रसिद्ध आलोचक तथा तन्त्रशास्त्र के मर्मज्ञ विद्वान् अभिनवगुप्त से साहित्यशास्त्र का अध्ययन किया था। इनके पुत्र सोमेन्द्र ने पिता की रचना बोधिसत्त्वावदानकल्पलता को एक नया पल्लव (कथा) जोड़कर पूरा किया था।
रचनाएँ- रामायणमञ्जरी, भारतमञ्जरी, बृहत्कथामञ्जरी ।