Solution:बुद्धचरिते सर्गप्राथम्येन क्रमशः - संवेग उत्पत्तिः, स्त्री निवारणं, अभिनिष्क्रमणम्, तपोवनप्रवेशः, अन्तःपुरविलाप सर्गाणामुचितमुत्तरं समुचितं विकल्पं अस्ति। 'बुद्धचरितम्' महाकाव्य है। इसके रचयिता अश्वघोष हैं। इनका रचनाकाल दूसरी शताब्दी है। इसमें गौतम बुद्ध का जीवनचरित वर्णित है। बुद्धचरित 28 सर्गो से युक्त है।
जिसमें 14 सर्गो तक बुद्ध के जन्म से बुद्धत्व प्राप्ति तक का वर्णन किया गया है। 28 सर्गों में विरचित इस महाकाव्य के दूसरे सर्ग से लेकर तेरहवें सर्ग तक पूर्ण रूप से तथा पहला एवं चौदहवें सर्ग के कुछ अंश ही मिलते हैं।
बुद्धचरितं के 28 सर्गों में प्रथम सर्ग से तेरह सर्गों तक के नाम इस प्रकार हैं- (1) भगवत्रसूति, (2) अन्तः पुरविहार, (3) संवेगोत्पत्ति, (4) स्त्रीविघातन, (5) अभिनिष्क्रमण, (6) छन्दक निवर्तनम् (7) तपोवनप्रवेशम्, (8) अन्तः पुरविलाप, (9) कुमारान्वेषणम्, (10) श्रेणभिगमनम् (11) काम विगर्हणम्, (12) आराडदर्शन, (13) मार विजय