Solution:याज्ञवल्क्यस्मृतेः व्यवहाराध्यायस्य प्रकरणे 'उपनिधिप्रकरणम्, साहसप्रकरणम् स्तः । अर्थात् याज्ञवल्क्यस्मृति के व्यवहाराध्याय के प्रकरण में उपनिधिप्रकरण तथा साहसप्रकरण का वर्णन मिलता है। याज्ञवल्क्यस्मृति धर्मशास्त्र परम्परा का एक हिन्दू धर्मशास्त्रीय ग्रन्थ है।
याज्ञवल्क्य स्मृति का 'विषय निरूपण पद्धति अत्यन्त सुगठित है। इस पर विरचित मिताक्षरा टीका हिन्दू धर्मशास्त्र के विषय में भारतीय न्यायालयों में प्रमाण मानी जाती रही है।
व्यवहाराध्याय में पच्चीस प्रकरण हैं- साधाराव्यवहारमातृका, असाधाराव्यवहारमातृका, ऋणादान, उपनिधि, साक्षि, लेख्य, दिव्य, दायविभाग, सीमाविवाद, स्वामिपालविवाद, अस्वामिविक्रय, दत्ताप्रदानिक, क्रीटानुशया, अभ्युपेत्याशुश्रूषा, संविद्यव्यतिक्रम, वेतनादान, धूतसमाहवय, वाक्पारुष्य, साहस, विक्रीयासम्प्रदान, सम्भूयसमुत्थान, स्तेय, स्त्रीसंग्रहण, प्रकीर्णक, दण्डपारुष्य