Solution:संयोगानन्तरं पञ्चसन्निकर्षाणामयं क्रमः तर्कभाषायामुपलभ्यते - संयुक्तसमवायः, संयुक्तसमवेतसमवायः, समवायः, समवेतसमवायः, विशेषणविशेष्यभावः, समुचितं विकल्पं अस्ति। इन्द्रिय तथा अर्थ का जो सन्निकर्ष है
वह प्रत्यक्ष ज्ञान (साक्षात्कारिणी प्रमा) का निमित्त होता है, वह 6 (छः) प्रकार से होता है, जैसे- (i) संयोग, (ii) संयुक्तसमवाय (iii) संयुक्तसमवेत समवाय (iv) समवाय (v) समवेतसमवाय (vi) विशेषणविशेष्यभाव ।
इन 6 (छः) प्रकार के सन्निकर्षों में सर्वप्रथम संयोग का ग्रहण इसलिए किया गया है, क्योंकि द्रव्य के साथ इन्द्रिय का संयोग सन्निकर्ष होता है। और समस्त पदार्थों का आश्रय होने के कारण द्रव्य ही प्रधान है।
संयोग के अनन्तर पाँच सन्निकर्षों में सर्वप्रथम संयुक्त समवाय का ग्रहण किया गया है। उसके अनन्तर गुण आदि में रहने वाली सामान्य के सन्निकर्ष (संयुक्त समवेत समवाय) का ग्रहण किया गया है। तृतीय स्थान पर समवाय सन्निकर्ष का ग्रहण है,
क्योंकि समवाय भाव पदार्थों का धर्म है। फिर समवेत समवाय सन्निकर्ष का ग्रहण है, क्योंकि वह समवेत पदार्थ में समवाय से स्थित सामान्य का ग्राहक है। तदनन्तर विशेषणविशेष्यभाव सन्निकर्ष को रखा गया है। क्योंकि वह समवाय आदि का ग्राहक है।
मुख्य रूप से संयोग तथा समवाय दो ही सम्बन्ध हैं, इन दोनों में ही सम्बन्ध का लक्षण घटित होता है अन्य सन्निकर्षों का गौण रूप से सम्बन्ध कहा जाता है। क्योंकि इनका सम्बन्ध किसी न किसी रूप में दोनों सम्बन्धों से रहा करता है। अतः समुचित विकल्प (d) है।