Solution:'स एकस्त्रीणि जयति जगन्ति कुसुमायुधः । हरताऽपि तनुं यस्य शंभुना न हृतं बलम्।। इत्यस्मिन् पद्ये 'विशेषोक्तिः' अलङ्कारो वर्तते। इस पद्य में विशेषोक्ति अलङ्कार है।
लक्षण - 'विशेषोक्तिरखण्डेषु कारणेषु फलावचः ।।' (काव्यप्रकाश) 'सति हेतौ फलाभावे विशेषोक्तिस्तथा द्विधा।।' (साहित्य दर्पण) हेतु अर्थात् कारण के होते हुए भी फलाभिव्यक्ति न होने पर विशेषोक्ति अलङ्कार होता है विशेषोक्ति भी विभावना की ही तरह दो प्रकार की होती है
उक्तिनिमित्ता तथा अनुक्तनिमित्ता। आचार्य विश्वनाथ ने मम्मट द्वारा स्वीकृत 'अचिन्त्यनिमित्ता' नामक विशेषोक्ति के तृतीय भेद को 'अनुक्तनिमित्ता' में ही अन्तर्भूत माना है।
स एकस्त्रीणि---------------बलम् ।
यह अचिन्त्यनिमित्ता विशेषोक्ति अलङ्कार का उदाहरण है।
तुल्ययोगिता- 'नियतानां समृद्धर्मः सा पुनस्तुल्ययोगिता।' (काव्यप्रकाश)
निदर्शना- 'सम्भवन् वस्तुसम्बन्धोऽसम्भवन्वाऽपि कुत्रचित् ।
अभवन् वस्तुसम्बन्धः उपमापरिकल्पकः निदर्शना ।।' (काव्यप्रकाश)
विभावना- 'क्रियायाः प्रतिषेधेऽपि फलव्यक्तिर्विभावना।'
(काव्यप्रकाश)