यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021 जून 2022 (संस्कृत)

Total Questions: 100

21. अधोलिखितेषु कः ध्वनिः स्पर्शवर्गे नास्ति?

Correct Answer: (b) स्
Solution:

उपरिलिखितेषु 'स' ध्वनि स्पर्शवर्गे नास्ति अर्थात् स स्पर्श वर्ण की ध्वनि नहीं है जब अन्य तीनों क, त्, प् स्पर्श वर्ण की ध्वनि हैं।
इन वर्णों को स्पर्श व्यञ्जन कहते हैं।
स्पर्श ध्वनियाँ हैं-

वर्ग/ध्वनि का प्रकारवर्ण
क वर्गक् ख् ग् घ् ङ्
च वर्गच् छ् ज् झ् ञ्
ट वर्गट् ठ् ड् ढ् ण्
त वर्गत् थ् द् ध् न्
प वर्गप् फ् ब् भ् म्
ऊष्म ध्वनियाँश् ष् स् ह
अन्तस्थ ध्वनियाँय् व् र् ल्

22. 'यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते..... इतीयं श्रुतिः विषयवाक्यम् अस्ति-

Correct Answer: (a) जन्माद्यधिकरणस्य
Solution:

'यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते जन्माद्यधिकरणस्य' इतीयं श्रुतिः विषयवाक्यम् अस्ति।
यह सूक्ति तैत्तिरीयोपनिषद् (3/1) से लिया गया है। यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते येन जातानि जीवन्ति । यत्प्रयत्नयभिसंविशन्ति, तद्विजिज्ञासस्व तद् ब्रह्मति ।।

ये सब प्रत्यक्ष दिखने वाले प्राणी जिससे उत्पन्न होते हैं, उत्पन्न होकर जिसके सहारे जीवित रहते हैं तथा अन्त में इस लोक से प्रयाण करते हुए जिसमें प्रवेश करते हैं, उसको तत्व से जानने की इच्छा कर, वही ब्रह्म है।

23. अभावविषयकप्रत्यक्षप्रमायां चक्षुररिन्द्रियस्य अभावपदार्थस्य च मध्ये सन्निकर्षः-

Correct Answer: (d) विशेषणविशेष्यभावः
Solution:

अभावविषयकप्रत्यक्षप्रमायां चक्षुरिन्द्रियस्य अभावपदार्थस्य च मध्ये सन्निकर्षः विशेषणविशेष्य भावः।
यथा चक्षुषा संयुक्ते भूतले घटाभावो गृह्यते 'इह भूतले घटो नास्ति' इति तदा विशेष्यविशेषण भाव सम्बन्धः। अर्थात् जब चक्षु से संयुक्त भूमि पर 'यहाँ भूतल पर घट नहीं है'

इस प्रकार घट के अभाव का ग्रहण होता है तब विशेष्य विशेषण भाव सन्निकर्ष हुआ करता है। इन्द्रियार्थस्तु यः सत्रिकर्षः साक्षात्कारिक प्रमा हेतुः स षड्वधः एव।
1. संयोगः  2. संयुक्तसमवायः 3. संयुक्त समवेतसमवायः 4. समवायः 5. समवेत समवाय 6. विशेषण विशेष्यभावः

24. ऋक्प्रातिशाख्यानुसारेण 'रक्तसंज्ञा' कस्य भवति?

Correct Answer: (a) अनुनासिकस्य
Solution:

ऋक्प्रातिशाख्यानुसारेण 'अनुनासिकस्य' रक्तसंज्ञा भवति अर्थात् ऋप्रातिशाख्य के अनुसार अनुनासिक वर्ण (ञ् म् ण् न् रक्त संज्ञक कहलाते हैं।
रक्त संज्ञक कहलाते हैं।
'रक्तसंज्ञोऽनुनासिकः'। अनुनासिक वर्ण रक्तसंज्ञक हैं। स्वरभक्ति दो प्रकार की होती है- 1. दीर्घस्वर भक्ति 2. ह्रस्व स्वर भक्ति

यदि एक ही 'ऊष्म' वर्ण के परे हो तो 'स्वर भक्ति' दीर्घ होती है। और यदि द्वित्व प्राप्त 'ऊष्म' वर्ण के परे हो तो 'स्वरभक्ति' ह्रस्व होती है।

25. ऋणादाने वृद्धिः कतिविधा ?

Correct Answer: (c) चतुर्विधा
Solution:

ऋणादाने वृद्धिः चतुर्विधः। अर्थात् ऋणादान में वृद्धि चार प्रकार की होती है।
अशीतिभागो वृद्धिः स्यान्मासि मासि सम्बन्धके।
वर्णक्रमाच्छतं द्वित्रिचतुष्पञ्चकमन्यथा ।।37।।
अर्थ- बन्धक रखे हुए धन पर उसका अस्सीव भाग प्रत्येक मास में ब्याज होता है। अन्यथा (बन्धक न होने पर) वर्ण के अनुसार (ब्राह्मण आदि से क्रमशः) दो, तीन, चार और पाँच प्रतिशत ब्याज लेना चाहिए।
अतः विकल्प (c) सही है।

26. अधोलिखिततेषु वर्णेषु कौ सोष्माणौ स्तः?

(A) क् (B) ख (C) न् (D) ढ,
समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (d) (B) एवम् (D)
Solution:

उपरिलिखितेषु वर्णेषु ख्, ढ् सोष्मवर्णी स्तः । अर्थात उपर्युक्त वर्णों में ख् और ढ् सोस्म वर्ण हैं।
द्वितीय चतुर्थी वर्णी सोष्म वर्णी वेदितव्यो ।
वर्गों के द्वितीय और चतुर्थ वर्ण सोष्म वर्ण कहलाते हैं।
जैसे- ख, घ,छ, झ, ठ, ढ, थ, ध, फ, भ।
अतः विकल्प (d) सही है।

27. 'ओदनं भुञ्जानो विषं भुङ्क्ते' इत्यस्मिन् वाक्ये 'विषम्' इति पदे द्वितीयाविभक्तिः केन सूत्रेण भवति?

Correct Answer: (c) कर्मणि द्वितीया
Solution:

'ओदनं भुञ्जनो विषं भुङ्क्ते' इत्यस्मिन् वाक्ये 'विषम् इति पदे द्वितीया विभक्ति 'कर्मणि द्वितीया' सूत्रेण भवति । अर्थात् इस वाक्य में 'विष' इस पद में द्वितीया विभक्ति का विधान 'कर्मणि द्वितीया' सूत्र से होती है।

'ओदनं भुजानो विषं भुक्ते वाक्य में ओदनं मुख्य कर्म है और 'विष' गौण कर्म है अतः मुख्य कर्म में कर्तुरीप्सिततमं कर्म सूत्र से 'ओदन' की कर्मसंज्ञा तथा 'विष में तथायुक्तं चानीप्सितं सूत्र से कर्म संज्ञा तथा दोनो में 'कर्मणि द्वितीया' सूत्र से द्वितीया का विधान होता है।

अतः विकल्प (c) सही है।

28. ध्वनेः प्रकारद्वयं भर्तृहरिमते किम्?

(A) आहार्यम् (B) वैकृतः (C) संस्कृतः (D) प्राकृतः
समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (a) (B) एवम् (D)
Solution:

ध्वनेः प्रकारद्वयं भर्तृहरिमते वैकृतः प्राकृतः स्तः । अर्थात् भर्तृहरि के मत में ध्वनि के दो प्रकार वैकृत और प्राकृत हैं।

29. अधोलिखितेषु कः सामवेदस्य सप्तस्वरेषु न परिगण्यते ?

Correct Answer: (c) उत्तमः
Solution:

उपरिलिखितेषु उत्तमः सामवेदस्य सप्तस्वरेषु न परिगण्यते। अर्थात् सामवेद के सप्तस्वरों में उत्तम स्वर की गणना नहीं की जाती है जबकि ऋषभः, पञ्चमः, मध्यमः सप्तस्वरों की उत्पत्ति के बारे में कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है।

ऐसा माना जाता है कि वे किसी एक व्यक्ति या सभ्यता का काम होने के बजाय समय के माध्यम से विकसित हुए हैं। हिन्दू धर्म की सबसे पुरानी पवित्र पुस्तकों में से एक सामवेद, सप्तस्वरों का पहला उल्लेख करता है। सामवेद के अनुसार सप्त स्वर 'सात स्वर के पैमाने' हैं।
सामवेद के 7 सप्त स्वर

क्र. सं.नामसंक्षिप्त रूप
1.षड्जसा
2.ऋषभरे
3.गांधारगा
4.पञ्चमपा
5.धैवतधा
6.मध्यममा
7.निषादनी

30. साम्ना दानेन भेदेन समस्तैरथवा पृथक्। विजेतुं प्रयतेताऽरीन् न युद्धेन कदाचन।।

इति श्लोकः कस्माद ग्रन्थात्?  

Correct Answer: (d) मनुस्मृतेः
Solution:

साम्ना दानेन भेदेन समस्तैरथवा पृथक्।
विजेतुं प्रयतेताऽरीन् न युद्धेन कदाचन।।
इति श्लोकः मनुस्मृतेः ग्रन्थात्।
अर्थात् 'साम' से 'दाम' से इन सब उपायों से एक साथ अथवा अलग-अलग एक-एक से शत्रुओं को जीतने का प्रयत्न करें, कभी पहले युद्ध से जीतने का यत्न न करें। यह श्लोक मनुस्मृति ग्रन्थ से अवतरित है।