Solution:समुचितं मेलनं कुरुत-
| सूची-I (ग्रन्थ) | सूची-II (रचयिता) |
| (A) उणादिकोषः | पाणिनिः |
| (B) प्रौढमनोरमा | भट्टोजिदीक्षितः |
| (C) महाभाष्यदीपिका | भर्तृहरिः |
| (D) हेमशब्दानुशासनम् | हेमचन्द्रः |
उणादिकोषः- उणादिकोष पाणिनि के पाँच उपदेशों का एक भाग है। यह व्याकरणिक ग्रन्थ है। आचार्य पाणिनि के 5 उपदेश इस प्रकार है-
1. अष्टाध्यायी, 2. धातुपाठ, 3. गणपाठ, 4. उणादिकोष, 5. लिङ्गानुशासनम्
प्रौढ़मनोरमा - भट्टोजि दीक्षित 17वीं शताब्दी में उत्पन्न संस्कृत वैयाकरण थे जिन्होंने सिद्धान्त कौमुदी की रचना की। इस ग्रन्थ पर उन्होंने स्वयं प्रौढ़मनोरमा टीका लिखी। पाणिनीय सूत्रों पर अष्टाध्यायी क्रम से एक अपूर्ण व्याख्या शब्दकौस्तुभ तथा वैयाकरणभूषण कारिका भी इनके ग्रन्थ हैं। इनकी सिद्धान्त कौमुदी लोकप्रिय है।
महाभाष्यदीपिका- यह आचार्य भर्तृहरि की महाभाष्य पर विस्तृत तथा प्रौढ़ व्याख्या है। अनेक उद्धरणों से अनुमान होता है कि उन्होंने पूरे महाभाष्य पर दीपिका नामक टीका लिखी।
हेमशब्दानुशासनम्- आचार्य हेमचन्द्र ने समस्त व्याकरण वाङ्मय का अनुशीलन कर शब्दानुशासन एवं अन्य व्याकरण ग्रन्थों की रचना की।