Solution:उपरिलिखितेषु मीमांसादर्शनस्य आचार्यो शबरस्वामी, गदाधरः न स्तः अर्थात् उपरिलिखित मीमांसादर्शन के आचार्य शबरस्वामी और गदाधर नहीं है। जबकि अन्य दोनों विकल्प मुरारिमिश्र और जगदीश मीमांसादर्शन के आचार्य हैं।
मीमांसा या पूर्वमीमांसा दर्शन हिन्दुओं के छः दर्शनों में से एक है जिसमें वेद के यज्ञपरक वचनों की व्याख्या की गयी है। इसके प्रणेता आचार्य जैमिनि हैं।
मीमांसा का तत्व सिद्धान्त विलक्षण है। इसकी गणना अनीश्वरवादी दर्शनों में से एक है। मीमांसा दर्शन में छः प्रमाण स्वीकार किये जाते हैं- प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति और अनुपलब्धि ।
जैमिनि-सूत्रों पर शबर स्वामी का विशद् भाष्य है जिसे शबरभाष्य कहते हैं। प्रभाकर और कुमारिल के समान ही मुरारि मिश्र ने मीमांसा के क्षेत्र में एक नये मत का प्रतिपादन किया जिसे मुरारिमत कहते हैं। इनके ग्रन्थ क्रमशः इस प्रकार हैं-
(i) त्रिपादी (ii) नीतिनयन (iii)एकादशाध्यायाधिकरण