Solution:ऋग्वेदादिक्रमेण ब्राह्मणनामानि -
(A) कौषीतकीब्राह्मणम् (B) सामविधानब्राह्मणम्
(C) तैत्तिरीयब्राह्मणम् (D) गोपथब्राह्मणम्
शांखायन ब्राह्मण को कोषीतकि ब्राह्मण भी कहते हैं। इसमें 30 अध्याय हैं। इसमें अग्न्याधान, अग्निहोत्र, दर्शपौर्णमास और चातुर्मास्य इष्टियों का वर्णन है। इसमें भी सोमयाग प्रधान विषय है।
तैत्तिरीय ब्राह्मण- यह कृष्णयजुर्वेदीय शाखा का एकमात्र ब्राह्मण है। इसमें 3 काण्ड हैं। इसमें काण्ड 1 में अग्न्याधान, वाजपेय, सोम, राजसूय आदि काण्ड 2 में सौत्रामणि, बृहस्पतिसव और वैश्यसव आदि काण्ड 3 में नक्षत्रेष्टि का मुख्य रूप से वर्णन है।
सामविधान- सामविधान ब्राह्मण में 3 प्रकरण हैं। जिनमें कृच्छु अतिकृच्छ आदि व्रतों, पुत्र, ऐश्वर्य एवं आयुष्य की प्राप्ति के लिए विविध अनुष्ठानों का वर्णन है।
गोपथ ब्राह्मणः- यह अथर्ववेद का एकमात्र ब्राह्मण है। इसके दो भाग है-
(i) पूर्व भाग या पूर्व गोपथ
(ii) उत्तरभाग उत्तर गोपथ ।
प्रथम में 5 प्रपाठक या अध्याय हैं, द्वितीय में 6 प्रपाठक। इसके रचयिता गोपथ ऋषि माने जाते हैं।