यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021 जून 2022 (संस्कृत)

Total Questions: 100

61. 'षड्+ सन्तः षट्सन्तः' इत्यत्र कः आगमो भवति ?

Correct Answer: (a) धुट्
Solution:

'षड् + सन्तः = षट्त्सन्तः' इत्यत्र धुद् आगमो भवति।
षट्त्सन्तः में धुद् का आगम होता है। ड: सि धुट् (8/3/29) ड् के बाद स हो तो बीच में विकल्प से धुद् (धु) का आगम हो जाता है। षट्त्सन्तः, षट्सन्तः (सज्जन)- षड् + सन्तः। बीच में धु, खरि च से धु को त् और ड् को ट्। पक्ष में खरि च से ड् को ट्।

62. अधोलिखितं कथनद्वयम् आश्रित्य समुचितम् उत्तरं चिनुत

कथनम् (I)  उत्पत्तिविधी कर्मणः करणत्वेन अन्वयः।
कथनम् (II) उत्पत्तिविधौ कर्मणः साध्यत्वेन अन्वयः ।
यथोचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (c) (I) सत्यं परन्तु (II) असत्यम्
Solution:

अधोलिखितं कथनद्वयमाश्रित्य समुचितमुत्तरं चिनुत-
यथोचितं विकल्पं । उत्पत्तिविधौ कर्मणः करणत्वेन अन्वयः कथनं सत्यम् अस्ति ।
उत्पत्तिविधौ कर्मणः साध्यत्वेन अन्वयः असत्यं विकल्पं अस्ति ।
उत्पत्ति विधि- उत्पत्ति विधि किसी कार्य की प्रकृति का वर्णन करती है। उदाहरणार्थ- 'अग्निहोत्रं जुहोति' उसे अग्निहोत्र होम द्वारा यज्ञ करना चाहिए।

यहाँ कार्य अग्निहोत्र अभीष्ट वस्तु के साधन के रूप में निषेधाज्ञा से सम्बन्धित है। इसका तात्पर्य यह है कि अग्निहोत्र होम करने से व्यक्ति को अपनी इच्छित वस्तु प्राप्त करनी चाहिए।

63. पाणिनिः यप्रत्यये विदधाति-

(A) कौटिल्येऽर्थे  (B) भावगर्हायाम् अर्थे (C) इच्छायाम् अर्थ (D) वेदनायाम् अर्थ
समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) (A) एवम् (B)
Solution:

पाणिनिः यत्यये विदधाति-
(A) कौटिल्येऽर्थे (B) भावगर्हायाम् अर्थे

64. 'शिव + छाया = शिवच्छाया' इत्यत्र प्रवृत्तानाम् अधोलिखितसूत्राणाम् उचितमनुक्रमं चिनुत

(A) खरि च (B) छे च (C) झलां जशोऽन्ते (D) स्तोः श्चुना श्चुः
समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (c) (B), (C), (D), (A)
Solution:

शिव छाया 'शिवच्छाया' इत्यत्र प्रवृत्तानाम्
उपरिलिखित सूत्राणाम् उचित् क्रमः
(i) छे च (ii) झलां जशोऽन्ते (iii) स्तोः श्चुनाश्चुः (iv) खरि च। छे च यदि हस्व स्वर के बाद 'छ' हो तो उस हस्व स्वर को तुक् (त्) का आगम होता है।

यहाँ पर शिव के व में हस्व 'अ' है और हस्व 'अ' के बाद छाया का 'छ' है अतः 'छे च' सूत्र से 'अ' को तुक् का आगम हुआ। तुक् के क् की 'हलन्त्यम्' सूत्र से इत्सज्ञा हुई

और 'तस्य लोपः' से लोप हुआ और 'तु' के उ की 'उपदेशेऽजनुनासिक इतः' सूत्र से इत्संज्ञा हुई और 'तस्यलोपः' से लोप हुआ। इस प्रकार तुक् का त् शेष बचता है।

त् कित् है अतः 'आद्यन्तौट कितौ' सूत्र से शिव के वकारोत्तरवर्ती अ के बाद में होकर शिवत् छाया बना। 'स्तोः श्चुना श्चुः' सूत्र से 'त्' के बाद छाया के 'छ' आने पर त् को च होकर शिवच्छाया बना।

65. औचित्य भेदौ स्तः-

(A) अभिप्रायः स्वभावश्च  (B) कालः देशश्च (C) ध्वनिः रीतिश्च (D) पदे वर्णश्च
समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (d) (A) एवम् (B)
Solution:

औचित्य भेदौ स्तः
(i) अभिप्रायः स्वभावश्च (ii)कालः देशश्च ।
आचार्य क्षेमेन्द्र ने अपने ग्रन्थ 'औचित्य विचार चर्चा में औचित्य के 27 भेदों का निरूपण किया है किन्तु काव्य के प्रत्येक अङ्ग में औचित्य के व्याप्त होने के कारण उसके अनेक भेद हो सकते हैं- औचित्य के भेद-

1. पद2. वाक्य3. प्रबन्ध
4. गुण5. अलङ्कार6. रस
7. क्रिया8. कारक9. लिङ्ग
10. वचन11. विशेषण12. उपसर्ग
13. निपात14. देश15. काल
16. कुल17. व्रत18. तत्व
19. सत्व20. अभिप्राय21. विभाव
22. सारसंग्रह23. प्रतिभा24. विचार
25. नाम26. आशीर्वाद्वचन27. प्रत्यय

66. 'चैतन्यं पुरुषस्य स्वरूपम्', 'प्रतिषिद्धिवस्तुधर्मा निष्क्रियः पुरुषः' 'तिष्ठति वाणः'- इत्यादिकम् उदाहरणम् अस्ति-

Correct Answer: (c) विकल्पवृत्तेः
Solution:

'चैतन्यं पुरुषस्य स्वरूपम्' प्रतिषिद्धवस्तुधर्मा निष्क्रियः पुरुषः 'तिष्ठति बाणः' इत्यादि उदाहरण विकल्पवृत्ति का है। यह पुरुष शरीर, बुद्धि, इन्द्रियाँ अहङ्कार, मन से भिन्न या विलक्षण है। पुरुष चैतन्य स्वरूप है। चैतन्य उसका स्वरूप है। वह परम् विशुद्ध परात्पर चैतन्य है, आत्मतत्व है।

किसी वस्तु के उपस्थित न रहते हुए भी शब्द ज्ञान मात्र से उत्पन्न चित्तवृत्ति को विकल्प कहते हैं।
शब्द ज्ञानानुपाती वस्तुशून्यो विकल्पः ।
अर्थात् वस्तु के न रहते हुए शब्द ज्ञानमात्र से उत्पन्न चित्त वृत्ति को 'विकल्प' कहते हैं।

67. बौद्धदर्शनस्य आचार्यद्वयम् अस्ति-

(A) उमास्वातिः (B) उदयनः (C) असङ्गः (D) धर्मकीर्तिः
समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (b) (C) एवम् (D)
Solution:

बौद्धदर्शनस्य आचार्यद्वयम् असङ्ग धर्मकीर्तिश्च स्तः आचार्य असङ्ग बौद्ध दर्शन के योगाचार अर्थात् विज्ञानवाद प्रस्थान के प्रवर्तक हैं। इनकी शैली की शैली आगमों की तरह है और उन्होंने युक्ति से अधिक आगमों का आश्रय लिया है।

धर्मकीर्ति और धर्मपाल ईश्वरसेन के शिष्य थे। बौद्ध न्याय की जिस परम्परा का प्रारम्भ मैत्रेयनाथ, असङ्ग और वसुबन्धु की कृतियों से हुआ था, उसे आचार्य दिङ्कनाग ने अपनी कृतियों में वाद विधि से पृथक तर्कशास्त्र या हेतुशास्त्र के रूप में विकसित किया था

आगे चलकर दिनाग द्वारा प्रवर्तित इस तर्क विद्या को धर्मपाल एवं ईश्वरसेन के शिष्य धर्मकीर्ति ने (बौद्ध न्याय को) 'प्रमाणशास्त्र' के रूप में विकसित किया।

68. वर्नरनियमेन मूलभारोपीयभाषायाः क्, त्, प् इत्येते ध्वनयः जर्मनिक - भाषासु ह, थ्, फ् इति कस्यां स्थितौ जायन्ते?

Correct Answer: (a) यदा तेभ्यः ध्वनिभ्यः अव्यवहितपूर्वम् उदात्तस्वरः भवति ।
Solution:

→ वर्नर ने यह पता लगाया कि ग्रिम नियम बलाघात पर आधारित था।
→ मूल भाषा के क्, त्, प् के पूर्व यदि बलाघात हो तो ग्रिम नियम के अनुसार मूलभारोपीय भाषा का घोषाल्प प्राणध्वनि और जर्मनिक भाषाओं में अघोष महाप्राण ध्वनियों में परिवर्तित हो जाती है।

मूलभारोपीय परिवार की भाषा की ध्वनियाँभारोपीय जर्मनिक भाषा में
(i)सघोष महाप्राणस्पर्श (घ्, ध्, भ्,)सघोष अल्पप्राण स्पर्श ध्वनि (ग्, द्, ब्)
(ii)सघोष अल्पप्राण ध्वनि (ग्, द्, ब्)अघोष अल्पप्राणस्पर्श ध्वनि (क्, त्, प्)
(iii)अघोष अल्पप्राण स्पर्श ध्वनियाँ (क्, त्, प्)अघोष महाप्राणस्पर्श ख्, (ह), थ्, फ्।

69. अधोलिखितानां काव्यलक्षणानां पूर्वापरक्रमं नियोजयत-

(A) शब्दार्थी काव्यम्
(B) रमणीयार्थप्रतिपादकः शब्दः काव्यम्
(C) तददोषौ शब्दार्थी सगुणावनलङ्कृति पुनः क्वापि
(D) सहृदयहृदयाहादि शब्दार्थमयत्वमेव काव्यलक्षणम्
समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (d) (A), (D), (C), (B)
Solution:

उपरिलिखितानां काव्यलक्षणानां पूर्वा परक्रमं नियोजयत-
(A) शब्दार्थी काव्यम् (D) सहृदयहृदयाह्लादि शब्दार्थमयत्वमेव काव्यलक्षणम - (C) तददोषौ शब्दार्थी सगुणावनलङ्कृति पुनः क्वापि (B) रमणीयार्थप्रतिपादकः शब्दः काव्यम्।

70. निरुक्ते प्रतिपादितान् भावविकारान् क्रमेण नियोजयत-

(A) अस्ति (B) वर्धते (C) जायते (D) अपक्षीयते (E) विपरिणमते
समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (c) (C), (A), (E), (B), (D)
Solution:

आचार्य यास्क के निरुक्त में छः भावविकारों का उल्लेख किये हैं जिनका क्रम इस प्रकार हैं-
(1) जायते- कोई वस्तु उत्पन्न होती है।
(2) आस्ति- उसकी सत्ता होती है।
(3) विपरिणमते- उसमें परिवर्तन होता है।
(4) वर्धते- वह वृद्धि को प्राप्त होती है।
(5) अपक्षीयते- वह क्षीण होता है।
(6) विनश्यति - विनाश को भी प्राप्त होता है।
अतः विकल्प (c)सही है।