Solution:शिव छाया 'शिवच्छाया' इत्यत्र प्रवृत्तानाम्
उपरिलिखित सूत्राणाम् उचित् क्रमः
(i) छे च (ii) झलां जशोऽन्ते (iii) स्तोः श्चुनाश्चुः (iv) खरि च। छे च यदि हस्व स्वर के बाद 'छ' हो तो उस हस्व स्वर को तुक् (त्) का आगम होता है।
यहाँ पर शिव के व में हस्व 'अ' है और हस्व 'अ' के बाद छाया का 'छ' है अतः 'छे च' सूत्र से 'अ' को तुक् का आगम हुआ। तुक् के क् की 'हलन्त्यम्' सूत्र से इत्सज्ञा हुई
और 'तस्य लोपः' से लोप हुआ और 'तु' के उ की 'उपदेशेऽजनुनासिक इतः' सूत्र से इत्संज्ञा हुई और 'तस्यलोपः' से लोप हुआ। इस प्रकार तुक् का त् शेष बचता है।
त् कित् है अतः 'आद्यन्तौट कितौ' सूत्र से शिव के वकारोत्तरवर्ती अ के बाद में होकर शिवत् छाया बना। 'स्तोः श्चुना श्चुः' सूत्र से 'त्' के बाद छाया के 'छ' आने पर त् को च होकर शिवच्छाया बना।