यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021 जून 2022 (संस्कृत)

Total Questions: 100

71. 'तस्य परमाणु समवायिकारणम्, तत्संयोगः असमवायिकारणम्, अदृष्टादि निमित्तं कारणम्' - अत्र 'तस्य' इति पदेन परामर्शः भवति-

Correct Answer: (c) द्वयणुकस्य
Solution:

'तस्य परमाणु समवायिकारणम्, तत्संयोगः असमवायिकारणम्, अदृष्टादि निमित्त कारणम्' अत्र 'तस्य' इति पदेन परामर्शः द्वयणुकस्य भवति ।

अर्थात् उस द्वयणुक का परमाणु समवायिकारण है, उसका संयोग असमवायि कारण है तथा उस द्वयणुओं का दिखाई न देना निमित्त कारण है। अतः यहाँ तस्य पद से द्वयणुक का परामर्श होता है।

72. 'घनश्यामः' इत्यत्र समासविधायकं सूत्रं वर्तते-

Correct Answer: (d) मयूरव्यंसकादयश्च
Solution:

'घनश्यामः' इत्यत्र समासविधायकं सूत्रं 'उपमानानि सामान्यवचनैः' वर्तते । अर्थात् 'घनश्यामः' इस पद का समास विधायक सूत्र 'उपमानानि सामान्यवचनैः' है।

उपमान शब्द पूर्व में और उपमेय पद उत्तर में प्रयुक्त होता है तो उपमान पूर्वपद कर्मधारय समास होता है। 'घनश्यामः' में घन उपमान है, श्यामः उपमेय अतः इसका अर्थ हुआ बादल के समान काला।
(1) विशेषण विशेष्येण बहुलम् - नीलोत्पलम्, कृष्णसर्पः ।
(2) उपमितं व्याघ्रादिभिः सामान्यप्रयोगे पुरुषव्याघ्रः मुखकमलम्।
(3) मयूरव्यंसकादयश्च- मयूरव्यंसकः, राजान्तरम् आदि।

73. यथोचित मेलनं कुरुत-

सूची-Iसूची-II
(A) भुङ्क्ते(I) व्यक्तवाचां समुच्चारणे
(B) भुनक्ति(II) अभ्यवहारे
(C) सम्प्रवदन्ते(III) पालनार्थे
(D) सम्प्रवदन्ति(IV) अव्यक्तवाचां समुच्चारणे

समुचितं विकल्पं चिनुत-

विकल्पABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIVIII
(c)IVIIIIII
(d)IIIIIIIV
Correct Answer: (d)
Solution:उचित सम्मेलन यह है-
सूची-Iसूची-II
(A) भुङ्क्तेअभ्यवहारे
(B) भुनक्तिपालनार्थे
(C) सम्प्रवदन्तेव्यक्तवाचां समुच्चारणे
(D) सम्प्रवदन्तिअव्यक्तवाचां समुच्चारणे

अतः विकल्प (d) सही है।

74. महाभारते 'भारतभावदीपः' इति टीका केन रचिता?

Correct Answer: (a) नीलकण्ठेन
Solution:

महाभारते 'भारतभावदीपः' इति टीका 'नीलकण्ठेन' रचिता । अर्थात् महाभारत पर भारतभावदीपः टीका नीलकण्ठ के द्वारा रचित है। देवबोध की 'ज्ञानदीपिका', विमल बोध की 'विषमश्लोकी या दुर्घटार्थ प्रकाशिनी' तथा नारायण भट्ट की 'निगूढार्थ पदबोधिनी' नाम से टीका की गयी है।

75. षट्कसम्पत्तिषु न स्तः-

(A) मुमुक्षत्वम्  (B) तितिक्षा (C) विषयः (D) उपरतिः
समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (e) (*)
Solution:

षट्कसम्पत्तिषु मुमुक्षुत्वम् विषयश्च एतौ द्वौ न अस्तः । अर्थात् षट्कसम्पत्तियों में मुमुक्षुत्व और विषय ये दो नहीं हैं। मुमुक्षुत्व, साधन, चतुष्टय और विषय अनुबन्धचतुष्टय के अन्तर्गत है। षट्‌कसम्पत्ति शम, दम, उपरति, तितिक्षा समाधान और श्रद्धा हैं।
नोट- इस प्रश्न को NTA ने विलोपित कर दिया है।

76. अधोलिखितं कथनद्वयम् आश्रित्य समुचितम् उत्तरं चिनुत

कथनम् (I) : सत्वं लघु प्रकाशकम्।
कथनम् (II): उपष्टम्भकं चलं च तमः।
यथोचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (c) (I) सत्यं परन्तु (II) असत्यम्
Solution:

उपरिलिखितं कथनद्वयम् आश्रित्य समुचितम् उत्तरं (I) सत्यं परन्तु (II) असत्यम् अस्ति। 'सत्वं लघु प्रकाशकम्' सत्व गुण हल्का तथा प्रकाशक होता है।

'उपष्टम्भकं चलं च रजः' रजोगुण चञ्चल तथा प्रेरक या उत्तेजक होता है। 'गुरुवरणकमेव तमः' तमोगुण भारी और अवरोधक होता है। ये तीनों गुण विपरीत होते हुए भी दीपक के समान व्यवहार करते हैं। 'प्रदीपवच्चार्थतो वृत्तिः'।

77. 'नृ + पाहि = नॄं = पाहि इत्यत्र प्रवृत्तानाम् अधोलिखितसूत्राणाम् उचितमनुक्रमं चिनुत-

(A) अत्रानुनासिकः पूर्वस्य तु वा
(B) नृन् पे
(C) विसर्जनीयस्य सः
(D) कृपवो: क पौ च
समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (d) (B), (A), (C), (D)
Solution:

'नृन् + पाहि = नॄं = पाहि इत्यत्र प्रवृत्तानाम् उपरिलिखितसूत्राणाम्
उचितमनुक्रमः 'नृन् पे अत्रानुनासिकः पूर्वस्य तु वा → विसर्जनीयस्य सेट सः → कुप्वोः क पौ च अस्ति।
नृन् + पाहि 'नृन् पे' सूत्र से नृन् के न् को विकल्प से रु होता है प् के परे होने पर रु पाहि (नृन् + पाहि)
'अत्रानुनासिकःपूर्वस्य तु वा' सूत्र से रु के पूर्ववर्ती वर्ण को विकल्प से अनुनासिक आगम हुआ रु + पाहि (नृन् + पाहि)
'अनुनासिकात्परोऽनुस्वारः' पक्ष में अनुस्वार हुआ नॄंरु + पाहि अनुबन्धलोप तथा खरवसानयोर्विसजनीयः
सूत्र से र को विसर्ग होकर नॄं:पाहि, नॄं:पाहि बना।
'कुष्वोः क पौ च' सूत्र से प्के परे होने पर विसर्ग को उपमानीय होकर नॄं पाहि, नॄं पाहि बना।

78. यथोचित मेलनं कुरुत

सूची-I (ग्रंथ)सूची-II (रचनाकार)
(A) पदमञ्जरी(I) नागेशभट्टः
(B) सारस्वतव्याकरणम्(II) हरदत्तमिश्रः
(C) शब्दकौस्तुभः(III) अनुभूतिस्वरूपाचार्यः
(D) बृहच्छब्देन्दुशेखरः(IV) भट्टोजिदीक्षितः

समुचितं विकल्पं चिनुत-

विकल्पABCD
(a)IIIVIIII
(b)IIIIIIVI
(c)IIVIIIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (b)
Solution:

यथोचित सम्मेलन है-

सूची-Iसूची-II
(A) पदमञ्जरीहरदत्तमिश्रः
(B) सारस्वतव्याकरणम्अनुभूतिस्वरूपाचार्यः
(C) शब्दकौस्तुभःभट्टोजिदीक्षितः
(D) बृहच्छब्देन्दुशेखरःनागेशभट्टः

अतः विकल्प (b) सही है। 

79. महाभारतस्य पर्वनामानि क्रमेण लिखत-

Correct Answer: (c) (A), (C), (D), (B)
Solution:

महाभारतस्य पर्वनामानि क्रमेण आदि पर्वः → सभापर्वः → वनपर्वः → विराटपर्वः सन्ति । अर्थात् महाभारत के पर्वों के नाम क्रम से (1) आदि पर्व (2) सभापर्व (3) वनपर्व (4) विराट पर्व हैं। महाभारत पर्वों में विभक्त है जिनकी संख्या अट्ठारह है। अतः विकल्प (c) सही है।

80. रसविषये समुचितकथने स्तः

(A) रसः वाच्यः भवति
(B) अभिनवगुप्तमतेन रसः व्यङ्ग्यः भवति
(C) महिमभट्टमतेन रसः अनुमेयः भवति
(D) रसः लौकिकः भवति
समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) (B) एवम् (C)
Solution:

रसविषये समुचितकथने (B) एवं (C) स्तः । अर्थात् रस विषयक समुचित कथन में (B) और (C) हैं। अभिनवगुप्तमतेन रसः व्यङ्ग्यः भवति। अर्थात् अभिनवगुप्त ने अपने 'अभिव्यक्तिवाद' के सिद्धान्त में रस को व्यङ्ग्य माना है। ये विभावादि का रस के साथ व्यङ्ग्य व्यञ्जक भाव सम्बन्ध को माना है। महिमभट्टमतेन रसः अनुमेयः ।

न्यायवादी आचार्य महिमभट्ट ने रस को अनुमेय माना है। वे रस के साक्षात्कार में अनुमान प्रमाण का आश्रय लिये हैं। अतः रस वाच्य न होकर व्यङ्ग्य होता है और लौकिक न होकर अलौकिक होता है।

अतः विकल्प (b) सही है।