यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021 जून 2022 (संस्कृत)

Total Questions: 100

81. 'रसः सुखदुःखात्मकः भवति' इति मान्यता अस्ति-

Correct Answer: (c) रामचन्द्र-गुणचन्द्रयोः
Solution:

'रसः सुखदुःखात्मकः भवति' इति मान्यता रामचन्द्रगुणचन्द्रयोः अस्ति। अर्थात् रस सुख दुःखात्मक होता है, यह मान्यता आचार्य रामचन्द्र गुणचन्द्र की है। आचार्य रामचन्द्र गुणचन्द्र ने अपने नाट्य-दर्पण में सभी रसों को दो विभागों में विभक्त किया है,

जिसमें से शृङ्गार, हास्य, वीर, अद्भुत और शान्त इन पाँच रसों को सर्वथा सुखात्मक और करुण, रौद्र, वीभत्स तथा भयानक इन चार को सर्वथा दुःखात्मक बताते हैं। अतः ये न तो सभी रसों को सुखात्मक ही माना है और न ही सभी रसों में सुख दुःख का समावेश।

अतः विकल्प (c) सही है।

82. व्याकरणशब्दस्य सूत्रमिति अर्थ स्वीकृते भाष्यकारेण के हे विप्रतिपती उपस्थापिते?

(A) भवार्थस्य असंगतिः (B) षष्ठ्यर्थस्य अनुपपन्नता (C) प्रोक्तार्थस्य अनिष्पन्नता (D) शब्दानामप्रतिपत्तिः
समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (c) (B) एवम् (D)
Solution:

व्याकरणशब्दस्य सूत्रमिति अर्थे स्वीकृते भाष्यकारेण षष्ठयर्थस्य अनुपपन्नता, शब्दानामप्रतिपत्तिः' ये द्वे विप्रतिपत्ती उपस्थापिते।

83. अधोलिखितं कथनद्वयम् आश्रित्य समुचितम्उत्तरं चिनुत-

कथनम् (I) : परिसंख्या त्रिदूषणा
कथनम् (II) : श्रुतहानात् अश्रुतकल्पनात् प्राप्तबाधात्
यथोचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (a) (I) तथा (II) उभे अपि सत्ये
Solution:

उपरिलिखितं कथनद्वयमाश्रित्य समुचितमुत्तरं (I) तथा (II) उभे अपि सत्ये स्तः।
अर्थात् उपरिलिखित दो कथनों पर आश्रित समुचित उत्तर (I) परिसंख्या त्रिदूषणा और (II) श्रुतहानात्, अश्रुतकल्पनात् तथा प्राप्तबाधात् ये दोनों सत्य हैं।

परिसंख्या दो प्रकार की होती है (1) श्रौती तथा (2) लाक्षणिकी। तत्र 'अत्र ह्वावपन्ती' ति श्रौती परिसंख्या। 'पञ्चपञ्चनखा भक्ष्या' इति तु लाक्षणिकी। लाक्षणिकी परिसंख्या तीन दोषों से युक्त होती है- (I) श्रुतहानिः (II) अश्रुतकल्पना (III) प्राप्तबाधश्चेति ।

84. अधोलिखितान् साहित्यकारान् कालक्रमेण योजयत -

(A) अम्बिकादत्तव्यासः  (B) पण्डिताक्षमारावमहोदया (C) श्रीधरभास्करः वर्णेकरः (D) वी. राघवन्
समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (b) (A), (B), (D), (C)
Solution:

उपरिलिखितान् साहित्यकारान् कालक्रमेण अम्बिकादत्तव्यासः → पण्डिताक्षमाराव महोदया → वी राघवन् श्रीधर भास्करः वर्णेकरः सन्ति ।
अम्बिकादत्त व्यास का समय 1858 ई. मृत्यु 1900 ई.में।
पण्डिता क्षमाराव का समय 4 जुलाई 1890 ई. को हुआ था।

85. कर्तृत्वभोक्तृत्वसुखित्वदुःखित्वाद्यभिमानित्वेन इहलोकपरलोकगामी व्यावहारिकः जीवः-

Correct Answer: (c) विज्ञानमयकोशावच्छिन्नः चिदात्मा
Solution:

कर्तृत्वभोक्तृत्वसुखित्वदुः खित्वाद्यभिमानित्वेन
इहलोकपरलोकगामी व्यावहारिकः जीवः विज्ञानमयकोशावच्छित्रः चिदात्मा अस्ति। अर्थात् यह बुद्धि ज्ञानेन्द्रियों के सहित विज्ञानमय कोश कहलाती है।

यह कोश अर्थात् इससे अवच्छिन्न चिदात्मा ही, मैं कर्ता हूँ, भोक्ता हूँ, सुखी हूँ, दुःखी हूँ, इत्यादि व्यवहार का अभिमान करने वाला 'जीव' कहा जाता है और इसी अभिमान करने के कारण यह इहलोक और परलोक में गमन करता है। मनस्तु ज्ञानेन्द्रियैः सहितं सन्मनोमयकोशो भवति।

अतः विकल्प (c) सही है।

86. मन्त्रिपरिषदि यथासामर्थ्यम् अमात्यान् कुर्वीत इति कस्य मतम्?

Correct Answer: (c) कौटिल्यस्य
Solution:

मन्त्रिपरिषदि यथासामर्थ्यम् अमात्यान् कुर्वीत इति कौटिल्यस्य मतम् - अस्ति ।
अर्थात् मन्त्रिपरिषद में यथासामर्थ्य मन्त्रियों को नियुक्त करना चाहिए यह मत आचार्य कौटिल्य का है। कौटिल्य के मत में कार्य करने वाले पुरुषों के सामर्थ्य के अनुसार ही मन्त्रियों की संख्या निश्चित करनी चाहिए।
मनु मन्त्रियों की संख्या 12, बृहस्पति 16, शुक्राचार्य 20 तथा कौटिल्य सामर्थ्य के अनुसार निश्चित करते हैं।
अतः विकल्प (c) सही है।

87. महाभारतस्य कस्मिन् पर्वणि रामोपाख्यानं वर्तते?

Correct Answer: (a) वनपर्वणि
Solution:

महाभारतस्य वनपर्वणि रामोपाख्यानं वर्तते । अर्थात् महाभारत के वनपर्व में 'रामोपाख्यान' का वर्णन है। महाभारत में 18 पर्व हैं जिसमें तीसरा वनपर्व है। यह नलचम्पू, किरातार्जुनीयम्, आदि अनेक ग्रन्थों का आधारभूत ग्रन्थ है। भीष्मपर्व से श्रीमद्भगवद्गीता का अवतरण किया गया है।

अतः विकल्प (a) सही है।

88. अधोलिखितेषु के द्वे आत्मनेपदविधायकसूत्रे स्तः ?

(A) पूर्ववत्सनः (B) परिमृशः (C) समवप्रविभ्यः स्थः (D) उपाच्च
समुचितं उत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (a) (A) एवम् (C)
Solution:

उपरिलिखितेषु 'पूर्ववत्सनश्च समवप्रविभ्यः स्थश्च' ये द्वे आत्मनेपदविधायकसूत्रे स्तः।
अर्थात् उपर्युक्त कथनों में पूर्ववत्सनश्च और समवप्रविभ्यः ये दो सूत्र आत्मनेपद विधायक विधि सूत्र हैं।

सूत्र- पूर्ववत्सनः सन् प्रत्यय से पूर्व जिस धातु से आत्मनेपद हो, सन् प्रत्यय के बाद भी उससे आत्मनेपद ही होता है। जैसे एधते आत्मनेपद है|

सूत्र - समवप्रविभ्यः स्थः सम, अव, प्र तथा वि उपसर्ग पूर्वक स्था धातु आत्मनेपद में प्रयुक्त होता है जैसे- संतिष्ठते, अवतिष्ठते, प्रतिष्ठते तथा वितिष्ठते। परे षः तथा उपाच्च परस्मैपदी विधायक सूत्र हैं।

अतः विकल्प (a) सही है।

89. 'चत्वारि हस्तशतानि वीशदुत्तराण्यायतेन एतावन्त्येव विस्तीर्णेन पञ्चसप्ततिहस्तानवगाढेन भेदेन निःसृतसर्वतोयं मरुधन्वकल्पमतिभृशं दुर्दर्शनमासीत्'-

इति कस्माद् अभिलेखाद् वर्तते ?

Correct Answer: (a) रुद्रदाम्नः गिरनाराभिलेखात्
Solution:

चत्वारि हस्तशतानि वीशदुत्तराण्यायतेन एतावन्त्येव विस्तीर्णेन पञ्चसप्ततिहस्तानवगाढेन भेदेन निःसृतसर्वतीय मरूधन्वकल्प-मति भृशं दुर्दर्शनमासीत् - इति रुद्रदाम्नः गिरनाराभिलेखात्' वर्तते। अर्थात् यह पंक्ति रुद्रदामन के गिरनार अभिलेख से है।

रुद्रदामन शक महाक्षत्रप वंश के राजा थे। इस अभिलेख की खोज 1832 में जेम्स प्रिंसेप ने की थी। इसकी भाषा संस्कृत तथा लिपि ब्राह्मी थी।

90. प्रकृतिः उपादानम्, कालः, भागः - इत्येते प्रभेदाः भवन्ति-

Correct Answer: (a) आभ्यन्तरतुष्टः
Solution:

प्रकृतिः, उपादानम्, कालः, भागः- इत्येते प्रभेदाः 'आभ्यन्तरतुष्टः' भवन्ति । अर्थात् प्रकृति, उपादान, काल और भाग्य ये प्रभेद आभ्यन्तर तुष्टि के होते हैं।
आध्यात्मिक्यश्चतस्त्रः प्रकृत्युपादानकाल भाख्याख्याः ।
बाह्याः विषयोपरमात् पञ्च च नव तुष्टयोऽभिमताः 
प्रकृति, उपादान, काल और भाग्य ये चार आध्यात्मिक तुष्टियाँ हैं, तथा विषयों से पूर्ण वैराग्य के कारण उत्पन्न होने वाली पाँच बाह्य तुष्टियाँ हैं। इस प्रकार कुल नौ तुष्टियाँ हैं।
बाह्यतुष्टि पाँच- पार, सुपार, पारापार, अनुत्तमाम्भ और उत्तमाम्भ ।