यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (संस्कृत)

Total Questions: 100

11. सूत्रात्मतैजसौ स्वप्नकाले विषयान् अनुभवतः-

Correct Answer: (b) मनोवृत्तिभि:
Solution:

सूत्रात्मतैजसौ स्वप्नकाले मनोवृत्तिभिः विषयान् अनुभवतः

12. 'प्रत्यक्षस्मृतिरूपज्ञानद्वयादेव अनुमितिदर्शनाद् व्याप्ति - विशिष्टवैशिष्ट्यावगाहि ज्ञानं न सर्वत्र कारणम्

इति मतम् अस्ति

Correct Answer: (d) मीमांसकानाम्
Solution:

प्रत्यक्षस्मृतिरूपज्ञानद्वपादेव अनुमितिदर्शनाद् व्याप्ति विशिष्ट वैशिष्टयावगाहि ज्ञानं न सर्वत्र कारण इति मीमांसकानां मतम् अस्ति।

13. जैनदर्शने श्रुतं ज्ञानम् अस्ति-

Correct Answer: (a) ज्ञानावरणक्षयोपशमे सति मतिजनितं स्पष्टं ज्ञानम्
Solution:

जैनदर्शने ज्ञानावरणक्षयोपशमे सति मतिजनितं स्पष्टं ज्ञानं श्रुतम् ज्ञानमस्ति अर्थात् जैनदर्शन में श्रुतज्ञान, ज्ञानगुण का ही पर्याय हैं उसके होने में मतिज्ञान निमित्तमात्र हैं, श्रुतज्ञान से पूर्व ज्ञानगुण की मतिज्ञानरूप पर्याय होती है और उस उपयोगरूप पर्याय का व्यय होने पर श्रुतज्ञान प्रकट होता है

इसलिए मतिज्ञान का व्यय श्रुतज्ञान का निमित्त है। वह अभावरूप निमित्त है। अर्थात् मतिज्ञान का जो व्यय होता है वह श्रुतज्ञान को उत्पन्न नहीं करता किन्तु श्रुतज्ञान तो अपने उपादान कारण से उत्पन्न होता है (मतिज्ञान से श्रुतज्ञान अधिक विशुद्ध होता है)

14. बाधः कः?

Correct Answer: (a) यत्र पक्षः साध्यशून्यः भवति सः
Solution:

यत्र पक्षः साध्यशून्यः भवति सः बाध अस्ति । यस्य साध्याभावः प्रमाणान्तरेण निश्चितः सः बाधितः अर्थात् जिस हेतु के साक्ष्य का अभाव किसी अन्य प्रमाण से निश्चित होता है वह बाधित हेत्वाभास है। यथा वछिरनुष्णों द्रव्यत्वात् इति ।

(अग्नि शीतल है द्रव्य होने के कारण) यहाँ अनुष्णत्व (शीतलता) | साक्ष्य है उसका अभाव ऊष्णत्व स्पर्शनप्रत्यक्ष से ज्ञात होता है इसलिए इसमें बाधित हेत्वाभास है।

15. 'कुत्रत्रिद् विकल्पप्रसक्तौ अपि अनन्यगत्या प्रतिषेधाश्रयणम्'- इत्यस्य उदाहरणम् अस्ति

Correct Answer: (d) नातिरात्रे षोडशिनं गृह्णाति
Solution:

'कुत्रचिद् विकल्पप्रसक्तौ अपि अनन्यगत्या प्रतिषेधाश्रयणम् इत्यस्य उदाहरणम् नातिरात्रे षोडशिनं गृह्णाति । वर्णाश्रमानुसार वैदिक अग्नि होत्रादि कृत्यों में अग्नि, इन्द्र, वरूण, रूद्र, विष्णु आदि सभी देवताओं का यजन करना पड़ता है

अतः कोई भी वैदिकत्वाभिमानी कैसे कह सकते है कि हम अनन्य वैष्णव या शैव है, अन्य देव का अर्चन ही करेंगे।

तस्मात् अनन्यता का अर्थ यह कदापि नहीं हो सकता कि देवता, ब्राह्मण, गुरु, माता-पिता आदि गुरुजनों की पूजा छोड़ देनी चाहिए किन्तु अनन्यता का अर्थ यही है कि देव पितृ गुरुब्राह्मणादि सभी का आराधन पूजन करो इत्यादि ।

षोडशी ग्रहण-"अतिरात्रे षोडशिनं गृहणाति इस शास्त्र से ही प्राप्त है। अतः” नातिरात्रे षोडशिनं गृहणति ।" इस साक्षात निषेध से भी अत्यन्तबाध नहीं होता, किन्तु विकल्प ग्रहणाऽग्रहण का ही माना गया है।

16. योगसूत्रकारस्य शब्दार्थयोः सम्बन्धमधिकृत्य मतम् अस्ति-

Correct Answer: (c) शब्दार्थयोः नित्यः अस्तिः, ईश्वरकृतेन संकेतेन प्रकाश्यते ।
Solution:

योगसूत्रकारस्य शब्दार्थयोः सम्बन्धमधिकृत्य मतम् 'शब्दार्थयोः नित्यः अस्तिः ईश्वरकृतेन संकेतेन प्रकाश्यते अर्थात् योगसूत्रकार शब्द और अर्थ के सम्बन्ध स्वीकृत मत है कि शब्द और अर्थ का सम्बन्ध नित्य है, वह ईश्वर कृष्ण के द्वारा संकेत से प्रकाशित है।

17. व्यक्ताव्यक्तयोः स्वरूपं नास्ति-

Correct Answer: (d) शून्यत्वम्
Solution:

व्यक्ताव्यक्तयोः स्वरूपं 'शून्यत्वम्' नास्ति अर्थात् व्यक्त और अव्यक्त का स्वरूप शून्यत्व नहीं है। जबकि सामान्यत्वम, प्रसवधार्मित्व, विषयत्व ये सब व्यक्ताव्यक्त के स्वरूप है।

व्यक्त और अव्यक्त
हेतुमदनित्यमत्यापि, सक्रियमनेकमाश्रितं लिङ्गम् सावयवं परतन्त्रं विपरीतमत्यक्तम्।।
त्रिगुणमविवेकि विषमः सामान्यमचेतनं प्रसवधर्मि। व्यक्तं तथा प्रधानम्,तद्विपरीतस्तथा च पुमान् ॥

18. 'निम्यनैमित्तिकप्रायश्चित्तोपासनानाम् अवान्तरफलं पितृलोकसत्यलोकप्राप्तिरस्ति' इत्यत्र प्रमाणम्-

Correct Answer: (a) कर्मणा पितृलोकः विद्यया देवलोक इत्यादिश्रुतिः
Solution:

'नित्यनैमित्तिक प्रायश्चित्तोपासनानाम् अवान्तरफलं' पितृलोकसत्यलोकप्राप्तिरस्ति' इत्यत्र प्रमाणम् कर्मणा पितृलोकः विद्यया देवलोक इत्यादि श्रुतिः अर्थात् नित्य, नैमित्तिक, प्रायाश्चित्त, उपासना का अवान्तर फल पितृलोक, सत्यलोक की प्राप्ति है इसका प्रमाण कर्म से पितृलोक, विद्या से देवलोक की प्राप्ति होती है।

19. 'चीनी-स्यामी तिब्बती सूडानी' -इत्यादयः भाषाः सन्ति-

Correct Answer: (b) अयोगात्मकवर्गस्य
Solution:

चीनी, स्यामी, तिब्बती-सूडानी-इत्यादयः अयोगात्मक वर्गस्य भाषा सन्ति अर्थात् चीनी, स्यामी, तिब्बती, सूडानी आदि अयोगात्मक वर्ग की भाषा हैं।

अयोगात्मक भाषा उसे कहते है जिसमें प्रकृति प्रत्यय जैसी कोई चीज नहीं होती है और न शब्दों में कोई परिवर्तन होता है। प्रत्येक शब्द की स्वतंत्र सत्ता होती है और वाक्य में प्रयुक्त होने पर भी वह सत्ता ज्यों की त्यों रहती है।

20. मूलभारोपीयभाषाणां कवर्गस्य प्रकाराः सन्ति-

Correct Answer: (a) शुद्धस्थाः, कण्ठतालव्याः, कण्ठोष्ठ्याः
Solution:

मूलभारोपीयभाषाणां कवर्गस्य प्रकाराः 'शुद्धस्थाः' कण्ठतालव्याः, कण्ठोष्ठ्याः सन्ति अर्थात् मूलभारोपीय भाषा की कवर्ग के प्रकार की शुद्ध कष्ठतालव्य ध्वनियाँ कण्ठ ओष्ठ है।
कण्ठ तालव्य ध्वनियाँ ए, ऐ
कण्ठौष्ठ्य ध्वनियाँ ओ, औ