Solution:वर्तमान कालार्थस्य क्तप्रत्ययस्य प्रयोगः अस्ति 'राज्ञां बुद्धः । अर्थात् वर्तमानकाल बोधक 'क्त' प्रत्ययान्त शब्द के योग में षष्ठी विभक्ति हों।
जैसे-
(1) राज्ञां मतः राजसमूह-कर्तृक वर्तमान विभक्ति इच्छा का विषय
(2) राज्ञां बुद्धः- राज समूह-कर्तृक वर्तमान ज्ञान का विषय
(3) राज्ञां पूजितः राजसमूह कर्तक वर्तमान पूजा का आश्रय। मतिबुद्धि पूर्जार्थभ्यश्च इस सूत्र से वर्तमान काल रूप अर्थ समझाने के लिए 'क्त' प्रत्यय विहित हुआ है।
इस क्त प्रत्ययान्त शब्द के योग में कर्तृकारक में षष्ठी विभक्ति हो। न लोकव्यय निष्ठा खलर्थतनाम इस सूत्र में कर्तृकारक में षष्ठी विभक्ति हो। न लोकव्ययनिष्ठा खल तृनाम् इस सूत्र से आगे चलकर निष्ठा अर्थात् क्त तथा क्ववत् प्रत्ययों से बने शब्दों के योग में कर्तृकारक में षष्ठी का निषेध किया है।
अब "क्तस्य च वर्तमाने" सूत्र उक्त निषेध का अपवाद या बाधक है। अर्थात् न लोकेः इत्यदि सूत्र से क्त प्रत्ययान्त शब्द के योग में कर्तकारक में षष्ठी का जो निषेध किया गया है।
वह निषेध वर्तमानकालार्थक क्त प्रत्ययान्त शब्द के योग में नहीं लगेगा। तात्पर्य यह है कि वर्तमानर्थक "क्त" प्रत्ययान्त्र शब्द के योग में कर्तृकारक में षष्ठी विभाक्ति होती है।