यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (संस्कृत)

Total Questions: 100

31. उत्तरामचरिते 'पदवाक्यप्रमाणज्ञो भवभूतिर्नाम जतुकर्णीपुत्रः' इति केनोक्तत्?

Correct Answer: (d) सूत्रधारेण
Solution:

उत्तररामचरिते 'पदवाक्यप्रमाणज्ञो भूवभूतिर्नाम जतुकर्णी पुत्रः इति केनोक्तम् अर्थात् उत्तरामचरित में 'पद वाक्यप्रमाणज्ञ' भवभूति नाम जतुकणों के पुत्र है ऐसा सूत्रधार ने कहा था।

उत्तररामचरितम् में कुल 256 श्लोक हैं। इसमें कुल सात अङ्क है। यह करुण रस प्रधान नाटक ग्रन्थ है। भवभूति की तीन रचनाएँ हैं-
(1) महावीरचरितम् सात अङ्क
(2) मालतीमाधवम् दस अङ्क
(3) उत्तररामचरितम् सात अङ्क

32. अभिज्ञानशाकुन्तलस्य प्रथमः आंग्लानुवादः केन कृतः

Correct Answer: (c) विलियमजोन्समहोदयेन
Solution:

अभिज्ञानशाकुन्तलस्य प्रथमः आंग्लानुवाद' विलियमजोन्स महोदयेन कृतः अर्थात् अभिज्ञान शाकुन्तल का प्रथम अंग्रेजी भाषा में अनुवाद विलियम जोन्स महोदय ने किया था।
→ अभिज्ञान शाकुन्तलम् का हिन्दी अनुवाद राजा लक्ष्मण सिंह ने किया था।
→ इसमें कुल 196 श्लोक तथा सात अङ्क है।
→ संस्कृत का शेक्सपीयर कालिदास को कहा जाता है।

33. 'सुवर्णपुष्पां पृथिवीं चिन्वन्ति पुरुषास्त्रयः' इत्यादि प कस्य उदाहरणरूपेण ध्वन्यालोके उल्लिखितम्?

Correct Answer: (a) अविवक्षितवाच्यध्वनेः
Solution:

'सुवर्णपुष्पां पृथिवीं चिन्वन्ति पुरुषास्त्रयः' इत्यादि पद्यं 'अविवक्षितवाच्यध्वनेः' उदाहरण रुपेण ध्वन्यालोके उल्लिखितम् अर्थात् तीन प्रकार के लोग सुवर्णपुष्पा पृथिवी का चयन करते है। यह पद्य अविवक्षितवाच्यध्वनि का उदाहरण ध्यन्यालोक में उल्लिखित है। आनन्दवर्धनाचार्य विरचित ध्वन्यालोक में कुल चार उद्योत हैं।

34. 'प्रवर्ततां प्रकृतिहिताय पार्थिवः'सरस्वती श्रुतमहतां महीयताम्।' इति पद्यमस्ति-

Correct Answer: (b) अभिज्ञानशाकुन्तले
Solution:

'प्रवर्ततां प्रकृतिहिताय पार्थिवः' सरस्वती श्रुतमहतां महीयताम्' इति
अभिज्ञानशाकुन्तले पद्यमस्ति ।
सरस्वती श्रुतमहतां महीयताम्
ममापि च क्षपयतु नीललोहितः
पुनर्भवं परिगत शक्तिरात्मभूः
अभिज्ञानशाकुन्तलम् का भरतवाक्य रूचिरा छन्द में वर्णित है, इसका मङ्गलाचरण अष्टपदा नान्दी तथा आशीर्वादात्मक है जो नग्धरा छन्द में है।
रूचिरा छन्द का लक्षण- जभौ-सजौ गिति रूचिरा चतुग्रहः
स्नग्धरा का लक्षण "मनैर्यानां त्रयेण त्रिमुनियतियुता नग्धरा कीर्तितेयम् ।

35. अर्थशास्त्रस्य नवमम् अधिकरणं किम्?

Correct Answer: (a) अभियास्यत्कर्म
Solution:

अर्थशास्त्रस्य नवमम् अधिकरणं 'अभियास्यत्कर्म अस्ति अर्थात् अर्थशास्त्र के नवम् अधिकरण का नाम अभियास्यत्कर्म है। अर्थशास्त्र में कुल 15 अधिकरण, 150 अध्याय, 180 उपविभाग तथा 6000 श्लोक हैं।

अर्थशास्त्र के लेखक आचार्य कौटिल्य तथा नायक चन्द्रगुप्त मौर्य है।
विनयाध्यक्षधर्मस्थं कण्टकं योगमण्डले
षाङ्गुण्यं व्यसनं चैवाभियास्यत्कर्म एव च ।
सांप्रामिकं संघवृत्तम् आवलं दुर्गलम्भनम्।
तत्रोपनिषदं तंत्रयुक्तिः कौटिलय संग्रहे ।।

1. विनयाधिकारिक2. अध्यक्षप्रचार11. संघवृत्त
3. धर्मस्थीयम्4. कण्टकशोधन12. आबलीयम्
5. योगवृत्त6. मण्डलयोनि13. दुर्गलम्भनम्
7. षाड्गुण्य8. व्यसनाधिकारिक14. औपनिषदिक
9. अभियास्यत्कर्म10. सांग्रामिक15. तन्त्रयुक्तिः

36. 'धर्म जिज्ञासमानानां प्रमाणं परमं श्रुतिः' कस्मिन् ग्रन्थे वर्तते?

Correct Answer: (a) मनुस्मृतौ
Solution:

'धर्म जिज्ञासमानानां प्रमाणं परमं श्रुतिः' इति मनुस्मृती प्रन्थे वर्तते अर्थात् जो धर्म को जानने की इच्छा करें उनके लिए वेद ही परम प्रमाण हैं यह सूक्ति मनुस्मृति ग्रन्थ में वर्णित है।
अर्थकामेष्व सक्तानां धर्मज्ञानं विधीयते । 
धर्म जिज्ञासमानानां प्रमाणं परमं श्रुतिः ।
मनुस्मृति में कुल 12 अध्याय हैं जिसमें लगभग 2684 श्लोक हैं।
1.जगत की उत्पत्ति
2. संस्कारविधि, व्रतचर्या उपचार
3. स्नान, दाराधिगमन, विवाहलक्षण, महायज्ञ
4. वृत्तिलक्षण, स्नातक व्रत
5. भक्ष्याभक्ष्य, शौच, अशुद्धि, स्त्रीधर्म
6. गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थ, मोक्ष, सन्यास
7. राजधर्म
8. कार्यविनिर्णय
9. स्त्रीपुंसधर्म, विभाग धर्म, कंटकशोधन
10. संकीर्णजाति
11. प्रायश्चित्त
12. संसारगति, कर्म, कर्मगुणदोष, कुलधर्म, ।

37. अष्टादशपुराणेषु न गण्यते-

Correct Answer: (d) नृसिंहपुराणम्
Solution:

अष्टादशपुराणेषु 'नृसिंह पुराणम् गण्यते अर्थात् अट्ठारह पुराणों में नृसिंहपुराण की गणना नहीं की जाती है।'
अट्ठारह पुराण हैं-

1. मत्स्य पुराण2. मार्कण्डेय पुराण
3. भविष्य पुराण4. गरुड़ पुराण
5. ब्रह्माण्ड पुराण6. ब्रह्मवैवर्त पुराण
7. ब्रह्म पुराण8. पद्मपुराण
9. विष्णुपुराण10. वायुपुराण
11. भागवतपुराण12. नारद पुराण
13. अग्निपुराण14. लिङ्ग पुराण
15. कूर्म पुराण16. स्कन्द पुराण
17. वराह पुराण18. वामन पुराण

38. निघण्टवः कस्मात्?

Correct Answer: (b) एते निगमाः भवन्ति
Solution:

निघण्टवः 'एते निगमाः भवन्ति' ।
वैदिक शब्दकोश को निघण्टु कहते हैं क्योंकि ये निश्चित रूप से वेदों के अर्थ के बोधक होते हैं।
अतः 'निश्चयेन वेदार्थं गमयन्ति' इस निर्वचन के अनुसार निगन्तवः या निघण्टवः अर्थात् 'निघण्टु' नाम से कहे जाते हैं। निरुक्त सिद्धान्त के अनुसार शब्दों से तीन प्रकार का विभाग किया गया है-
1.प्रत्यक्षवृत्ति
2. परोक्षवृत्ति
3. अतिपरोक्षवृत्ति
नोट- एते समाहृताः भवन्ति, एते निगमाः भवन्ति, एते निगन्तारः भवन्ति ये सब निघण्टु के निर्वचन हैं। जिसके कारण इस प्रश्न को आयोग के द्वारा अयोग्य मान लिया गया है।

39. अधोलिखितेषु मनुस्मृतेः टीकाकारः कः?

Correct Answer: (c) कुल्लूकभट्टः
Solution:

मनुस्मृतेः टीकाकारः कुल्लूक भट्टः अर्थात् मनुस्मृति के टीकाकार कुल्लूक भट्ट हैं
मनुस्मृतिः- श्री कुल्लूक भट्ट प्रणीत 'मन्वर्थमुक्तावली' टीका सहित 'मणिप्रभा' हिन्दी व्याख्या भी की है, मनुस्मृति में कुल 12 अध्याय है। जिनमें 2684 श्लोक हैं। कुछ संस्करणों में श्लोको की संख्या 2964 है

40. वाल्मीकिरामायणसुन्दरकाण्डे सर्गसङ्ख्या अस्ति-

Correct Answer: (a) अष्टषष्टिः (68)
Solution:

वाल्मीकिरामायणसुन्दरकाण्डे 'अष्टषष्टिः' सर्गसड्.ख्या अस्ति अर्थात् वाल्मीकि रामायण के सुन्दर काण्ड में अड़सठ (68) सर्ग हैं।
रामायण महर्षि वाल्मीकि की कृति है इसमें कुल सात काण्ड हैं।

काण्ड का नाम सर्ग संख्या (Number of Sargas)
1. बालकाण्ड77 सर्ग
2. अयोध्याकाण्ड119 सर्ग
3. अरण्यकाण्ड75 सर्ग
4. किष्किन्धाकाण्ड67 सर्ग
5. सुन्दरकाण्ड68 सर्ग
6. युद्धकाण्ड128 सर्ग
7. उत्तरकाण्ड111 सर्ग