यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (संस्कृत)

Total Questions: 100

41. रसदोषान् चिनुत-

Correct Answer: (b) व्यभिचारिभावानां शब्दवाच्यता
Solution:

रसदोषान् 'व्यभिचारिभावानां शब्दवाच्यता, प्रतिकूल विभावादिग्रहः अस्ति अर्थात्
ये रस दोष हैं।
व्यभिचारि भावों, रसों और स्थायिभावों की स्वशब्द वाच्यता तथा अनुभावों और विभावों की अभिव्यक्ति में कष्टकल्पना रस दोष है। व्यभिचारि रस स्थायि भावानां शब्द वाच्यता।
कष्ट कल्पनया व्यक्तिः अनुभावाविभावयोः ।। 60।। -काव्य प्रकाश
सप्तम उल्लास

42. दशरूपकानुसारं कार्यावस्थे स्तः-

(A) प्राप्त्याशा (B) पताका (C) प्रकरी (D) नियताप्तिः (E) बिन्दुः
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) A, D केवलम्
Solution:

समुचितमुत्तरं अस्ति
दशरूपकानुसारं कार्यावस्थे 'प्राप्त्याशा, नियताप्तिः स्तः । अर्थात् दशरूपक के अनुसार कार्यावस्था प्राप्त्याशा और नियताप्ति है।

अवस्थाअर्थप्रकृति)सन्धि
1.आरम्भबीजमुख
2.यत्नबिन्दुप्रतिमुख
3.प्राप्त्याशापताकागर्भ
4.नियताप्तिप्रकरीविमर्श (अवमर्श)
5.फलागमकार्यनिर्वहण (उपसंहृति)

43. अधोलिखितेषु मृच्छकटिकस्य पात्रे चिनुत-

(A) चन्दनकः (B) मधुरिकाः (C) दर्दुरकः (D) पाझिनिका (E) सानुमती
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) A, C केवलम्
Solution:

मृच्छकटिकस्य पात्रे चन्दनकः, दर्दुरकः स्तः । अर्थात् मृच्छकटिकम् का पात्र चन्दनक और दर्दुरक है। मृच्छकटिकम में 10 अङ्क हैं।

यह रूपक का एक भेद प्रकरण है। इसमें निर्धन ब्राह्मण चारुदत्त की वसन्तसेना नामक गणिका (वेश्या) से प्रेम का वर्णन है। चारुदत्त धीरप्रशान्त कोटि का नायक तथा वसन्तसेना प्रगल्भा नायिका है।

मृच्छकटिकम् के पात्र- चारुदत्त, आर्यक, शर्विलक, विट, दर्दुरक अधिकारणिक, नटी, रदनिका, मदनिका, वसन्तसेना, धूता आदि।

44. अधोलिखितेषु सूक्तिषु शुकनाशोपदेशे नियोजिते सूक्ती के?

(A) अकारणञ्च भवति दुष्प्रकृतेरन्वयः श्रतुं वा विनयस्य
(B) गुणानुरोधेन विना न सक्रिया
(C) विचित्ररूपाः खलु चित्तवृत्तयः
(D) लोके पण्डिता अपि दाक्षिण्येनाकार्यं कुर्वन्ति
(E) तपोवनानि नाम अतिथिजनस्य स्वगेहम्
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) A, D केवलम्
Solution:

उपरिलिखितषु सूक्तिषु शुकनासोपदेशे नियोजिते सूक्ती अकारणञ्च भवति दुष्प्रकृतरन्वयः श्रुतं वा विनयस्य, तपोवनानि नाम अतिथिजनस्य स्वगेहं स्तः ।
नोट- इस प्रश्न को आयोग ने निरस्त कर दिया है।

45. ध्वनिपरविर्तनस्य दिशा अस्ति-

(A) विषमीकरणम् (B) सघोषीकरणम् (C) अर्थापकर्षः (D) निर्द्वन्द्वता
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) A, B केवलम्
Solution:

ध्वनिपरिवर्तनस्य दिशा विषमीकरण, सघोषीकरण अस्ति अर्थात् ध्वनिपरिवर्तन की दिशा है विषमीकरण और सघोषी करण।
ध्वनि परिवर्तन की अन्य दिशाएँ

1. समीकरण2. विषमीकरण
3. आगम4. लोप
5. समाक्षर-लोप6. वर्ण-विपर्यय
7. महाप्राणी-करण8. अल्पप्राणीकरण
9. घोषीकरण10. अघोषीकरण
11. अनुनासिकी करण12. ऊष्मीकरण

46. अथर्ववेदेन सम्बद्धम्-

(A) पारस्करगृह्यसूत्रम्  (B) प्रश्नोपनिषद् (C) छान्दोग्योपनिषद् (D) मुण्डकोपनिषद् (E) सत्याषाढगृह्यसूत्रम्
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) B, D केवलम्
Solution:

समुचितमुत्तरं स्तः।
अथर्ववेदेन सम्बद्धं प्रश्नोपनिषद् मुण्डकोपनिषदश्च अस्ति।
अर्थात् अथर्ववेद से सम्बद्ध प्रश्नोपनिषद् तथा मुण्डकोपनिषद् है।
छान्दोग्योपनिषद् सामवेद से सम्बद्ध है, सत्याषाद्‌गृह्मसूत्र कृष्णयजुर्वेद से सम्बद्ध है तथा पारस्करगृह्मसूत्र शुक्लयजुर्वेद से सम्बद्ध है।
वेद सम्बन्धित उपनिषद्-
ऋग्वेद - ऐतरेयोपनिपद्
यजुर्वेद - बृहदारण्यकोपनिषद् ईशावास्योपनिषद् शुक्लयजुर्वेद से तथा तैत्तिरीय, मैत्रायणी, श्वेताश्वतरोपनिषद्, कठोपनिषद् कृष्णयजुर्वेद से
सामवेद - केन, छान्दोग्योपनिषद्
अथर्ववेद - प्रश्न, मुण्ड, माण्डूक्योपनिषद् ।
अतः उपर्युक्त विकल्पों में समुचित विकल्प (b) है।

47. ऋग्वेदस्य मन्त्रांशौ चिनुत-

(A) मा भ्राता भ्रातरं द्विक्षन् (B) स्वधा अवस्तात् प्रयतिः पयस्तात् (C) यस्मिन् ऋचः साम यजूंषि (D) रात्रीभिरस्सा अहभिर्दशस्य
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (c) B,D केवलम्
Solution:

ऋग्वेदस्य मन्त्रांशौ स्वधा अवस्तात् प्रयतिः पयस्तान रात्रीभिरस्मा अहभिर्दशस्य ।
स्वधा अवस्तात् प्रयतिः पयस्तात् यह मंत्र ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (10.129) से लिया गया है।

तिरश्चीनों विततो रश्मिरेषामधः स्विदासीउदुपरि स्विदासि उत् रेतधो आसन् महिमान आसन्त्स्वधा अवस्तात् प्रयतिः परस्ततात् ।। शलीभिरस्मा अहभिर्दशस्य यहयह सूक्त ऋग्वेद के यमयमीसूक्त से लिया गया है।

48. यजुर्वेदस्य भाष्यकारी स्तः-

(A) महीधरः (B) मल्लिनाथः (C) उव्वटः (D) शङ्कराचार्यः (E) नीलकण्ठः
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (c) A, C केवलम्
Solution:

यजुर्वेदस्य भाष्यकारौ महीधरः, उव्वटः स्तः। अर्थात् महीधर और उव्वट यजुर्वेद के भाष्कार हैं।
वेद भाष्यकार

ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेदअथर्ववेद 
1. स्कन्दस्वामीउव्वटमाधवसायण
2. नारायणमहीधरभरतस्वामी
3. उद्गीथहलायुधगुणविष्णु
4. माधवभट्टअनन्ताचार्यसायण
5. वेंकट माधवकुण्डिन
6. धानुष्क्यज्वाभरतस्वामी
7. आनन्दतीर्थगुहदेव
8. सायणसायण

49. अरस्तुप्रणीते रचने स्तः-

(A) पोएटिक्स (B) पेरीहुप्सुप (C) रिपब्लिक (D) ईस्थेटिक (E) आर्स पोएटिका
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (b) A, C केवलम्
Solution:

अरस्तुप्रणीते 'पोएटिक्स, रिपब्लिक रचने स्तः अर्थात् अरस्तू प्रणीत पोएटिक्स, रिपब्लिक दो रचनाएँ हैं।'

अरस्तू यूनानी दार्शनिक थे। वे प्लेटो व सिकन्दर के गुरू थे। उनका जन्म स्टेंगेरिया नामक नगर में हुआ था प्लेटो, सुकरात और अरस्तू पश्चिमी दर्शनशास्त्र के सबसे महान दार्शनिकों में एक थे।

अरस्तू की अन्य रचनाएँ- पोलिटिक्स, पोएटिक्स, मेटाफिजिक्स हिस्ट्री ऑफ एनिमल्स, ऑन दी हेअबेंस, द फिजिक्स आदि। नोट- इस प्रश्न को आयोग ने निरस्त कर दिया है। क्योंकि रिपब्लिक 'प्लेटो' की रचना है।

50. तर्कभाषानुसारं पदार्थेषु परिगणिते न स्तः

(A) अवयवः (B) निग्रहस्थानम् (C) प्रतिश्रुति (D) संवारः
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (c) C, D केवलम्
Solution:

तर्कभाषानुसारं पदार्थषु परिगणिते न स्तः- 'प्रतिश्रुति संवारः' अर्थात् तर्कभाषा के अनुसार षोडश पदार्थों में प्रतिश्रुति और संवार का वर्णन नहीं है।

षोडश पदार्थ हैं- 1. प्रमाण 2. प्रमेय 3. संशय 4. प्रयोजन 5. दृष्टान्त 6. सिद्धान्त 7. अवयव 8. तर्क 9. निर्णय 10 वाद 11. जल्प 12. वितण्डा 13. हत्वाभास 14. छल 15. जाति 16. निग्रहस्थान ।

प्रमाणादिषोडश पदार्थानां तत्त्वज्ञानान्यमोक्ष प्राप्तिः भवति ।"