Solution:उपरोक्त कथनानुसारं "A, C" कथनम् केवलम् सत्य कथनम् अस्ति अर्थात् कथनानुसार A तथा C कथन सत्य हैं। A. अपिशब्दः सम्भावनेऽर्थे कर्म प्रवचनीय सज्ञः अस्ति। अपि शब्द की सम्भावना अर्थ में कर्म प्रवचनीय संज्ञा होती है।
"अपिः पदार्थ संभावनाऽन्ववसर्ग गर्हासमुच्चयेषु सूत्र से "अपि की पदार्थ, संभावना, अन्वसर्ग (इच्छानुसार कार्य करने की अनुमति देना), गर्दा (निन्दा) तथा समुच्चय (संग्रह) अर्थों में अपि की कर्मप्रवचनीय संज्ञा होती है। यथा अपि स्तुयाद् विष्णुम्' यह कथन सत्य है।
C. "अति देवान् कृष्णः” इत्यत्र अतिक्रमणं पूजा च गम्यमाने भवतः । अतिदेवान् कृष्णः” यहाँ अतिक्रमण तथा पूजा अर्थ गम्यमान है। "अतिरतिक्रमणे च''
B. सुषिक्तं किं तवात्र" इत्यत्र पूजार्थः गम्य मानः अस्ति अर्थात् यहां पूजार्थ गम्यमान है। यह कथन असत्य है। 'सुपूजायाम्' सूत्र से यहाँ सुषिक्तम्” में 'सु' निन्दा अर्थ में विद्यमान है,
D. "उप हरि सुराः" इत्यनेन सामीप्य अर्थ गम्यते । उपहरिं सुराः यहां सामीप्य अर्थ गम्यमान नहीं होता है। अतः यह कथन असत्य है। "उपोऽधिके च" सूत्र से उप की "अधिक तथा हीन" अर्थ में कर्म प्रवचनीय संज्ञा होती है। यहाँ उप हीन अर्थ में विद्यमान है।