यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (संस्कृत)

Total Questions: 100

71. यथोचितं मेलयत

सूची-I सूची-II 
A.ज्ञानपदवेदनीयस्य नीलाद्यवभासस्य चित्तस्य नीलादौ आलम्बनप्रत्ययात्I.विषयग्रहणप्रतिनिधिमः भवति
B.समनन्तरप्रत्ययात्II.आलोकात् स्पष्टता भवति
C.सहकारिप्रत्ययात्III.प्राचीनज्ञानोद्धोधरूपता भवति
D.चक्षुषोऽधिपतिप्रत्ययात्IV.नीलाकारता भवति

उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) A-IV, B-III, C-II, D-I
Solution:

प्रश्नानुसारं यथोचित मेलनं उत्तरे अस्ति।

 
A.ज्ञान पद वेदनीयस्य नीलाद्यवभासस्य चित्तस्य नीलादौ आलम्बन प्रत्ययात्IV.नीला कारताभवति
B.समनन्तर प्रत्ययात्III.प्राचीनज्ञानोत् बोधरूपता भवति
C.सहकारि प्रत्ययात्II.आलोकात् स्पष्टता भवति
D.चक्षुषोऽधिप्रति प्रत्ययात्I.विषय ग्रहण प्रतिनियमः भवति

72. यथोचितं मेलयत

सूची-Iसूची-II
A.करभोरू:I.औपम्यम्
B.वामोरू:II.अनौपम्यम्
C.गौरमुखाIII.देवता
D.सूर्याIV.सञ्ज्ञा

उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) A-I, B-II, C-IV, D-III
Solution:

उपरि उक्त कथनास्यालोक समुचित उत्तर अस्ति

सूची-Iसूची-II 
A.करभोरू:I.औपम्यम्
B.वामोरू:II.अनौपम्यम्
C.गौरमुखाIII.सञ्ज्ञा
D.सूर्याIV.देवता

A. करभोरू - करभौ इव ऊरू यस्याःसा यहाँ “ऊश्चतर पदा दौपम्पये
सूत्र से औपम्य अर्थ में स्त्रीलिङ्ग में ऊङ (ऊ) प्रत्यय होता है।
B. वामोरूः वामी ऊरू यस्याः सा अत्र “संहित शफ लक्षण
वामादेश्च" सूत्र से अनौपम्यार्थ में ऊङ प्रत्यय होता है।
C. गौरमुखा- गौरं मुखं यस्याः सा यहाँ ङीष् प्रत्यय प्राप्त था
"नखमुखात् संज्ञायाम्” सूत्र से संज्ञा अर्थ में डीष् का निषेध हो जाता
है। तथा अजाद्यतष्टाप् सूत्र से टाप् प्रत्यय होता है।
D. सूर्या अत्र "सूर्यात् देवतायां चाप् वक्तव्यः” वार्तिक से देवता अर्थ में चाप प्रत्यय होता है।

73. यथोचितम् उत्सर्गापवादयोः मेलनं कुरुत

सूची-I सूची-II 
A.अत्र एकहल्मध्येऽनादेशादेर्लिटिI.पोरदुपधात्
B.लुङ्-लङ्-लृङ्-क्ष्वडुदात्तःII.न माङ्योगे
C.ऋहलोर्ण्यत्III.न शश्वद्वादिगुणानाम्
D.ष्टुना ष्टुःIV.न पदान्ताट्टोरनाम्

उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) A-III, B-II, C-I, D-IV
Solution:

प्रश्नानुसारं यथोचितम् उत्सर्गापवादयोः मेलनं b आस्ति

सूची-I सूची-II 
A.अत्र एकहल्मध्येऽनादेशादेर्लिटिIII.न शश्वद्वादिगुणानाम्
B.लुङ्-लङ्-लृङ्-क्ष्वडुदात्तःII.न माङ्योगे
C.ऋटलोर्ण्यत्I.पोरदुपधात्
D.ष्टुनाःIV.न पदान्ताट्टोरनाम्

लिट् को निमित्त मानकर जिस अङ्कके आदि वर्ण के स्थान में
आदेश न हुआ हो, उसके अवयव संयोग रहित हल् के साथ वर्तमान
हस्व अकार को एकार और अभ्यास का लोप होता है कित् लिट् के
पर वर्ती रहने पर।
यह उत्सर्ग अर्थात् विधि सूत्र है
III. न शस् ददवादि गुणानाम्।
शस्, दद्, वकारादि धातु और गुण शब्द से विहित अकार को एत्व
एवं अभ्यासलोप नहीं होता। यह अपवाद सूत्र है।

B. लुङ्ङ् ऌवडुदान्तः विधि अर्थात् उत्सर्ग सूत्र है। लुङ् लङ्ग, और लङ के परे रहते अङ्ग को अट् का आगम होता है। यह उत्सर्ग
सूत्र है इसका अपवाद है II न माङ्योगे
II. न मायोगे "माङ्" के योग में अट् और आट् का आगम नहीं
होता है। यह अपवाद सूत्र है।
C. ऋहलोर्ण्यत्- यह उत्सर्ग सूत्र है। ऋवर्णान्त और हलन्त धातु से
ण्यत् प्रत्यय होता है। इसका अपवाद सूत्र है। न पोरदुपधात्
D. हुना ष्ठः यह उत्सर्ग अर्थात् विधि सूत्र है। सकार तवर्ग को षकार
टवर्ग होता है। षकार टवर्ग का योग होने पर। इसका अपवाद सूत्र है।
"न पदान्तात् टोरनाम्
पदान्त ट वर्ग से परे सकार तवर्ग को षकार टवर्ग नहीं होता है।

74. यथोचितं मेलनं कुरुत-

सूची-Iसूची-II 
A. प्रहर्षिणीI. प्रतिपादम् एकविंशतिः वर्णाः
B. स्रग्धराII. प्रतिपादम् त्रयोदश वर्णाः
C. शार्दूलविक्रीडितम् III. प्रतिपादम् सप्तदश वर्णाः
D. मन्दाक्रान्ता IV. प्रतिपादम् एकोनविंशतिः वर्णाः

उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) A-II, B-I, C-IV, D-III
Solution:

प्रश्नानुसार यथोचितं मेलनं d अस्ति।

सूची-Iसूची-II 
A. प्रहर्षिणीII. प्रतिपादम् त्रयोदश वर्णाः
B. स्रग्धराI. प्रतिपादम् एकविंशतिः वर्णाः 
C. शार्दूलविक्रीडितम् IV. प्रतिपादम् एकोनविंशतिः वर्णाः 
D. मन्दाक्रान्ता III. प्रतिपादम् सप्तदश वर्णाः

A.प्रहर्षिणी - छन्द के प्रत्येक चरण में तेरह मात्रायें होती है। म्नौ ज्रौ गास्त्रिदशयतिः प्रहर्षिणीयम् "
("वृत्त रत्नाकर")
जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमशः मगण, नगण, जगण, रगण, तथा एक गुरू-वर्ण आये वह प्रहर्षिणी है।
ऽ  ऽ  ऽ    ऽ | ऽ ऽ  |  |  |    | |   |  ऽ  |  | ऽ |  |   ऽ  ऽ
या सृष्टिः       स्रष्टुराधा वहति विधि हुतं या हविर्या च होत्री

C. शार्दूल विक्रिडितम्- छन्द में प्रतिचरण उन्नीश अक्षर होते है। "सूर्याश्वर्मसजस्तताः सगुरवः शार्दूल विक्रीडितम्” जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमशः मगण, सगण, जगण, सगण, श्तगण, आये तथा एक गुरू वर्ण आये उसे शार्दूल विक्रिडित कहते है। इस छन्द में सूर्य (12) तथा अश्व (7) संख्यक अक्षरों पर यति होती है।
ऽ   ऽ   ऽ  |   |  ऽ  |  ऽ  |    | | ऽ    ऽ  | ऽ ऽ  | 
यास्यत्यद्य      शकुन्तलेति      हृदयं       संस्पृष्ट मुत्कण्ठया
D. मन्दाक्रान्ता के प्रत्येक चरण में सत्रह अक्षर होते है। मन्दाक्रान्ता जलधिषडगैम्भ नतौ ताद् गुरूचेत् ।। जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमशः मगण, भगण, नगण, तगण तगण तथा दो गुरू वर्ण आयें और जलधि (4) षट् (6) एवं अग (पर्वत = 7) संख्यक वर्णों पर यति हो उसे मन्दाक्रान्ता कहते है।
ऽ  ऽ  ऽ |    |  |  |  |  | ऽ  ऽ | ऽ     | ऽ  
नैतच्चितं      यदयमुदधिःश्यामसीमां     धरित्री

75. समुचितं मेलयत-

सूची-Iसूची-II
A. श्रृंगारःI.विस्मयः
B. बीभत्सःII.हासः
C. अद्भुतम्III.जुगुप्सा
D. हास्यम्IV.रतिः

उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत

Correct Answer: (a) A-IV, B-III, C-I, D-II
Solution:

समुचित उत्तर (a) अस्ति

सूची-Iसूची-II
A. श्रृंगारःIVरतिः
B. बीभत्सःIII जुगुप्सा
C. अद्भुतम्Iविस्मयः
D. हास्यम्II हासः

A. शृङ्गार रस का स्थायी भाव रति होता है।
B. बीभत्स रस का स्थायी भाव जुगुप्सा होती है
C. अद्भुत रस का स्थायी भाव विस्मय होता है
D. हास्य रस का स्थायी भाव हास होता है।

76. समुचितं योजयत

सूची-Iसूची-II
A. अहल्याशापविमोचनमस्तिI.रामायणस्य अरण्यकाण्डे
B. शबरीवृत्तान्तमस्तिII.महाभारतस्य वनपर्वणि
C. दमयन्तीकथा वर्णिताऽस्तिIII.महाभारतस्य आदिपर्वणि
D. शकुन्तलोपाख्यानमस्तिIV.रामायणस्य बालकाण्डे

उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) A-IV, B-I, C-II, D-III
Solution:

समुचित मेलन अस्ति

A.अहल्याशाप विमोचनं अस्तिIV.रामायणस्य बालकाण्डे
B.शबरी वृत्तान्त अस्तिI.रामायण अरण्यकाण्डे
C.दमयन्ती कथा वर्णिताऽस्तिII.महाभारतस्य वनपर्वणि
D.शकुन्तलोपाख्यानअस्तिIII.महाभारतस्य आदि पर्वणि

A. अहल्याशापविमोचन वृत्तान्त रामायण के बालकाण्ड में प्राप्त होता है।
B. शबरी वृत्तान्त रामायण के अरण्य काण्ड में प्राप्त होता है।
C. दमयन्ती कथा महा भारत के वनपर्व में प्राप्त होती है।
D. शकुन्तलोपाख्यान महाभारत के आदि पर्व में प्राप्त होता है।
→ महाभारत में 18 पर्व है। महाभारत द्वैपायन व्यास की रचना है इन्हें वेद व्यास भी कहते है महाभारत को शत साहस्री संहिता भी कहते हैं।

77. समुचितं योजयत-

सूची-Iसूची-II
A. त्रयी वार्ता दण्डनीतिश्चेति विद्याःI.विशालाक्षः
B. सहध्यायिनोऽमात्यान् कुर्वीतII.औशनसाः
C. सहाध्यायिनोऽमात्यान् न कुर्वीतIII.भारद्वाजः
D. दण्डनीतिरेका विद्याIV.मानवाः

उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) A-IV, B-III, C-I, D-II
Solution:

समुचित उत्तरम् अस्ति ।
A. त्रयी वार्ता दण्डनीतिश्चेति विद्याः मानवाः
B. सहध्ययायिनोऽमात्यम् कुर्वीत् – भारद्वाजः
C. सहाध्यायिनोऽमात्यान् - विशालाक्षः
D. दण्डनीतिरेका विद्या - औशनसाः
A. त्रयी वार्ता दण्डनीतिश्चेति मानवाः/ मनु सम्प्रदाय के अनुयायी आचार्य त्रयी, वार्ता और दण्डनीति इन तीन विद्याओं को मानते है। उनका मत है कि आन्वीक्षकी का समावेश त्रयी के अन्तर्गत हो जाता है।

B. सहध्यायिनोऽमात्यान् कुर्वीत्। आचार्य भरद्वाज का मत है। कि "राजा अपने सहपाठियों को अमात्म पद पर नियुक्त करे" क्योंकि वह उनके हृदय तथा क्षमताओं से परिचित होता है।

C. सहाध्यायिनोऽमात्यान् न कुर्वीत आचार्य विशालाक्ष का कहना है। सहाध्यायियों को अमात्य नहीं नियुक्त करना चाहिए। क्योंकि वे राजा का भेद जानते है।

D. दण्डनीतिरेका विद्येत्यौशनसाः ।
औशनस् अर्थात् शुक्राचार्य के अनुयायी विद्वानों ने तो केवल दण्डनीति को ही विद्या माना है और उसी को सम्पूर्ण विद्याओं का स्थान एवं कारण स्वीकार किया है।

78. अधोलिखितानि सूक्तानि मण्डलसूक्तक्रमेण संयोजयत

(A) पुरुषसूक्तम्
(B) हिरण्यगर्भसूक्तम्
(C) विश्वामित्रनदीसंवादसूक्तम्
(D) नासदीयसूक्तम्
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) D, C, B, A
Solution:

अधोलिखितानि सूक्तानि मण्डल क्रमः प्रश्नानुसार उत्तर
4 अस्ति
C.विश्वामित्र नदी संवाद सूक्तम् - 3.33
A. पुरूष सूक्तम् - 10.90
B. हिरण्य गर्भसूक्तम् - 10.121
D. नासदीय सूक्तम् - 10.129

79. ब्राह्माणानि वेदक्रमेण योजनीयानि-

(A) गोपथब्राह्मणाम्  (B) षड्विंशब्राह्मणम् (C) ऐतरेयब्राह्मणम् (D) काण्वशतपथब्राह्मणम्
उपरि उक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) C, D, В, А
Solution:

प्रश्नानुसारं उत्तरं 4 अस्ति। प्रश्नानुसार उत्तर 4 है।
C. ऐतरेय ब्राह्मण
D. काण्वशतपथ ब्राह्मण
B. षड्विंश ब्राह्मण
A. गोपथ ब्राह्मण
C. ऐतरेय ब्राह्मण का सम्बन्ध ऋग्वेद से है ऐतरेय ब्राह्मण के रचयिता महीदास ऐतरेय ऋषि माने जाते है।
D. काण्वशतपथ ब्राह्मण का सम्बन्ध यजुर्वेद से है। काण्वशतपथ ब्राह्मण में 104 अध्याय है।
B. षड्वंश ब्राह्मणम्- यह कौथुम शाखीय सामवेद का महत्वपूर्ण ब्राह्मण है इसमें 6 अध्याय है। इसके अन्तिम अध्याय को अदभुत् बाह्मण कहते है।
A. गोपथ ब्राह्मण का सम्बन्ध अथर्ववेद से है।
गोपथ ब्राह्मण एक मात्र अथर्ववेद का ब्राह्मण है। इसका सम्बन्ध पैप्पलाद शाखा से है।

80. सांख्यमतानुसारं सृष्टेः क्रमं योजयत-

(A) प्रकृतिः (B) अहंकारः (C) षोडशकः गणः (D) महान् (E) पञ्चभूतानि
यथोचितेन क्रमेणस योजयत-

Correct Answer: (a) A, D, B, C, E
Solution:

सांख्यमतानुसारं सृष्टः क्रमम् अस्तिः प्रकृतिः- महानअहंकार षोडशकः गणः पञ्च भूतानि ।
अर्थात् सांख्यामतानुसार सृष्टि क्रम है- प्रकृति बुद्धि अहंकार षोडश
गण-पञ्चभूत ।