Solution:प्रश्नानुसार यथोचितं मेलनं d अस्ति।
| सूची-I | सूची-II |
| A. प्रहर्षिणी | II. प्रतिपादम् त्रयोदश वर्णाः |
| B. स्रग्धरा | I. प्रतिपादम् एकविंशतिः वर्णाः |
| C. शार्दूलविक्रीडितम् | IV. प्रतिपादम् एकोनविंशतिः वर्णाः |
| D. मन्दाक्रान्ता | III. प्रतिपादम् सप्तदश वर्णाः |
A.प्रहर्षिणी - छन्द के प्रत्येक चरण में तेरह मात्रायें होती है। म्नौ ज्रौ गास्त्रिदशयतिः प्रहर्षिणीयम् "
("वृत्त रत्नाकर")
जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमशः मगण, नगण, जगण, रगण, तथा एक गुरू-वर्ण आये वह प्रहर्षिणी है।
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या सृष्टिः स्रष्टुराधा वहति विधि हुतं या हविर्या च होत्री
C. शार्दूल विक्रिडितम्- छन्द में प्रतिचरण उन्नीश अक्षर होते है। "सूर्याश्वर्मसजस्तताः सगुरवः शार्दूल विक्रीडितम्” जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमशः मगण, सगण, जगण, सगण, श्तगण, आये तथा एक गुरू वर्ण आये उसे शार्दूल विक्रिडित कहते है। इस छन्द में सूर्य (12) तथा अश्व (7) संख्यक अक्षरों पर यति होती है।
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यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं संस्पृष्ट मुत्कण्ठया
D. मन्दाक्रान्ता के प्रत्येक चरण में सत्रह अक्षर होते है। मन्दाक्रान्ता जलधिषडगैम्भ नतौ ताद् गुरूचेत् ।। जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रमशः मगण, भगण, नगण, तगण तगण तथा दो गुरू वर्ण आयें और जलधि (4) षट् (6) एवं अग (पर्वत = 7) संख्यक वर्णों पर यति हो उसे मन्दाक्रान्ता कहते है।
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नैतच्चितं यदयमुदधिःश्यामसीमां धरित्री