यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2023 (संस्कृत)

Total Questions: 100

1. बाह्यार्थानुमेयवादी कः?

Correct Answer: (a) सौत्रान्तिकः
Solution:

बाह्यार्थानुमेयवादी सौत्रान्तिकः अस्ति । अर्थात् बाह्यार्थानुमेयवादी सौत्रान्तिक है। सौत्रान्तिक विचार धारा का सम्बन्ध बौद्ध धर्म की हीनयान शाखा से सम्बन्धित है।

हीनयान में वर्णित स्थविरवादी विचारधारा भी दो मूलों में विभाजित है। सौत्रान्तिक तथा वैभाषिक किन्तु दोनों के दार्शनिक सिद्धान्त सर्वास्तिवादी है। सौत्रान्तिक सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य कुमार लात ईसा की दूसरी शताब्दी में हुये इस सम्प्रदाय का कोई ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है।

(1) वैभाषिक, हीनयान शाखा का वैभाषिक सम्प्रदाय सर्वास्तिवादी सम्प्रदाय है।

(2) योगाचार-महायान सम्प्रदाय से उद्भूत एक शाखा योगाचार नाम से प्रसिद्ध हुई जिसकी प्रतिष्ठा आचार्य मैत्रेय ने की। असंग, वसुबंधु, दिङ्ाग, धर्मपाल आदि इसके प्रमुख आचार्य है।

2. अधस्तनेषु नाटकेषु विदूषकः नास्ति-

(A) उत्तररामचरितम् (B) मालविकाग्निमित्रम् (C) महावीरचरितम् (D) विक्रमोर्वशीयम्
उपर्युक्तकथनस्यालोक अधोलिखितेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) A, C केवलम्
Solution:

अधोलिखितेषु नाटकेषु विदूषक रहितः नाटकः उत्तररामचरितम् तथा महावीरचरितम् विदूषक रहितः नाटकः अस्ति। ये रचनायें महाकवि भवभूति द्वारा विरचित है। महाकवि भवभूति की तीन रचनायें है। ये तीनों विदूषक से रहित है।

(1) महावीर चरित 7 अंक।
(2) मालती माधव प्रकरण 10 अंक
(3) भवभूति में अपने नाटकों की प्रस्तावना में अपना परिचय दिया उनके अनुसार ये विदर्भ (बराबर) के पद्मपुर नामक नगर के निवासी तथा उदुम्बर कुल के ब्राह्मण थे।

इनके पांचवे पूर्वज का नाम महाकवि था जो वाजपेय यज्ञ का आयोजन करने वाले विद्वान् थे। इनके पितामह का नाम भट्टगोपाल, पिता का नाम नीलकण्ठ और माता का नाम जातुकर्णी था। ये अपने को पदवाक्य प्रमाणज्ञ कहा जाता है।

3. 'धातुपारायणम्' इति व्याकरणग्रन्थस्य रचयिता अस्ति-

Correct Answer: (d) हेमचन्द्रसूरिः
Solution:

'धातुपारायणम्' इति व्याकरणग्रन्थस्य रचयिता हेमचन्द्रसूरिः अस्ति। अर्थात् 'धातु पारायणम्' इति व्याकरण ग्रन्थ के रचयिता हेमचन्द्र सूरि है। इस ग्रन्थ में धातु का पाठ हुआ है।

4. अधस्तनेषु समुचितसिद्धान्तौ स्तः-

Correct Answer: (c) सत्यस्य पश्चभेदः - अरस्तू
Solution:

उपरिलिखितेषु सिद्धान्तेषु समुचित सिद्धान्त B तथा D अस्ति।
B काव्यस्य प्रयोजनद्वयं ज्ञानार्जनम् आनन्दश्च अरस्तू । काव्य के दो प्रयोजन है- (1) ज्ञानार्जन (2) आनन्द यह मत अरस्तू का है।
D उत्कृष्टाभिव्यक्तेः सशक्तमाध्यमः उत्कृष्टविचार एव लॉन्जाइनस। उत्कृष्ट अभिव्यक्ति का सशक्तमाध्यम उत्कृष्ट विचार ही है। यह मत लान्जाइनस का है।

5. ज्ञानयज्ञभाष्यस्य कर्ता कः ?

Correct Answer: (b) भट्टभास्करमिश्रः
Solution:

ज्ञानयज्ञभाष्यस्य कर्ता भट्टभास्करमिश्रः अस्ति। अर्थात ज्ञानयज्ञभाष्य के कर्ता भट्टकेदार मिश्र हैं।

6. ऋक्प्रातिशाख्यकारः कः अस्तिः?

Correct Answer: (c) आचार्यः शौनकः
Solution:

ऋक्प्रातिशाख्यकारः आचार्यः शौनकः अस्ति । अर्थात् ऋक्प्रातिशाख्य के रचनाकार शौनक आचार्य हैं।

7. एषु कर्मसंज्ञाविधायके सूत्रे स्तः-

(A) कर्मणि द्वितीया (B) कर्तुरीप्सिततमं कर्म (C) कर्मप्रवचनीययुक्ते द्वितीया (D) अकथितं च
उपर्युक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु समुचिमुतरं चिनुत-

Correct Answer: (b) B, D केवलम्
Solution:

उपरिलिखितेषु सूत्रेषु कर्मसंज्ञाविधायक सूत्रः स्तः। B तथा D अस्ति। अर्थात् उपर लिखे सूत्रों में कर्मसंज्ञा विधायक सूत्र B कर्तुरीप्सिततमं कर्म है- कर्ता के द्वारा ईप्सिततम की कर्म संज्ञा होती है यथा सः पुस्तकं पठति ।

D 'अकथितं च' सूत्र से दुह्याच्पच्दण्डरुधिः इन 16 धातुओं के योग में कर्म संज्ञा होती है इन धातुओं को द्विकर्मक धातु कहते हैं। अतः कर्म संज्ञासूत्र कर्तुरीप्सिततमं कर्म तथा “अकथितं च" ये दो सूत्र है अतःविकल्प (b) सही है।

"कर्मणि द्वितीया" सूत्र द्वितीया विभक्ति का विधान करता है।
“कर्मप्रवचनीययुक्ते द्वितीया" सूत्र कर्मप्रवचनीय संज्ञक उपसर्गों के योग में द्वितीया विभक्ति का विधान होता है।
नोट: NTA ने इस प्रश्न के उत्तर में विकल्प (b/d) दोनों माना है।

8. चित्तभूमीनां विकल्पं क्रमेण योजयत -

(A) निरुद्धः (B) एकाग्रः (C) क्षिप्तम् (D) मूढ़:
समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (b) (C), (D), (B), (A)
Solution:

प्रश्नानुसारं समुचितं विकल्पं
(C) क्षिप्तम् (D) मूढः (B) एकाग्रः (A) निरुद्धः पांतञ्जल योग दर्शन में चित्त की पंचविध प्रवृत्तियाँ वर्णित हैं। (1) क्षिप्तम् (2) मूढ़ (3) एकाग्र (4) निरुद्ध (5) विक्षिप्त इनका नाम चित्तभूमि रखा गया है।
(1) समाधिपाद में योग का उद्देश्य ।
(2) साधनपाद में क्लेश, कर्म एवं कर्मफल का विवेचन ।
(3) विभूतिपाद में योग के अङ्ग, परिणाम, अणिमा, महिमा सिद्धियों का वर्णन ।
(4) कैवल्य पाद में मोक्ष का विवेचन है।

9. कौटिलीयार्थशास्त्रानुसारम् अनन्यां पृथिवीं कः भुङ्क्ते ?

Correct Answer: (b) विद्याविनीतो राजा
Solution:

कौटिलीयार्थशास्त्रानुसारम् अनन्यां पृथिवीं 'विद्याविनीतो राजा' भुङ्क्ते। अर्थात् अर्थशास्त्र के अनुसार इस असीम पृथ्वी का विद्याविनीत राजा भोग करता है। अर्थशास्त्रों की परम्परा हमारे देश में अतिप्राचीन है। कौटिलीय अर्थशास्त्र के प्रणेता चाणक्य,विष्णुगुप्त हैं।

येनशास्त्रं च शस्त्रं च नंदराजगताः च भूः।
अमर्षेणोद्धृतान्याशु तेनशास्त्रमिदं कृतम् ॥
(अर्थशास्त्र से उद्धृत)

10. निरुक्तग्रन्थस्य टीकाकारी स्तः

(A) दुर्गाचार्यः (B) गर्गः (C) स्कन्दस्वामी (D) वररुचिः
उपर्युक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) A, C केवलम्
Solution:

निरुक्तग्रन्थस्य टीकाकारी (A) दुर्गाचार्यः तथा (C) स्कन्दस्वामी च अस्ति। अर्थात् निरुक्त ग्रन्थ के टीकाकार दुर्गाचार्य तथा स्कन्द स्वामी है। निरुक्त की गणना वेदाङ्गों में होती है। इसे वेद पुरुष का कान (श्रोत) कहा गया है। यह ग्रन्थ वैदिक शब्दों का कोष है।