Solution:बाह्यार्थानुमेयवादी सौत्रान्तिकः अस्ति । अर्थात् बाह्यार्थानुमेयवादी सौत्रान्तिक है। सौत्रान्तिक विचार धारा का सम्बन्ध बौद्ध धर्म की हीनयान शाखा से सम्बन्धित है।
हीनयान में वर्णित स्थविरवादी विचारधारा भी दो मूलों में विभाजित है। सौत्रान्तिक तथा वैभाषिक किन्तु दोनों के दार्शनिक सिद्धान्त सर्वास्तिवादी है। सौत्रान्तिक सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य कुमार लात ईसा की दूसरी शताब्दी में हुये इस सम्प्रदाय का कोई ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है।
(1) वैभाषिक, हीनयान शाखा का वैभाषिक सम्प्रदाय सर्वास्तिवादी सम्प्रदाय है।
(2) योगाचार-महायान सम्प्रदाय से उद्भूत एक शाखा योगाचार नाम से प्रसिद्ध हुई जिसकी प्रतिष्ठा आचार्य मैत्रेय ने की। असंग, वसुबंधु, दिङ्ाग, धर्मपाल आदि इसके प्रमुख आचार्य है।