Solution:यौवनारम्भे यूनां दृष्टिः प्रायः रागयुक्ता भवति।
यौवन के आरम्भ में प्रायः युवकों की दृष्टि सफेदी को न छोड़ने के कारण रागयुक्त हो जाती है।
अर्थात् यौवन के आरम्भ में प्रायः बुद्धिशास्त्र रूपी जल द्वारा धुलने से निर्मल पर भी मलिनता को प्राप्त हो जाती है।
युवावस्था में रजोगुण के कारण उत्पन्न भ्रमवाला स्वभाव, पुरुष को अपनी इच्छा से उसी प्रकार बहुत दूर खींच ले जाता है, जिस प्रकार धूलि के चक्कर से युक्त बवंडर सूखे पत्ते को दूर तक लेकर चला जाता है। ठीक उसी प्रकार युवावस्था का सामर्थ्य होता है।
जो युवकों को उनके लक्ष्य से दूर तक लेकर चला जाता है। इन्द्रियरूपी हरिणों को हरने वाली, वह विषयभोगरूपी मृगतृष्णा परिणाम में सदा दुःख देने वाली है। नवयौवन से कसैले अन्तः करण वाले व्यक्ति के मन को वे ही भोगे जाने वाले विषय जल के समान अधिक मधुर प्रतीत होता है।
कुमार्ग की ओर ले जाने वाला दिशाभ्रम की भाँति विषयों में अत्यधिक लगाव पुरुष को नष्ट कर देता है। क्योंकि निर्मल स्फटिक मणि में चन्द्रकिरणों की भाँति निर्मल मन में उपदेशों के गुण आसानी से प्रवेश पा लेते हैं।